Makar Sankranti [Khichadi] 2023 => मकरसंक्रांति के दिन पतंग क्यों उड़ाते है? | Why kites fly on the day of Makar Sankranti in hindi?

मकर संक्रांति (खिचड़ी) 2023: आखिर लोग मकरसंक्रांति के दिन पतंग क्यों उड़ाते है? जानिये इसकी वजह | Why do people in India fly kite on the day of Makar Sankranti in hindi?


मकर संक्रांति पर्व का इंतजार केवल दान-पुण्य के लिए ही नहीं बल्कि गजक-मूंगफली और पंतग उड़ाने के लिए भी किया जाता है। इस दिन का बेसब्री से इंतजार बच्चे, युवा और बुजुर्ग भी करते हैं क्योंकि इस दिन उन्हें दिल खोलकर पतंग उड़ाने का मौका जो मिलता है। बड़े-बूढ़े भी इस दिन बच्चों को पतंग उड़ाने से नहीं रोक पाते। हम सभी के मन में मकर संक्रांति का मतलब पतंग का दिन से जानते हैं, क्या आप जानते हैं की आखिर संक्रांति से पतंगों का क्या रिलेशन है. नहीं न... हम बताते हैं आखिर मकर संक्रांति पर क्यों उड़ाई जाती है पतंग...

[Makar Sankranti pe patang kyo udaya jata hai?] => मकर संक्रांति भारत में सबसे प्रसिद्ध त्योहारों में से एक है और हिंदू धर्म में इसका बहुत महत्व है. मकर संक्रांति हिंदूओं का खास और बड़ा पर्व माना जाता है. पौष माह का आखिरी और नए साल का पहला पर्व मकर संक्रांति पर स्नान-दान का खास महत्व होता है. लेकिन इस दिन देश के कई हिस्सों में पतंग उड़ाई जाती है और इसे पतंगोत्सव के नाम से भी जाना जाता है. इस दिन आसमान में आपको रंग-बिरंगी पतंगे उडती दिेखेगी. सभी स्नान और पूजा पाठ करने के बाद इस दिन तिल के लड्डू या तिल से बनी चीजें खाते हैं इसके बाद छतों पर पंतग उड़ाए जाते हैं. आइये जानते हैं आखिर मकर संक्रांति के दिन क्यों उड़ाई जाती है पतंग. (Why kite is flown on the day of Makar Sankranti in hindi?)

[Makar Sankranti ke baare me jaankari] => मकर संक्रांति हिंदुओं का प्रमुख पर्व माना जाता है. हिंदू पंचांग के अनुसार पौष माह में जब सूर्य मकर राशि में आता है तब ये पर्व मनाया जाता है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार माना जाता है कि इस दिन देव भी धरती पर अवतरित होते हैं और आत्मा को मोक्ष की प्राप्ति होती है. मकर संक्रांति के दिन पुण्य, दान, जप तथा धार्मिक अनुष्ठानों का महत्व माना जाता है. इस दिन भगवान को खिचड़ी का भोग लगाया जाता है. कई स्थानों पर इस दिन मृत पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए खिचड़ी दान करने की परंपरा भी माना जाती है. (Patang q udaate hai?)

 

मकर संक्रांति वह दिन है जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है जो कि मकर राशि है। दूसरी ओर, संक्रांति प्रकाश का प्रतीक है. यह बौद्धिक बुद्धिमत्ता का संदेश भी देता है. माना जाता है कि यह दिन हमारे देश में वसंत के आगमन और सर्दियों के मौसम की समाप्ति का प्रतीक है। इस दिन से दिन बड़े होने लगते हैं और रातें छोटी होने लगती हैं. इस दिन का अर्थ है 'पौसा' के अपवित्र महीने का अंत. दिन सूर्य के उत्तर की ओर बढ़ने के साथ मेल खाता है, जो अपने दक्षिणी बिंदु पर पहुंच गया है. इसे वैदिक दर्शन में उत्तरायण के नाम से जाना जाता है. इसलिए, इस दिन को उत्तरायण के शुभ काल की शुरुआत के रूप में जाना जाता है.

मकरसंक्रांति के दिन पतंग क्यों उड़ाते है? | Why kites fly on the day of Makar Sankranti in hindi?


आखिर क्यों उड़ाई जाती है मकरसंक्रांति में पतंग? || Why are kites flown in Makar Sankranti in hindi?

[Kyon udaee jaatee hai makarasankraanti mein patang?] => 15 जनवरी को भारत में मकर संक्रांति का पर्व हर्षोल्लास से मनाया जाएगा. बाजारों में तिल-गुड़, चने, गजक-मूंगफली की भरमार रहेगी तो वहीं दूसरी ओर पतंगों की दुकानें भी सजी रहेंगी. इन दिनों लाल-पीली, हरी-गुलाबी तथा राजनेताओं व फिल्मी सितारों से सजी पतंगों की दुकानें हर किसी का मन मोह रही है. बहुत ही कम लोग जानते हैं, मकर संक्रांति और पतंग का क्या है रिश्ता. मकर संक्रांति बहुत से वजहों से मनाया जाता है. आइये जानते किन किन कारणों से मकर संक्रांति मनाया जाता है. (Why kites are flown on the day of Makar Sankranti in hindi?)


मकर संक्रांति पर पतंग क्यों उड़ाते है => भगवान राम से जुड़ी है मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाने की परंपरा

कहा जाता है कि मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाने की परंपरा भगवान श्री राम के समय में शुरू हुई थी. तमिल की तन्दनानरामायण के मुताबिक, मकर संक्रांति के दिन ही भगवान राम ने भी पतंग उड़ाई थी और वो पतंग इन्द्रलोक में चली गई थी. भगवान राम से शुरू की गई इस परंपरा को आज भी निभाया जाता है. 


मकर संक्रांति पर पतंग क्यों उड़ाते है => शुभ संदेश देती है पतंग

पतंग शुभ संदेश की वाहक मानी जाती है. मान्यता है कि पतंग खुशी, उल्लास, आजादी और शुभ संदेश की वाहक है. इस दिन से घर में सारे शुभ काम शुरू हो जाते हैं. यह काम पतंग की तरह ही सुंदर, निर्मल और उच्च कोटि के हों इसलिए पतंग उड़ाई जाती है. नई सोच और शक्ति के साथ पतंग उड़ाने से दिल खुश और दिमाग संतुलित रहता है. उसे ऊंचाई तक उड़ाना और कटने से बचाने के लिए हर पल सोचना इंसान को नई सोच की प्रेरणा और शक्ति देता है. इस कारण पुराने जमाने से लोग पतंग उड़ा रहे हैं.


मकर संक्रांति पर पतंग क्यों उड़ाते है => नयी सोच और शक्ति

पतंग उड़ाने से दिल खुश और दिमाग संतुलित रहता है, उसे ऊंचाई तक उड़ाना और कटने से बचाने के लिए हर पल सोचना इंसान को नयी सोच और शक्ति देता है इस कारण पुराने जमाने से लोग पतंग उड़ा रहे हैं.


मकर संक्रांति पर पतंग क्यों उड़ाते है => सूरज की रोशनी के लिए

सर्दी के दिनों में सूरज की रोशनी बहुत जरूरी होती है इस कारण भी लोग पतंग उड़ाते हैं. ऐसा माना जाता है मकर संक्रांति के दिन से सूरज देवता प्रसन्न होते हैं इस कारण लोग घंटो सूर्य की रोशनी में पतंग उड़ाते हैं, इस बहाने उनके शरीर में सीधे सूरज देवता की रोशनी और गर्मी पहुंचती है, जो उन्हें सीधे तौर पर विटामिन डी देती है और साथ ही धूप खांसी, जुकाम से भी बचाती है.


मकर संक्रांति पर पतंग क्यों उड़ाते है => सेहत के लिए 

कहा जाता है कि सर्दियों में हमारा शरीर खांसी, जुकाम और अन्य कई संक्रमण से प्रभावित होता है मकर संक्रांति के दिन सूर्य उतारायण में होता है. सूर्य के उतरायण में जाने के समय उससे निकलने वाली सूर्य की किरणें मानव शरीर के लिए औषधि का काम करती हैं. इसलिए पतंग उड़ाने के शरीर को लगातार शरीर को सूर्य से सेंक मिलता है, और उससे हमारा शरीर स्वस्थ रहता है. इसके अलावा कहा जाता है कि पतंग उड़ाने से हाथों की एक्सरसाइज भी होती है. ये स्वास्थ्य के लिए बहुत बेहतर माना गया है.


मकर संक्रांति पर पतंग क्यों उड़ाते है => एकता का पाठ पढ़ाती है पतंग

पतंग अकेले उड़ाई नहीं जा सकती है, एक इंसान मांझा पकड़ता है तो डोर किसी दूसरे के हाथ में होती है। एक छोटी सी पतंग लोगों को एकता का पाठ पढ़ाती है, यही नहीं पतंग के जरिए लोग हार-जीत का अंतर भी समझते हैं, वो भी बेहद प्यार से.


मकर संक्रांति पर पतंग क्यों उड़ाते है => प्रेम का संदेश देती है पतंग 

पतंग को आजादी, खुशी और शुभ संदेश का प्रतीक माना जाता है. कई जगह लोग इस पर्व पर तिरंगी पतंग भी उड़ाते हैं. माना जाता है कि पतंग उड़ाने से दिमाग संतुलित रहता है और दिल को खुशी का एहसास होता है. मकर संक्रांति पर बच्चों के लिए कई जगहों पर मेलों का आयोजन किया जाता है. इस पर्व पर लोग नाचते-गाते हैं, पतंग उड़ाते हैं. कई लोग इस दौरान पवित्र नदियों में स्नान करते हैं. मकर संक्रांति पर किया हुआ दान अक्षय फलदायी होता है.


मकर संक्रांति के पीछे क्या है कथा? || What is the story behind Makar Sankranti in hindi?

[Makar sankraanti ke peechhe kya hai katha?] => कहा जाता है कि मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाने की परंपरा भगवान श्री राम के समय में शुरू हुई थी. तमिल की तन्दनानरामायण के मुताबिक, मकर संक्रांति के दिन ही भगवान राम ने भी पतंग उड़ाई थी और वो पतंग इन्द्रलोक में चली गई थी. भगवान राम से शुरू की गई इस परंपरा को आज भी निभाया जाता है.

[Bhagwan Ram aur patang udaane ki kahani] => मान्यता के अनुसार, त्रेतायुग में भगवान श्री राम ने मकर संक्रांति के दिन ही अपने भाइयों और श्री हनुमान के साथ पतंग उड़ाई थी,  वह सीधे स्वर्ग लोक पहुंच गई थी. स्वर्ग में यह पतंग इंद्र के पुत्र जयंत की पत्नी को मिला था. उन्हें पतंग बहुंत पसंद आयी थी और उन्होंने अपने पास रख लिया था.

स्वर्ग में जयंत की पत्नी ने सोचा की जिसकी पतंग है, वह इसे लेने के लिए जरूर आएगा. उधर भगवान राम ने हनुमान जी को पतंग लाने के लिए भेज दिया था. जब हनुमान जी ने जयंत की पत्नी से पतंग वापस करने के लिए कहा, तो उन्होंने भगवान राम के दर्शन की इच्छा जताई. उन्होंने कहा था कि भगवान राम के दर्शन के बाद ही वह पतंग वापस करेंगी.

हनुमान जी ने वापस श्री राम के पास आकर पूरी बात बतायी. जिसके बाद भगवान राम ने कहा था कि वह मेरे दर्शन चित्रकूट में कर सकती हैं और यह आदेश देने के लिए हनुमान जी को पुन: भेज दिया. हनुमान जी ने स्वर्ग लोक में जयंत की पत्नी को भगवान राम का आदेश दिया. जिसके बाद उन्होंने पतंग वापस कर दी थी. तब से लेकर आज तक मकर संक्रांति के दिन पतंग उड़ाने की प्रथा चलती चली आ रही है.

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पतंगबाजी की परंपरा भगवान श्रीराम ने की थी, पुराणों में उल्लेख मिलता है कि मकर संक्रांति पर भगवान राम ने पहली बार पतंग उड़ाई थी और यह पतंग स्वर्ग में इंद्र के पास गई थी, तमिल के टंडनारामायण में भी इसका उल्लेख मिलता है, भगवान ने इस पतंग पर संदेश लिखकर इंद्रदेव को दे दिया. मान्यता है कि संक्रान्ति के दिन यदि आप अपनी मनोकामना लिखकर उसे उड़ाते हैं तो वह भगवान के पास पहुंच जाती है और आपकी मनोकामना पूरी हो जाती है. (Story of Lord Ram and Makar Sankranti in hindi)


मकर संक्रांति और पतंग का शिलशिला  | Makar Sankranti and Kite Shilshila

पतंग उड़ाने का रिवाज मकर संक्रांति के साथ जुड़ा हुआ है. मकर संक्रांति के दिन पतंग उड़ाने की परंपरा है. मकर संक्रांति के दिन अक्सर अपने घरों की छतों से पतंग उड़ाकर इस त्योहार का जश्न मनाते हैं. इस दिन आसमान में रंग-बिरंगी पतंगें दिखाई देती हैं. पूरे उत्तर भारत का ही आलम यही होता है. कई जगहों पर तो पतंग उड़ाने की प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जाती हैं, मकर संक्रांति के दिन पतंग उड़ाकर यह त्योहार मनाने का चलन काफी प्रचलित है.

मकर संक्रांति के दिन कई शहरों में पतंगोत्सव के लिए प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जाती है, जिसे देखने दूर-दूर से लोग आते हैं. गुजरात, जयपुर और पंजाब जैसे राज्यों में पतंगोत्वस बड़े ही धूम धाम के साथ मनाया जाता है. मकर संक्रांति के अलावा पोंगल और स्वतंत्रता दिवस के मौके पर भी पतंग उड़ाए जाते हैं.

गुजरात में तो मकर संक्रांति के दिन पतंग उड़ाकर यह त्योहार मनाने का चलन काफी प्रचलित है. पतंग उड़ाने का रिवाज मकर संक्रांति के साथ जुड़ा हुआ है. मकर संक्रांति के दिन अक्सर अपने घरों की छतों से पतंग उड़ाकर इस त्योहार का जश्न मनाते हैं. कई जगहों पर तो पतंग उड़ाने की प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जाती हैं. 


मकर संक्रांति में पतंग उड़ाने से सेहत को क्या फायदा है? || What is the health benefit of flying kites in Makar Sankranti in hindi?

[Makar sankraanti mein patang udaane se sehat ko kya phaayada hai?] => मान्यताओं के अनुसार, मकर संक्रांति पर लोग सूर्य की किरणों के संपर्क में आने के लिए पतंग उड़ाते हैं. इस तरह लोग सर्दियों से जुड़े त्वचा के संक्रमण और बीमारियों से छुटकारा पा सकते हैं. इस समय सूर्य की किरणें प्राप्त करना अधिक महत्वपूर्ण होता है क्योंकि सर्दियों के महीनों में लोगों को यह लंबे समय तक नहीं मिल पाती थी. सूर्य की शुरुआती किरणों के संपर्क में आना स्वास्थ्य के लिए विशेष रूप से फायदेमंद माना जाता है, क्योंकि यह विटामिन डी का अच्छा स्रोत है. इसके साथ ही लोगों का यह भी मानना ​​है कि पतंग उड़ाना देवताओं को धन्यवाद देने का एक तरीका है क्योंकि ऐसा माना जाता है कि जिस दिन भगवान जागते हैं छह महीने की अवधि के बाद मकर संक्रांति का.

  • सर्दी के कारण हमारे शरीर में कफ की मात्रा बढ़ जाती है और त्वचा भी रुखी हो जाती है. मकर संक्रांति पर सूर्य उत्तरायण होता है, इस कारण इस समय सूर्य की किरणें औषधि का काम करती हैं.
  • पतंग उड़ाते समय हमारा शरीर सीधे सूर्य की किरणों के संपर्क में आ जाता है, जिससे सर्दी से जुड़ी शारीरिक समस्याओं से निजात मिलती है व त्वचा को विटामिन डी भी पर्याप्त मात्रा में मिलता है.
  • इस मौसम में विटामिन डी हमारे शरीर के लिए बहुत आवश्यक होता है, जिससे हमें जीवनदायिनी शक्ति मिलती है.
  • यही कारण है कि मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाने की परंपरा की शुरूआत हुई.


यह भी पढ़े 

👉 Makar Sankranti 2023: आखिर क्यों मनाया जाता है मकर संक्रांति का त्यौहार? जाने मकर संक्रांति का इतिहास, कारण, और पौराणिक महत्व

👉 Diwali : दिवाली क्यों मनाई जाती है, जानिये इसके पीछे की कहानियां और परंपराएं...

👉 Navratri : जानिए आखिर वर्ष में 2 बार नवरात्री क्यों मनाया जाता है? 

👉 https://stories.1bharatshreshthabharat.in/Kagaj-ki-patang-kaise-banate-hai/

👉 Patang [Makar Sankranti Kite Festival 2023]: घर पर कागज की पतंग कैसे बनाये (How to make Kite at home in hindi?)


मकर संक्रांति का वैज्ञानिक महत्व क्या है? || What is the scientific significance of Makar Sankranti in hindi?

[Makar sankraanti ka vaigyaanik mahatv kya hai?] => मकर संक्रांति का धार्मिक तथा वैज्ञानिक दोनों ही महत्व है. ऐसा कहा जाता है कि जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है तो मकर संक्रांति का योग बनता है, लेकिन इसके अलावा भी कई सारे बदलाव आते हैं. मकर संक्रांति का संबंध केवल धर्म से ही नहीं बल्कि अन्य चीजों से भी जुड़ा है, जिसमें वैज्ञानिक जुड़ाव के साथ-साथ कृषि से भी जुड़ाव रहता है. मकर संक्रांति के बाद जो सबसे पहले बदलाव आता है वह है दिन का लंबा होना और रातें छोटी होनी लगती हैं. मकर संक्रांति के दिन सभी राशियों के लिए सूर्य फलदायी होते हैं, लेकिन मकर और कर्क राशि के लिए ज्यादा लाभदायक हैं. हम आपको बताते हैं कि किस तरह से मकर संक्रांति किन-किन क्षेत्रों से जुड़ा हुआ है. 

आर्युवेद में भी है मकर संक्रांति का महत्व. आयुर्वेद के अनुसार इस मौसम में चलने वाली सर्द हवाएं कई बीमारियों की कारण बन सकती हैं. इसलिए प्रसाद के तौर पर खिचड़ी, तिल और गुड़ से बनी हुई मिठाई खाने का प्रचलन है. तिल और गुड़ से बनी हुई मिठाई खाने से शरीर के अंदर रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ता है. इन सभी चीजों के सेवन से शरीर के अंदर गर्मी भी बढ़ती है. (Scientific significance of Makar Sankranti in hindi?)


खिचड़ी के फायदे

खिचड़ी का सेवन से पाचन क्रिया दुरुस्त होती है. इस दिन खिचड़ी का सेवन करने का भी वैज्ञानिक कारण है. खिचड़ी पाचन को दुरुस्त रखती है. अदरक और मटर मिलाकर खिचड़ी बनाने पर यह शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है, और बैक्टीरिया से लड़ने में मदद करती है.

मकर संक्रांति के दिन प्रसाद के रूप में खाए जाने वाली खिचड़ी सेहत के लिए काफी फायदेमंद. खिचड़ी से पाचन क्रिया सुचारु रूप से चलने लगती है. इसके अलावा आगर खिचड़ी मटर और अदरक मिलाकर बनाएं तो शरीर के लिए काफी फायदेमंद होता है. यह शरीर के अंदर रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है साथ ही बैक्टिरिया से भी लड़ने में मदद करती है. बता दें कि एक संक्रांति से दूसरे संक्रांति के बीच के समय को सौर मास कहते हैं.


मकर संक्रांति से बदलता है वातावरण

मकर संक्रांति के बाद नदियों में वाष्पन की प्रक्रिया शुरू हो जाती है, जिससे कई सारी शरीर के अंदर की बीमारियां दूर हो जाती हैं. इस मौसम में तिल और गुड़ खाना काफी फायदेमंद होता है. यह शरीर को गर्म रखता है. वैज्ञानिकों का मानना है कि उत्तारायण में सूर्य के ताप शीत को कम करता है.


तिल गुण का सेवन सेहत के लिए लाभदायक

मकर संक्रांति के समय उत्तर भारत में ठंड का मौसम रहता है. इस मौसम में तिल-गुड़ का सेवन सेहत के लिए लाभदायक रहता है. यह चिकित्सा विज्ञान भी कहता है. इससे शरीर को ऊर्जा मिलती है. यह ऊर्जा सर्दी में शरीर की रक्षा रहती है.

तिल में कॉपर, मैग्नीशियम, ट्राइयोफान, आयरन, मैग्नीज, कैल्शियम, फास्फोरस, जिंक, विटामिन बी 1 और रेशे प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं. एक चौथाई कप या 36 ग्राम तिल के बीज से 206 कैलोरी ऊर्जा प्राप्त होती है. यह गठिया रोग के लिए अत्यंत लाभकारी है.


नदियों में स्नान करने का महत्व

मकर संक्रांति के समय नदियों में वाष्पन क्रिया होती है. इससे तमाम तरह के रोग दूर हो सकते हैं. इसलिए इस दिन नदियों में स्नान करने का विशेष महत्व है.


सूर्य की राशि में हुए परिवर्तन को अंधकार से प्रकाश की ओर अग्रसर होना 

इस दिन से रात छोटी और दिन बड़े होने लगते हैं. दिन बड़ा होने से सूर्य की रोशनी अधिक होती है, और रात छोटी होने से अंधकार कम होता है. इसलिए मकर संक्रांति पर सूर्य की राशि में हुए परिवर्तन को अंधकार से प्रकाश की ओर अग्रसर होना माना जाता है.

मकर संक्रान्ति पर्व को कहीं-कहीं उत्तरायण भी कहा जाता है. इस दिन गंगा स्नान कर व्रत, कथा, दान और भगवान सूर्यदेव की उपासना करने का विशेष महत्त्व है.


मकर संक्रान्ति के धार्मिक महत्व क्या हैं? || What is the religious significance of Makar Sankranti in hindi?

[Makar sankranti ka dharmik mahatva kya hai?] => मकर संक्रांति का धार्मिक महत्व है. मकर संक्रांति में 'मकर' शब्द मकर राशि को इंगित करता है. जबकि 'संक्रांति' का अर्थ संक्रमण अर्थात प्रवेश करना है. मकर संक्रांति के दिन सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करता है. एक राशि को छोड़कर दूसरे में प्रवेश करने की इस विस्थापन क्रिया को संक्रांति कहते हैं. मकर संक्रांति वह दिन है जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है जो कि मकर राशि है. दूसरी ओर, संक्रांति प्रकाश का प्रतीक है. यह बौद्धिक बुद्धिमत्ता का संदेश भी देता है. 

हिंदू पंचांग के अनुसार पौष माह में जब सूर्य मकर राशि में आता है तब ये पर्व मनाया जाता है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार माना जाता है कि इस दिन देव भी धरती पर अवतरित होते हैं और आत्मा को मोक्ष की प्राप्ति होती है.

मकर संक्रांति के दिन पुण्य, दान, जप तथा धार्मिक अनुष्ठानों का महत्व माना जाता है. इस दिन भगवान को खिचड़ी का भोग लगाया जाता है. कई स्थानों पर इस दिन मृत पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए खिचड़ी दान करने की परंपरा भी माना जाती है. मकर संक्रांति एक मौसमी पालन के साथ-साथ एक धार्मिक उत्सव भी है यह किसानों के लिए एक त्योहार है क्योंकि कटाई पूरी हो चुकी है और वे इसे मनाने के लिए एक साथ आते हैं. (What is Religious significance of Makar Sankranti in hindi?)


संक्रांति का धार्मिक महत्व =>

भीष्म पितामह

महाभारत काल में भीष्म पितामह ने अपनी देह त्यागने के लिए मकर संक्रांति का ही चयन किया था.


महराज भागीरथ का गंगा को धरती पर लाकर अपने पूर्वजों का तर्पण करना  

एक अन्य कथा के अनुसार गंगा को धरती पर लाने वाले महाराज भगीरथ ने अपने पूर्वजों के लिए इस दिन तर्पण किया था. उनका तर्पण स्वीकार करने के बाद इस दिन गंगा समुद्र में जाकर मिल गई थी. इसलिए मकर संक्रांति पर गंगा सागर में मेला लगता है.


सूर्य का अपने पुत्र शनि के घर एक महीने के लिए आना

पुराणों के अनुसार मकर संक्रांति के दिन सूर्य अपने पुत्र शनि के घर एक महीने के लिए जाते हैं, क्योंकि मकर राशि का स्वामी शनि है.

हालांकि ज्योतिषीय दृष्टि से सूर्य और शनि का तालमेल संभव नहीं, लेकिन इस दिन सूर्य खुद अपने पुत्र के घर जाते हैं. इसलिए पुराणों में यह दिन पिता-पुत्र के संबंधों में निकटता की शुरुआत के रूप में देखा जाता है.


भगवान विष्णु ने असुरों का अंत करके युद्ध समाप्ति की घोषणा 

इस दिन भगवान विष्णु ने असुरों का अंत करके युद्ध समाप्ति की घोषणा की थी।उन्होंने सभी असुरों के सिरों को मंदार पर्वत में दबा दिया था. इसलिए यह दिन बुराइयों और नकारात्मकता को खत्म करने का दिन भी माना जाता है.


देवताओं का दिन प्रारंभ

हिन्दू धर्मशास्त्रों के अनुसार मकर संक्रांति से देवताओं का दिन आरंभ होता है, जो आषाढ़ मास तक रहता है. कर्क संक्रांति से देवताओं की रात प्रारंभ होती है. अर्थात देवताओं के एक दिन और रात को मिलाकर मनुष्‍य का एक वर्ष होता है. मनुष्यों का एक माह पितरों का एक दिन होता है.

मकरसंक्रांति के दिन पतंग क्यों उड़ाते है? | Why kites fly on the day of Makar Sankranti in hindi?


मकर संक्रांति पर महाराष्ट्र में काले वस्त्र क्यों पहने जाते है? || Why are black clothes worn in Maharashtra on Makar Sankranti in hindi?

[Makar Sankranti par Maharashtra mein kaale kapde kyon pahane jaate hai?] => मकर संक्रांति पर काले रंग के कपड़े पहनने की परंपरा है, वैसे यह परंपरा पूरे भारत में नहीं है, मकर संक्रांति मनाने वाले लोग केवल महाराष्ट्र राज्य में काले कपड़े पहनते हैं, देश के अन्य शहरों में रंग-बिरंगे कपड़े और ज्यादातर पीले रंग के कपड़े पहने जाते हैं.

संक्रान्ति पर काले वस्त्र धारण करने का कारण-

मान्यताओं के अनुसार मकर संक्रांति के दिन सूर्य उत्तर दिशा में प्रवेश करता है, इसलिए माना जाता है कि इस दिन से शीत ऋतु समाप्त होती है और शरद ऋतु की शुरुआत होती है, यह मौसम के सबसे ठंडे दिनों से पहले है, ऐसे में विज्ञान के अनुसार काले कपड़े सर्दी से बचाव में उपयोगी माने जाते हैं, इसलिए मकर संक्रांति पर लोग गहरे रंग के कपड़े पहनते हैं. (Reason in wearing black clothes on Makar Sankranti in Maharashtra in hindi?)


मकर संक्रांति में पतंग उड़ाने के क्या महत्त्व है? || What is the importance of flying kites in Makar Sankranti in hindi?

[Makar sankranti me patang udaane ka mahatva kya hai?] => मकर संक्रांति काल में पतंग उड़ाना एक प्रसिद्ध तथ्य है. इस दिन हर जगह पतंग उड़ाए जाते हैं, और यह दृश्य काफी सुंदर दिखाई देते हैं.

माकर संक्रांति में पतंग उड़ाने का बहुत महत्व होता है. यह भारत के विभिन्न हिस्सों में मनाया जाने वाला एक प्रमुख त्यौहार है, जो कि हिन्दू कैलेंडर में मास मार्गशीर्ष से शुरू होता है. इस त्यौहार के दिन, लोग पतंग ऊठाते हैं और उनके साथ मज़े करते हैं.

पतंग ऊठाने का महत्व इसलिए होता है कि यह संक्रांति का प्रतीक होता है. इस त्यौहार के दिन, सूर्य दक्षिण राशि में प्रवेश करता है, जो कि मासिक मार्गशीर्ष को सूचित करता है. इसलिए, लोग पतंग उड़ाते हैं और सूर्य की यह प्रवेश मनाते हैं.

मकर संक्रांति के यह प्रतीक का महत्व हमारे संस्कृति में बहुत अहम है. इसे हमारे पुराणों में विषय किया गया है. पतंग उठाने से व्यक्तिगत विकास में भी योगदान होता है. यह एक जोरदार फैशनिक गतिविधि है जो आपको बहुत ही खुशियों से भरपूर बना सकती है. इससे आपको ताजगी महसूस होती है और आपका मानसिक स्वास्थ्य भी मजबूत होता है. (Importance of flying kite in hindi)


पतंगो का इतिहास क्या है? || What is History (Facts) of kites in ancient China in hindi

[Patang udaane ka itihas kya hai?] => प्रत्येक वस्तु के इतिहास इतिहास के तरह ही पतंग का भी एक इतिहास है. माना जाता है कि लगभग 2800 वर्ष पहले पतंग उड़ाने की शुरुआत चीन देश में हुई थी. कहते है की चीन में पतंग का आविष्कार मोजी और लू बैन नाम के दो शक्श ने किया था. उस जमाने में पतंग का इस्तेमाल बचाव कार्य के लिए एक संदेश के रूप में, हवा की तीव्रता और संचार के लिए किया जाता था. परन्तु 5वीं शताब्दी ईसा पूर्व जिन उद्देश्यों से पतंग का आविष्कार किया गया था, वो उद्देश्य इस वक्त बदल से गए हैं और अब पतंग को केवल मनोरजन के रुप में इस्तेमाल किया जाता है. (History of flying kite in hindi)


भारत के विभिन्न राज्यों में मकरसंक्रांति को क्या कहते हैं? || What is Makar Sankranti called in different states of India in hindi?

[Makar sankranti ko kis rajya me kya kaha jata hai?] => मकर संक्रांति का पर्व पूरे भारत में मनाया जाता है. यह सूर्य आराधना का पर्व है , जिसे भारत के प्रांतों में अलग-अलग नाम से जाना जाता है. भारत के अलग-अलग प्रांतों में इस त्योहार को मनाए जाने के ढंग भी अलग हैं, लेकिन इन सभी के पीछे मूल ध्येय सूर्य की आराधना करना है.

आंध्रप्रदेश, केरल और कर्नाटक में इसे संक्रांति कहा जाता है, और तमिलनाडु में इसे पोंगल पर्व के रूप में मनाया जाता है. पंजाब और हरियाणा में इस समय नई फसल का स्वागत किया जाता है, और लोहड़ी पर्व मनाया जाता है, वहीं असम में बिहू के रूप में इस पर्व को उल्लास के साथ मनाया जाता है. हर प्रांत में इसका नाम और मनाने का तरीका अलग-अलग होता है. (What is various names of Makar Sankranti in different parts of India in hindi?)


भारत के अलावा और किन देशों में पतंग उड़ाए जाते है? || Apart from India, in which other countries are kites flown in hindi?

[Bharat ke alaava aur kin deshon mein patang udaae jaate hai?] => देखा जाए तो पुरे विश्व भर में पतंग उड़ाई जाती हैं. चीन देश से शुरू हुआ पतंग उड़ाने का ये चलन धीरे-धीरे पूरी दुनिया में फैल गया और इस समय दुनिया के तमाम कई देशों में पतंग उड़ाई जाती है. इन देशों की सूची में भारत, अमेरिका, मलेशिया और जर्मनी सहित कई और देशों के नाम शामिल हैं. वहीं हर देश में भिन्न भिन्न कारणों के वजह से पतंग त्यौहार उत्सव मनाया जाता है. जैसी चिली देश में स्वतंत्रता दिवस के दौरान वहां के निवासी पतंग उड़ाकर अपना स्वतंत्रता दिवस मनाते हैं. वहीं जापान में भी पतंग बाजी उनके देवता को खुश करने के लिए हर साल मई के महीने में की जाती है. इसके अलावा अमेरिका में जून के महीने में पतंग का त्यौहार मनाया जाता है और इससे जुड़े कई कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं. जिनमें वहां के लोग और बच्चे बढ़ चढकर हिस्सा लेते हैं. भारत में भी स्वतंत्रता दिवस के दिन और मकर संक्रांति के दिन पतंगें आसमान में उड़ती हुई देखी जाती हैं. (kites flown in various countries)


मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाते समय हमें कौन सी सावधानिया बरतनी चाहिए? || What precautions should we take while flying kites on Makar Sankranti in hindi?

मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाते समय हमें बोहोत सी बातो का ध्यान रखना चाहिए ताकि इससे किसी इंसान या पशु पक्षी को नुक़सान न पहुंचे. इसके लिए आपको बेहद सतर्क और जागरूक रहने की जरूरत है. कुछ महत्वपूर्ण सावधानियां निचे दी गयी है, उन्हें जरूर अपनाएं =>

  • मार्किट से चीन की डोर (मांझा) के बजाए सामान्य मांझा खरीदकर लाएं. यह तुलनात्मक काम खतरनाक होता है, और इतना पक्का भी नहीं होता है, कि किसी पशु-पक्षी को घायल कर सके.
  • अगर घर में गलती से भी चाइना की डोर आ गई है, तो उसे बच्चों से दूर रखें और चाइना डोर के नुकसान और खतरे से अवगत कराएं.
  • पतंग उड़ाते समय भी विशेष रूप से ध्यान रखें. सामान्य धागे में भी कई बार कांच का मिश्रण लगा होता है. यह आपको नुकसान पंहुचा सकता है.
  • अगर बच्चे मिलकर पतंग उड़ा रहे हैं, तो बड़े इस बात का ख्याल रखें कि बच्चे किस प्रकार के मांझे का प्रयोग कर रहे हैं. वहां रहकर बच्चों पर ध्यान रखें.
  • पतंग के कहीं उलझने या टकराने पर उसे खींचने का प्रयास न करें. इससे संबंधि‍त वस्तु को नुकसान पहुंच सकता है, साथ ही आपके हाथ में भी चोट लग सकती है.
  • सुरक्षि‍त स्थान पर खड़े रहकर पतंग उड़ाएं और इस बात का विशेष ध्यान रखें कि मंझा किसी को स्पर्श न कर सके. इससे आसपास के लोग भी सुरक्षि‍त रहेंगे.


मकर संक्रांति क्यों मनाते है? || Why do we celebrate Makar Sankranti festival in hindi?

[Makar Sankranti ka tyohar kyo manaate hai?] => हिन्दू धर्म के अनुसार इस दिन सूर्य भगवान मकर राशि के अंदर दाखिल होते है. वहीं इस दिन के बाद से मौसम में भी बदलाव आता है और ठण्ड थोड़ी कम हो जाती है. किसानों के लिए इस दिन का खास महत्व हैं. इस दिन के बाद से किसान अपनी फसलों की कटाई करना शुरू कर देते हैं. पूरे साल में कुल बारह संक्रांति आती हैं, लेकिन जनवरी के महीने में आने वाली इस संक्रांति को काफी शुभ माना जाता है. कहा जाता है कि इस दिन सूरज की उत्तरायण गति प्रारम्भ करते हैं. उत्तरायण का मतलब सूरज पूर्व से उत्तर की ओर गमन करते है और इस गमन के दौरान सूरज की किरणों को अच्छा माना जाता है. वहीं जब सूरज पूर्व से दक्षिण की ओर गमन करता है, तब उनकी किरणों को खराब माना जाता है. सूरज की इसी उत्तरायण गमन के चलते गुजरात में इस त्योहार को उत्तरायण कहा जाता है. (Why does Makar Sankranti is celebrated in hindi?)


मकर संक्रान्ति 14 के बजाय 15 जनवरी को मनाए जाने के पीछे क्या वैज्ञानिक कारण है? || What is the reason behind celebrating Makar Sankranti on January 15 instead of January 14?

[14 January ke bajay 15 January ko Makar Sankranti kyo manaaya jata hai?] => संसार मे दो तरह के कलेंडर होते है. एक सूर्य की गड़ना से आए एक की।चांद की गड़ना में दिन कम पड़ जाते है, इसलिए हिंदुओं में हर चौथे साल मलमास लगाकर दिन पूरा किया जाता है. सूर्य की गड़ना का केवल एक कैलेंडर है जिसमे जनवरी फरवरी होता है. जैसा कि दिन में 24 घंटे होते है लेकिन फिर भी कुछ घंटे मिनट बच जाते है इसलिए फरवरी 29 की होती है. ऐसा करते हुए 100 साल बाद भी एक दिन अवशेष बच जाता है इसलिए मकर संक्रांति अगले तारीख पड़ जाती है. हिन्दुओ में केवल यही त्योहार सूर्य की गड़ना पर है बाकी सब चांद की. जन्म कुंडली सूर्य की गड़ना पर बनती है, यदि चंद की गड़ना पर बनाये तो गलत हो जाएगी. (Why Makar Sankranti is celebrated on 15 January in hindi?)


मकर संक्रांति में उत्तरायण क्या होती है? || What is Uttarayan in Makar Sankranti in hindi?

[Uttarayan kya hai?] => ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सूर्य 30 या 31 दिनों में राशि परिवर्तन करता है. सूर्य का मकर राशि में प्रवेश धार्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ माना गया है. मकर संक्रांति से पहले सूर्य दक्षिणी गोलार्द्ध में होता है अर्थात भारत से दूर भारत उत्तरी गोलार्द्ध में है इस समय सूर्य दक्षिणायन होता है. इसी कारण यहां रात बड़ी एवं दिन छोटे होते हैं तथा सदी का मौसम होता है.

मकर संक्रांति वह दिन है जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है जो कि मकर राशि है. दिन, सूर्य के उत्तर की ओर बढ़ने के साथ मेल खाता है, जो अपने दक्षिणी बिंदु पर पहुंच गया है. इसे वैदिक दर्शन में उत्तरायण के नाम से जाना जाता है. इसलिए, इस दिन को उत्तरायण के शुभ काल की शुरुआत के रूप में जाना जाता है. दिन सूर्य के उत्तर की ओर बढ़ने के साथ मेल खाता है, जो अपने दक्षिणी बिंदु पर पहुंच गया है. इसे वैदिक दर्शन में उत्तरायण के नाम से जाना जाता है. इसलिए, इस दिन को उत्तरायण के शुभ काल की शुरुआत के रूप में जाना जाता है.

मकर संक्राति से सूर्य उत्तरी गोलार्द्ध की ओर आना शुरू हो जाता है. इस दिन से रातें छोटी एवं दिन बड़े होने लगते हैं व गर्मी का मौसम शुरू हो जाता है, इस प्रक्रिया को ही उत्तरायण कहते हैं. (What is Uttarayan in hindi?)


पतंग के त्यौहार [मकर संक्रांति] से जुड़े कुछ सवाल और उनके जवाब  || Frequently asked questions related to Makar Sankranti in hindi


पतंग के त्यौहार को क्या कहते हैं? || What is the festival of kites called in hindi?

[मकर संक्रांति| Makar Sankranti] => पतंग के त्यौहार को मकर संक्रांति (MakarSankranti) कहते है.


पतंगों का त्यौहार कब आता/ मनाया जाता है? || When is the festival of kites celebrated in hindi?

[जनवरी महीना | January] => पतंगों का त्यौहार अर्थात मकर संक्रांति जनवरी महीने में मनाया जाता है.


पतंग बनाने के लिए किन सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है? || What are the materials used to make kites?

पतंग बनाने में इस सामानो का उपयोग किया जाता है जैसे की कागज [Paper, ex: NEWS Paper], रेखांकन पत्र, कटर, कलम, 2 पतली डंडी, धागे [थ्रेड्स, मांझा], रोलर


अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव 2023 कब से शुरू है? || When is the International Kite Festival 2023 starting?

[6 January] => अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव 2023 6जनवरी से शुरू है.


अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव 2023 कब तक चलेगा? || How long will the International Kite Festival 2023 last?

[15 January] => अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव 2023 15 जनवरी तक चलेगा.


साल 2023 में मकर संक्रांति कब है? || When is Makar Sankranti in the year 2023 in hindi?

[15 January] => साल 2023 में मकर संक्रांति 15 जनवरी को है.

 

मकर संक्रांति वर्ष 2023 में कब है? || When is Makar Sankranti in the year 2023?

[15 January] => मकर संक्रांति वर्ष 2023 में 15 जनवरी को है.


मकर संक्रांति का शुभ मुहूर्त क्या है 2023?  || What is the auspicious time of Makar Sankranti?

ग्रहों के राजा सूर्य 14 जनवरी 2023 की रात 8 बजकर 21 मिनट पर मकर राशि में प्रवेश करेंगे. ऐसे में इस प्रकार मकर संक्रांति इस वर्ष में 15 जनवरी 2023 को मनाई जाएगी. इस वर्ष 2023 में मकर संक्रांति का पुण्य काल सुबह 07 बजकर 15 मिनट से शुरू हो रहा है, तथा शाम 07 बजकर 46 मिनट पर समाप्त होगा.


मकर संक्रांति का नाम क्या अलग अलग जगहों पर अलग अलग है ? || Is the name of Makar Sankranti different in different places?

[Yes] => मकर संक्रांति विभिन्न राज्यों में अलग अलग नामो से मनाया जाता है.


मकर संक्रांति अलग अलग राज्यों किन नामो से जाना जाता है? ||  What are other names of Makar Sankranti in different states?

प्रत्येक राज्य में मकर संक्रांति को अलग अलग नामो से जाना जाता है. मकर संक्रांति को ही पोंगल, मगही, लोहड़ी, भोगली बिहू और उत्तरायणी आदि नाम से जाना जाता है. 

Makar sankranti ko kin kin naamo se jana jata hai? (Different names of Makar Sankranti in hindi?)


मकर संक्रांति में किसकी पूजा की जाती है? ||  Who is worshiped on the day of Makar sankranti?

[SuryaDev | Lord Son] => मकर संक्रांति के दिन भगवान सूर्य की पूजा की जाती है. बहुत से स्थानों पे मकर संक्रांति के दिन भगवान विष्णु व मां लक्ष्मी की भी पूजा की जाती है.


मकरसंक्रांति 2023 वाहन क्या है? || What is MakarSankranti 2023 vehicle?

Bagh | Tiger] => इस वर्ष 2023 में मकरसंक्रांति का वाहन Tiger यानि बाघ है.


मकर संक्रांति के दिन क्या दान में दिया जाता है? || What is donated on the day of Makar Sankranti?

मकर संक्रांति के दिन काली दाल, चावल, घी, नमक, गुड़ और काले तिल आदि दान में दिया जाता हैं.


हम पतंग क्यों उड़ाते हैं? || Why do we fly kites in hindi?

मकर संक्रांति का पर्व स्वास्थ्य के लिए कई तरह से काफी लाभकारी है. पतंग उड़ाने की परंपरा सुबह के सूरज में स्वस्थ प्रदर्शन के लिए है. ये प्रारंभिक किरणें स्वस्थ और विटामिन डी का एक अच्छा स्रोत हैं. इसे त्वचा के लिए भी अच्छा माना जाता है और सर्द हवाओं के कारण होने वाले कई संक्रमणों और बीमारियों से लड़ने में मदद करता है. (Makar Sankranti Par Patang kyo udate hai?)


पतंग कब उड़ानी चाहिए? || When to fly a kite in hindi?

वर्ष के किसी भी समय पतंग उड़ाई जा सकती है बशर्ते हवा सही हो. यह अनुशंसा की जाती है कि आप अपने प्रकार की पतंग के लिए पवन सीमा का निरीक्षण करें. उन दिनों पतंग न उड़ाएं जब आप जिस प्रकार की पतंग उड़ा रहे हैं उसके लिए हवा बहुत तेज हो. इससे पतंग को ही नुकसान होगा.


पतंग का क्या महत्व है? || What is the significance of kite in hindi?

पतंग को आजादी, खुशी और शुभ संदेश का प्रतीक माना जाता है. कई जगह लोग इस पर्व पर तिरंगी पतंग भी उड़ाते हैं. माना जाता है कि पतंग उड़ाने से दिमाग संतुलित रहता है और दिल को खुशी का एहसास होता है. (Patang ka kya mahatv hai?)


हम क्यों खाते हैं तिलगुड़? || why do we eat Til Gud in hindi?

तिल के लड्डू जो की तिल और गुड़ से बनी मिठाई है यह आम तौर पर महाराष्ट्रीयन संस्कृति से लिया गया है, जिसके बाद “तिलगुल घ्या एनी गोड़ गोड़ बोला” कहा जाता है, जिसका अनुवाद ‘तिल & गुड़ खाने और मीठे शब्द बोलने के लिए किया जाता है.

मिठाइयों का वितरण बंधन और बुरे अतीत को भूलकर और केवल मिठास फैलाने का प्रतीक है. इन मिठाइयों का वैज्ञानिक महत्व यह है कि तिल शरीर को गर्म रखने में मदद करते हैं, और अच्छी मात्रा में तेल प्रदान करते हैं जो सर्दियों के दौरान नमी प्रदान करने के लिए आवश्यक है. (Makar sankranti me TilGud kyo khaya jaata hai?)


पतंग उत्सव की मुख्य विशेषता क्या है? || What is the main feature of Kite Festival in hindi?

इस त्योहार का प्रतीक देवताओं को उनकी गहरी नींद से जागरण दिखाना है. भारत के इतिहास के माध्यम से, यह कहा जाता है कि भारत ने राजाओं और राजघरानों के कारण पतंगबाजी की परंपरा बनाई, बाद में नवाबों ने, जिन्होंने इस खेल को मनोरंजक पाया, और अपने कौशल और शक्ति को प्रदर्शित करने के तरीके के रूप में. (Patang utsav ki mukhya visheshata kya hai?)


पतंग कितनी दूर तक जा सकती है? || Know how far can a kite go in hindi?

आपकी पतंग कितनी ऊंची उड़ेगी, ये आपकी पतंग की साइज पर निर्भर करता है और साथ ही हवा किस तरह से बह रही है, इसका भी असर पड़ता है. अगर वर्ल्ड रिकॉर्ड की बात करें तो 23 सितंबर 2014 को ऑस्ट्रेलिया के रॉबर्ट मूरे ने यह वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया था. इस दौरान एक पतंग को 4879 मीटर तक बढ़ाया गया था यानी करीब 5 किलोमीटर (Patang kitanee door tak ja sakatee hai?)


भारत में पतंगबाजी कब शुरू हुई? || When did kite flying start in India?

18वीं शताब्दी में शाह आलम प्रथम के शासनकाल के दौरान दिल्ली के अमीरों के बीच मनोरंजक गतिविधि के रूप में पतंगबाजी लोकप्रिय हो गई थी. (Bhaarat me patangabaajee kab suru hui thi?)


आसमान में उड़ती पतंग हमें क्या संदेश देती है? || What message does the kite flying in the sky give us in hindi?

ऊंचीं उड़ती पतंग खिलाड़ियों के मन में सकारात्मक ऊर्जा प्रवाहित करती है तो नकारात्मकता स्वयं दूर हो जाती है. पतंगबाजी मानव को कल्पनाशील भी बनाती है. जिस प्रकार पतंग विपरीत हवा में आसमान में ऊँची उड़ती है, वैसे ही विपरीत परिस्थितियों में ही मनुष्य के धैर्य तथा साहस की परीक्षा होती है. (Aasamaan me udatee patang hame kya sandesh detee hai?)


पतंग किसका प्रतीक है? || What does the kite symbolize in hindi?

पतंग का आशय है, अपार संतुलन, नियमबद्ध नियंत्रण, सफल होने का आक्रामक जोश और परिस्थितियों के अनुकूल होने का अद्भुत समन्वय. यह आक्रामक एवं जोशीले व्यक्तित्व की भी प्रतीक है.  (Patang kisaka prateek hai?)


विश्व का सबसे बड़ा पतंग उत्सव कौन सा है? || Which is the biggest kite festival in the world in hindi?

वेफ़ांग अंतर्राष्ट्रीय पतंग महोत्सव, चीन => यह आधिकारिक तौर पर विश्व स्तर पर सबसे बड़ा पतंग उत्सव है, जो हजारों लोगों को आकर्षित करता है, और यह किसी के लिए भी एक जबरदस्त तमाशा है. (Vishv ka sabase bada patang utsav kaun sa hai?)


Kagaz ki Patang kaise banate hai? | How to make patang at home? | Patang kaise banate hai? | How to make kite home?


यह भी पढ़े 

Makar Sankranti 2023: आखिर क्यों मनाया जाता है मकर संक्रांति का त्यौहार? जाने मकर संक्रांति का इतिहास, कारण, और पौराणिक महत्व

Merry Christmas 2023: आखिर क्रिसमस डे क्यों मनाया जाता है? 

Diwali : दिवाली क्यों मनाई जाती है, जानिये इसके पीछे की कहानियां और परंपराएं...

Navratri : जानिए आखिर वर्ष में 2 बार नवरात्री क्यों मनाया जाता है? 

Web Stories => https://stories.1bharatshreshthabharat.in/Kagaj-ki-patang-kaise-banate-hai/


एक टिप्पणी भेजें

और नया पुराने