India Australia Free Trade Agreement: ऑस्ट्रेलिया के साथ इंडिया का एक्सपोर्ट होगा डबल, इन सामानों को मिलेगी फ्री एंट्री | जानिये India-Australia व्यापार समझौते से भारत को कैसे होगा फायदा

India Australia Free Trade Agreement explained in Hindi: टेक्सटाइल और फार्मास्युटिकल्स से लेकर हेल्थकेयर और शिक्षा तक, भारत-ऑस्ट्रेलिया व्यापार समझौते से भारत को कैसे मिलेगा लाभ | How India will get benefitted from India Australia Free Trade Agreement in Hindi


India Australia Free Trade Agreement: कॉमर्स एंड इंडस्ट्री मिनिस्ट्री पीयूष गोयल और ऑस्ट्रेलिया के ट्रेड, टूरिज्म और इंवेस्टमेंट मंत्री डान तेहान (Dan Tehan) ने वर्चुअल कार्यक्रम में इस करार पर हस्ताक्षर किए. ये ट्रेड डील भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच आर्थिक सहयोग और व्यापार समझौते (ईसीटीए) को और उचाई तक पहुंचाने में बहुत कारीगर मानी जा रही हैं.

भारत और ऑस्ट्रेलिया ने दोनों देशों के बीच कई वस्तुओं में बाधा मुक्त व्यापार सुनिश्चित करने के लिए शनिवार को इस आर्थिक सहयोग और व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए गए. वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और ऑस्ट्रेलियाई व्यापार, पर्यटन और निवेश मंत्री डैन तेहान ने एक आभासी समारोह में पीएम नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रेलियाई पीएम स्कॉट मॉरिसन की उपस्थिति में समझौते पर हस्ताक्षर किए.

आइये जानते हैं की आखिर क्या है 'भारत ऑस्ट्रेलिया मुक्त व्यापार समझौता' (India Australia Free Trade Agreement)? कैसे यह भारतीय अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में मददगार साबित होगा? कैसे भारत-ऑस्ट्रेलिया व्यापार समझौते से छात्रों, पेशेवरों एवं पयर्टकों को होगी सुगमता? इस लेख में है 'भारत ऑस्ट्रेलिया मुक्त व्यापार समझौता' (India Australia Free Trade Agreement in Hindi) के बारे में सम्पूर्ण जानकारी प्राप्त करेंगे.

India Australia Free Trade Agreement explained in Hindi


भारत ऑस्ट्रेलिया मुक्त व्यापार समझौता | India Australia Free Trade Agreement in Hindi


2 अप्रैल 2022 को भारत-ऑस्ट्रेलिया आर्थिक सहयोग और व्यापार समझौते ("इंडऑस ईसीटीए") पर श्री पीयूष गोयल, केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री, उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण और कपड़ा, भारत सरकार और श्री डैन तेहान, मंत्री द्वारा हस्ताक्षर किए. इस समझौते पर हस्ताक्षर भारत के पीएम नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रेलियाई पीएम स्कॉट मॉरिसन की उपस्थिति में किया गया.

भारत और ऑस्ट्रेलिया ने शनिवार को ऐतिहासिक इकोनॉमिक को-ऑपरेशन और ट्रेड एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए. भारत ने करीब एक दशक बाद किसी विकसित देश के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट किया है. इससे अगले पांच साल में सामान और सर्विसेज के एक्सपोर्ट के डबल हो जाने की उम्मीद है. इस डील के बाद ऑस्ट्रेलिया अपने मार्केट में टेक्सटाइल, लेदर, ज्वेलरी और स्पोर्ट्स प्रोडक्ट्स जैसे 95 फीसदी भारतीय सामानों की ड्युटी फ्री एक्सेस उपलब्ध कराएगा. 


भारत ऑस्ट्रेलिया मुक्त व्यापार समझौते के प्रमुख बिंदु | Key Points of India Australia Free Trade Agreement in Hindi


  • प्रधान मंत्री ने भारत-ऑस्ट्रेलिया आर्थिक सहयोग और व्यापार समझौते "इंडऑस ईसीटीए" पर हस्ताक्षर किए.
  • वर्चुअल समारोह में हुआ करार
  • इतने कम समय में IndAus ECTA पर हस्ताक्षर करना दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास की गहराई को दर्शाता है.
  • इस समझौते के आधार पर हम आपूर्ति श्रृंखलाओं के लचीलेपन को बढ़ाने में सक्षम होंगे, और हिंद-प्रशांत क्षेत्र की स्थिरता में भी योगदान देंगे.
  • यह समझौता हमारे बीच छात्रों, पेशेवरों और पर्यटकों के आदान-प्रदान की सुविधा प्रदान करेगा, जो लोगों से लोगों के संबंधों को और मजबूत करेगा.
  • निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि होने से लाखो नए रोजगार उभरकर आएंगे, जिससे ना केवल सामाजिक स्थिति अच्छी होगी बल्कि आर्थिक भी.  


India Australia Free Trade Agreement explained in Hindi


भारत-ऑस्ट्रेलिया ईसीटीए की मुख्य विशेषताएं | Silent features of India-Australia ECTA in Hindi


भारत-ऑस्ट्रेलिया ईसीटीए एक दशक से अधिक समय के बाद एक विकसित देश के साथ भारत का पहला व्यापार समझौता है. इस समझौते में दो मित्र देशों के बीच द्विपक्षीय आर्थिक और वाणिज्यिक संबंधों के पूरे क्षेत्र में सहयोग शामिल है, और वस्तुओं में व्यापार, उत्पत्ति के नियम, सेवाओं में व्यापार, व्यापार के लिए तकनीकी बाधाओं (टीबीटी), स्वच्छता और फाइटोसैनिटरी (एसपीएस) जैसे क्षेत्रों को शामिल किया गया है. उपाय, विवाद निपटान, प्राकृतिक व्यक्तियों की आवाजाही, दूरसंचार, सीमा शुल्क प्रक्रियाएं, फार्मास्युटिकल उत्पाद और अन्य क्षेत्रों में सहयोग. समझौते के हिस्से के रूप में द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग के विभिन्न पहलुओं को शामिल करते हुए आठ विषय विशिष्ट पक्ष पत्रों का भी निष्कर्ष निकाला गया.


भारत ऑस्ट्रेलिया मुक्त व्यापार समझौते से लाभ | India Australia Free Trade Agreement benefits/ advantages in Hindi


  • ईसीटीए (ECTA) दोनों देशों के बीच व्यापार को प्रोत्साहित करने और सुधारने के लिए एक संस्थागत तंत्र प्रदान करता है. भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच ईसीटीए क्रमशः भारत और ऑस्ट्रेलिया द्वारा निपटाए गए लगभग सभी टैरिफ लाइनों को कवर करता है. 
  • भारत को अपनी 100% टैरिफ लाइनों पर ऑस्ट्रेलिया द्वारा प्रदान की जाने वाली तरजीही बाजार पहुंच से लाभ होगा. इसमें रत्न और आभूषण, कपड़ा, चमड़ा, जूते, फर्नीचर, भोजन और कृषि उत्पाद, इंजीनियरिंग उत्पाद, चिकित्सा उपकरण और ऑटोमोबाइल जैसे भारत में निर्यात हित के सभी श्रम प्रधान क्षेत्र शामिल हैं. 
  • दूसरी ओर, भारत ऑस्ट्रेलिया को अपनी 70% से अधिक टैरिफ लाइनों पर तरजीही पहुंच की पेशकश करेगा, जिसमें ऑस्ट्रेलिया को निर्यात ब्याज की लाइनें शामिल हैं जो मुख्य रूप से कच्चे माल और बिचौलिये जैसे कोयला, खनिज अयस्क और वाइन आदि हैं.
  • सेवाओं में व्यापार के संबंध में, ऑस्ट्रेलिया ने लगभग 135 उप क्षेत्रों और 120 उप क्षेत्रों में सर्वाधिक पसंदीदा राष्ट्र (एमएफएन) में व्यापक प्रतिबद्धताओं की पेशकश की है जो आईटी, आईटीईएस, व्यावसायिक सेवाओं, स्वास्थ्य, शिक्षा और ऑडियो विजुअल जैसे भारत के हित के प्रमुख क्षेत्रों को कवर करते हैं. 
  • भारतीय निर्यातकों को होगा फायदा. व्यापार को बढ़ावा मिलेगा, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान होगी. निर्यात से उल्लेखनीय वृद्धि नए नए रोजगार उभरकर आएंगे.
  • सेवा क्षेत्र में ऑस्ट्रेलिया के कुछ प्रमुख प्रस्तावों में रसोइये और योग शिक्षकों के लिए कोटा; पारस्परिक आधार पर भारतीय छात्रों के लिए 2-4 साल का पोस्ट स्टडी वर्क वीजा; व्यावसायिक सेवाओं और अन्य लाइसेंस प्राप्त/विनियमित व्यवसायों की पारस्परिक मान्यता; और युवा पेशेवरों के लिए कार्य और अवकाश वीजा व्यवस्था आदि शामिल हैं. 
  • दूसरी ओर, भारत ने 'व्यापार सेवाओं', 'संचार सेवाओं', 'निर्माण और संबंधित इंजीनियरिंग' जैसे 11 व्यापक सेवा क्षेत्रों के 31 उप-क्षेत्रों में लगभग 103 उप-क्षेत्रों और सर्वाधिक पसंदीदा राष्ट्रों में ऑस्ट्रेलिया के लिए बाजार पहुंच की पेशकश की है. 
  • दोनों पक्ष इस समझौते के तहत फार्मास्युटिकल उत्पादों पर एक अलग अनुबंध पर भी सहमत हुए हैं, जो पेटेंट, जेनेरिक और बायोसिमिलर दवाओं के लिए फास्ट ट्रैक अनुमोदन को सक्षम करेगा.


India Australia Free Trade Agreement explained in Hindi


भारतीय निर्यातकों को होगा फायदा | Indian exporters will benefit


इस डील के तहत ऑस्ट्रेलिया पहले दिन से भारत के 96.4 फीसदी (वैल्यू के लिहाज से) एक्सपोर्ट पर जीरो ड्युटी एक्सेस देगा. इसमें कई ऐसे प्रोडक्ट्स कवर होंगे, जिन पर फिलहाल 4-5 फीसदी की कस्टम ड्युटी लगती है. इस एग्रीमेंट से टेक्सटाइल और अपैरल, कुछ एग्रीकल्चरल और फिश प्रोडक्ट्स, लेदर, फुटवियर, फर्नीचर, स्पोर्ट्स गुड्स, ज्वेलरी, मशीनरी, इलेक्ट्रिकल गुड्स और रेलवे वैगन से जुड़ी इंडस्ट्रीज को मुख्य रूप से फायदा होगा. 


भारत-ऑस्ट्रेलिया के बिच इतना कारोबार | Current business between india and australia in Hindi


बढ़ते भारत-ऑस्ट्रेलिया आर्थिक और वाणिज्यिक संबंध दोनों देशों के बीच तेजी से विविधीकरण और गहन द्विपक्षीय संबंधों की स्थिरता और ताकत में योगदान करते हैं. ऑस्ट्रेलिया, भारत का 17वां सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर है. वहीं, भारत, ऑस्ट्रेलिया का नौवां सबसे बड़ा पार्टनर है. 2021 में दोनों देशों के बीच सामान और सर्विसेज का द्विपक्षीय कारोबार 27.5 बिलियन डॉलर का रहा. ऑस्ट्रेलिया को भारत का माल निर्यात 2019 और 2021 के बीच 135% बढ़ा है. ऑस्ट्रेलिया से भारत का माल आयात 2021 में 15.1 बिलियन अमेरिकी डॉलर था, जिसमें बड़े पैमाने पर कच्चे माल, खनिज और मध्यवर्ती सामान शामिल थे. इस ट्रेड डील से व्यापार को अगले पांच साल में 45-50 बिलियन डॉलर तक पहुंचाने का मकसद है.


भारत-ऑस्ट्रेलिया व्यापार समझौते पर पीएम मोदी ने कही ये बात | PM Modi on India Australia Free Trade Agreement in Hindi


प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह भारत-ऑस्ट्रेलिया के रिश्तों के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है. वहीं, मॉरिशन ने कहा कि इस करार से भारत-ऑस्ट्रेलिया के रिश्ते और गहरे होंगे. गोयल ने कहा कि इस एग्रीमेंट से दोनों देशों के बीच के 27 बिलियन डॉलर के व्यापार को अगले पांच साल में 45-50 बिलियन डॉलर तक पहुंचाने में मदद मिलेगी. 

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "यह भारत और ऑस्ट्रेलिया के आपसी संबंधों के लिए वास्तव में एक अहम पल है. इस समझौते के आधार पर हम आपूर्ति श्रृंखलाओं का जुझारूपन बढ़ाने के साथ ही हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता लाने में भी मिलकर योगदान दे सकेंगे." उन्होंने कहा कि इस समझौते से छात्रों, पेशेवरों और पर्यटकों का दोनों देशों के बीच आदान-प्रदान सुगमता से हो सकेगा.


भारत-ऑस्ट्रेलिया व्यापार समझौते पर ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री मॉरिसन | Australia PM on India Australia Free Trade Agreement in Hindi


ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री मॉरिसन ने कहा कि व्यापार और आर्थिक सहयोग बढ़ने के साथ-साथ यह समझौता कार्य, अध्ययन और यात्रा अवसरों का विस्तार करने के साथ दोनों देशों के लोगों के बीच 'गर्मजोशी भरे रिश्तों' को गहरा करेगा. उन्होंने कहा, "इस समझौते से ऑस्ट्रेलिया के किसानों, विनिर्माताओं, उत्पादकों और कई अन्य लोगों के लिए दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था के लिए दरवाजे खुल जाएंगे." 

मॉरिसन ने कहा कि यह समझौता भारत आने के इच्छुक घरेलू विनिर्माताओं और सेवा प्रदाताओं के लिए कारोबारी विविधता के अनगिनत अवसर पैदा करेंगे जिनका मूल्य प्रतिवर्ष 14.8 अरब डॉलर होगा. उन्होंने कहा कि भारत के करीब 1.4 अरब उपभोक्ताओं के बाजार का रास्ता खोलकर "हम अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रहे हैं और अपने देश में रोजगार बढ़ा रहे हैं." आगे उन्होंने कहा, "इस समझौते का आधार हमारी मजबूत सुरक्षा साझेदारी और क्वाड गठबंधन में हमारे संयुक्त प्रयास हैं."


कैसे है भारत और ऑस्ट्रेलिया के बिच सम्बन्ध ? | How is the relation between India and Australia in Hindi?


भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच उत्कृष्ट द्विपक्षीय संबंध हैं जिनका हाल के वर्षों में परिवर्तनकारी विकास हुआ है, जो एक सकारात्मक रास्ते के साथ एक मैत्रीपूर्ण साझेदारी में विकसित हुआ है. यह एक विशेष साझेदारी है जो बहुलवादी, संसदीय लोकतंत्रों, राष्ट्रमंडल परंपराओं के साझा मूल्यों, आर्थिक जुड़ाव का विस्तार, लंबे समय से लोगों से लोगों के बीच संबंधों और उच्च स्तरीय बातचीत में वृद्धि की विशेषता है.

भारत और ऑस्ट्रेलिया दोनों देशों के बीच पहले से ही रहे गहरे, घनिष्ठ और रणनीतिक संबंधों को इस ECTA से और मजबूत मिलेगा और वस्तुओं और सेवाओं में द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाएगा, रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा, जीवन स्तर बढ़ाएगा और लोगों के सामान्य कल्याण में सुधार करेगा. 

भारत और ऑस्ट्रेलिया जापान के साथ त्रिपक्षीय आपूर्ति श्रृंखला लचीलापन पहल (एससीआरआई) व्यवस्था में भागीदार हैं, जो भारत-प्रशांत क्षेत्र में आपूर्ति श्रृंखलाओं के लचीलेपन को बढ़ाने का प्रयास करता है. इसके अलावा, भारत और ऑस्ट्रेलिया हाल ही में गठित क्वाड के सदस्य हैं, जिसमें अमेरिका और जापान भी शामिल हैं, ताकि सहयोग को और बढ़ाया जा सके और आम चिंताओं के कई मुद्दों पर साझेदारी विकसित की जा सके. 


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