Criminal Procedure Identification Bill 2022: 5 पॉइंट में समझें, अपराधियों की पहचान से जुड़ा नया विधेयक (आपराधिक प्रक्रिया पहचान विधेयक 2022) | Know all about 'Criminal Procedure Bill 2022' in Hindi

Criminal Procedure Identification Bill 2022 in Hindi: क्या है आपराधिक प्रक्रिया पहचान विधेयक 2022? क्या है इस क़ानून से फायदा? | What is Criminal Procedure Bill 2022 in Hindi? History, debate, benefits 


Criminal Procedure Identification Bill 2022: क्रिमिनल प्रोसीजर (आइडेंटिफिकेशन) बिल 2022, गिरफ्तार किए गए किसी व्यक्ति के निजी बायोलॉजिकल डाटा इकट्ठा करने की छूट देता है. इसमें पुलिस को अंगुलियों, पैरों, हथेलियों के निशान, रेटिना स्कैन, भौतिक, जैविक नमूने और उनके विश्लेषण, हस्ताक्षर, लिखावट या अन्य तरह का डाटा एकत्र करने की छूट होगी. विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए गृह मंत्री ने कहा कि मानवाधिकारों की चिंता करने वाले विपक्षी सदस्यों (Opposition) को अपराधियों द्वारा टारगेट किए गए लोगों के मानवाधिकारों (Human Rights) पर भी चिंता जाहिर करनी चाहिए.

देश की किसी भी जांच एजेंसियों (Investigative Agencies) को गिरफ्तार व्यक्ति की पूरी कुंडली (Complete Horoscope) खंगालने का अधिकार मिल गया है. अब सीबीआई (CBI), ईडी (ED), एनआईए (NIA) सहित देश की सभी जांच एजेंसियों को लोकसभा में पारित दंड प्रक्रिया शिनाख्त बिल (Criminal Procedure Identification Bill) से काफी मदद मिलेगी.

आइये जानते है की आखिर क्या है आपराधिक प्रक्रिया (पहचान) विधेयक/ क्रिमिनल प्रोसीजर (आइडेंटिफिकेशन) बिल 2022? बिल में क्या प्रावधान किया गया हैं? लागू होने पर ये कानून किन लोगों पर लागू होगा? ये डेटा किस तरह से संग्रहित किया जाएगा? 75 साल तक बायोलॉजिकल डाटा रखने से क्या होगा? आखिर विपक्ष इसका किस आधार पर विरोध कर रहा है? आइये समझते हैं… [Read all about Criminal Procedure Identification Bill 2022 in Hindi, history, reason, importance]


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आपराधिक प्रक्रिया (पहचान) विधेयक/ क्रिमिनल प्रोसीजर (आइडेंटिफिकेशन) बिल 2022 | Criminal Procedure Identification Bill 2022 in Hindi

आपराधिक प्रक्रिया (पहचान) विधेयक के अनुसार अगर कोई व्यक्ति किसी मामले में दोषी पाया जाता है, उसे गिरफ्तार किया जाता है या फिर हिरासत में लिया जाता है तो उसे पुलिस को व्यवहार संबंधी रिकॉर्ड देना जरूरी होगा. बिल पुलिस और जेल अधिकारियों को कानूनी रूप से दोषी लोगों के रेटिना और आईरिस स्कैन सहित भौतिक व जैविक नमूनों को एकत्र करने, संग्रहीत करने और विश्लेषण करने की अनुमति देता है. बिल के अनुसार, माप का रिकॉर्ड संग्रह की तारीख से 75 साल की अवधि के लिए रखा जाएगा.

विवादास्पद विधेयक में दोषियों के सीआरपीसी की धारा 53 या धारा 53ए के तहत हस्ताक्षर, लिखावट, या किसी अन्य परीक्षा सहित व्यवहार संबंधी विशेषताओं के कानूनी संग्रह का प्रस्ताव है. मौजूदा कानून के मुताबिक जांच एजेंसियां सबूत इकट्ठा नहीं कर पाती थीं. इस कारण हत्या, दुष्कर्म, महिलाओं के खिलाफ हिंसा के मामले में अपने देश में सजा की दर बेहद कम है. लेकिन, इस कानून के आने के बाद अपराधियों को सही जगह पहुंचाया जाएगा.


आपराधिक प्रक्रिया (पहचान) विधेयक/ क्रिमिनल प्रोसीजर (आइडेंटिफिकेशन) बिल के प्रमुख बिंदु | Criminal Procedure (Identification) Bill 2022 key points in hindi

  • आपराधिक प्रक्रिया (पहचान) विधेयक, 2022 से जांच एजेंसियों को मिलेगा अपराधियों की पूरी कुंडली रखने का अधिकार.
  • क्रिमिनल प्रोसीजर (आइडेंटिफिकेशन) बिल 2022, गिरफ्तार किए गए किसी व्यक्ति के निजी बायोलॉजिकल डाटा इकट्ठा करने की छूट देता है. 
  • बिल में किसी सज़ायाफ्ता या आरोपी व्यक्ति की पहचान के लिए उसके जैविक सैम्पल और बायोलॉजिकल सैंपल जुटाने, रेटिना, फिंगर प्रिंट , फुट प्रिंट, ब्रेन मैपिंग, ब्लड सैंपल और अन्य तरह के सैम्पल लिए जाने और विश्लेषण करने का प्रावधान किया गया है.
  • रिकॉर्ड संग्रह की तारीख से 75 साल की अवधि के लिए रखा जाएगा.
  • विधेयक में हस्ताक्षर, लेखनी और सीआरपीसी की धारा 53 या 53ए के तहत किसी भी तरह की जांच समेत व्यवहार से जुड़ी विशेषताओं को कानूनी रूप से जुटाया जा सकता है.
  • विधेयक के अनुसार अगर दोषी मान लेने में किसी तरह का विरोध जताते हैं, तो उसे आईपीसी की धारा 186 के तहत अपराध माना जाएगा. साथ ही तीन महीने की सजा या 500 रुपये का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं.
  • जो लोग महिलाओं या बच्चों के खिलाफ अपराध में दोषी नहीं पाए गए हैं, वे बायोलॉजिकल सैंपल देने से इनकार कर सकते हैं. 7 साल से कम सजा वाले अपराध के चलते हिरासत में लिए गए लोगों को भी यह अधिकार हासिल होगा.
  • यह नया क्रिमिनल प्रोसीजर (आइडेंटिफिकेशन) बिल, 1920 के बंदी शनाख्त कानून की जगह लेगा.
  • गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि अपराध की जांच थर्ड डिग्री के आधार पर नहीं बल्कि तकनीक एवं सूचना के आधार पर हो, ऐसे में थर्ड डिग्री से निजात दिलाने के लिए यह विधेयक लाया गया है.
  • उपलब्ध डेटा किसी से शेयर नहीं किया जाएगा - शाह
  • शाह ने कहा कि ये प्रावधान केवल 'जघन्य अपराधों' के मामले में ही इस्तेमाल किए जाएंगे. उन्होंने कहा कि कानून का लक्ष्य 'देश की कानून और व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत बनाना है'.


क्यों आपराधिक प्रक्रिया (पहचान) विधेयक/ क्रिमिनल प्रोसीजर (आइडेंटिफिकेशन) बिल को लाया गया? | Why was the Criminal Procedure (Identification) Bill 2022 introduced?

गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि वह संसद में दण्ड प्रक्रिया (शिनाख्त) विधेयक 2022 लेकर आए हैं, जो 1920 के बंदी शिनाख्त कानून की जगह लेगा. उन्होंने आगे कहा कि इस बिल से दोष सिद्ध करने के सबूत जुटाए जा सकेंगे. इस विधेयक में काफी देरी हो गई है. वर्ष 1980 में विधि आयोग ने अपनी रिपोर्ट में बंदी शिनाख्त कानून 1920 पर पुनर्विचार के लिए प्रस्ताव भारत सरकार को भेजा था. दुनियाभर में आपराधिक कानून में दोष सिद्धि के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले ढेरों प्रावधानों का अध्ययन करने के बाद यह बिल लाया गया है.

मौजूदा कानून के मुताबिक जांच एजेंसियां सबूत इकट्ठा नहीं कर पाती थीं. इस कारण हत्या, दुष्कर्म, महिलाओं के खिलाफ हिंसा के मामले में अपने देश में सजा की दर बेहद कम है. लेकिन, इस कानून के आने के बाद अपराधियों को सही जगह पहुंचाया जाएगा. जांच एजेंसिया स्वतन्त्र तरीके से काम कर सकेगी. जांच एजेंसियों को अब बार बार अदालत का दरवाजा नहीं खटखटाना पड़ेगा. जांच एजेंसियों को सबूत जुटाने और डाटा संग्रह करने के लिए व्यापक अधिकार मिला है. एजेंसियां गिरफ्तार व्यक्ति से जुड़ी हर सूचना जुटाने का अधिकार मिला है. इसके साथ ही हेल्थ से संबंधित जानकारी जैसे रेटिना, पैर-हाथ के प्रिंट, ब्रेन मैपिंग तक का अधिकार मिल गया है. जिसके कारण आपराधिक गतिविधियों को जानने में आसानी होगी और अपराधी जल्द से जल्द पकड़ा जा सकेगा.

बिल के कानूनी जामा पहनने के बाद एक ही अपराधी द्वारा बार-बार अपराध किए जाने पर सुबूत न होने की समस्या खत्म होगी. पुलिस के पास सभी अपराधियों का हर तरह का डाटा मौजूद रहेगा. इससे जांच करने और सुबूत इकट्ठा करने में आसानी होगी. शाह के अनुसार, कानून का उद्देश्य "देश की कानून-व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करना" है. अमित शाह का कहना है 'नई पीढ़ी के अपराधों से पुराने तरीकों के जरिए नहीं निपटा जा सकता. 


आखिर बिल में कौन-कौन से प्रावधान हैं? | What are the provisions in this Criminal Procedure (Identification) Bill 2022 in Hindi?

नमूनों का संग्रह - Collection of samples

  • यह पुलिस और जेल अधिकारियों को रेटिना और आईरिस स्कैन सहित भौतिक एवं जैविक नमूनों को एकत्र करने, संग्रहण और विश्लेषण करने की अनुमति देगा.
  • नाप में व्यक्ति का फिंगर प्रिंट, फुट प्रिंट, आंखों की आयरिश का नमूना, उसकी तस्वीर, भौतिक, जैविक सैम्पल जैसे खून का नमूना और उनके विश्लेषण, उसके हस्ताक्षर आदि शामिल होगा.
  • इस अधिनियम के तहत माप लेने की अनुमति देने का विरोध या इनकार करने को भारतीय दंड संहिता की धारा 186 के तहत अपराध माना जाएगा.
  • यह इन प्रावधानों को किसी भी निवारक निरोध कानून के तहत पकड़े गए व्यक्तियों पर भी लागू करने का प्रयास करता है.
  • नया बिल 1920 के पहचान अधिनियम (Identification of prisoners Act) को ख़त्म कर नया क़ानून बनाने के लिए लाया गया है.

परीक्षण/माप को रिकॉर्ड करने की शक्ति - Power to record test

  • मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद ये नमूने लिए जा सकेंगे. किसी पुलिस स्टेशन का थानाध्यक्ष या हेड कॉन्स्टेबल और जेल के हेड वार्डर से ऊपर रैंक का पुलिस अफ़सर नमूना ले सकेगा. नमूने से हासिल हुए आंकड़ों या डेटा को सुरक्षित रखने की ज़िम्मेदारी राष्ट्रीय क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो की होगी.
  • राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) भौतिक और जैविक नमूनों, हस्ताक्षर एवं हस्तलेखन डेटा का भंडार होगा जिसे कम-से-कम 75 वर्षों तक संरक्षित किया जा सकता है. 
  • NCRB को किसी अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसी के साथ रिकॉर्ड साझा करने का भी अधिकार दिया गया है.
  • 75 सालों तक इन आंकड़ों को सुरक्षित रखा जा सकेगा जिसके बाद इसे खत्म कर दिया जाएगा. हालांकि सज़ा पूरी होने या कोर्ट से बरी होने की स्थिति में डेटा को पहले भी ख़त्म किया जा सकेगा. 


आपराधिक प्रक्रिया (पहचान) विधेयक 2022 का महत्त्व | Importance of Criminal Procedure Bill 2022 in Hindi?

आधुनिक तकनीकों का उपयोग करना - Using modern technologies

  • विधेयक शरीर के उपयुक्त परीक्षणों की जाँच और उन्हें रिकॉर्ड करने हेतु आधुनिक तकनीकों के उपयोग का प्रावधान करता है.
  • वर्तमान कानून- कैदियों की पहचान अधिनियम (Identification of Prisoners Act) को वर्ष 1920 में लागू किया गया था, अतः यह काफी पुराना है और यह दोषी व्यक्तियों की एक सीमित श्रेणी के केवल फिंगरप्रिंट (Fingerprint) और पदचिह्न (Footprint) लेने की अनुमति प्रदान करता है.

निवेश एजेंसियों हेतु सहायक - Assistant to investment agencies

  • विधेयक उन "व्यक्तियों के दायरे" का विस्तार करता है, जिनके शरीर का परीक्षण या जाँच की जा सकती है. इससे जांँच एजेंसियों को पर्याप्त कानूनी रूप से स्वीकार्य सबूत इकट्ठा करने और आरोपी व्यक्ति के अपराध को साबित करने में मदद मिलेगी.

अपराध की जांँच को और अधिक कुशल बनाना - Making crime investigation more efficient

  • यह विधेयक व्यक्तियों के उचित शारीरिक परीक्षण हेतु कानूनी मंज़ूरी प्रदान करता है, जिन्हें इस तरह के परीक्षण/माप की आवश्यकता होती है, और इससे अपराध की जांँच अधिक कुशल और तेज़ हो जाएगी और दोष-सिद्धि दर को बढ़ाने में भी मदद मिलेगी.


पुराने कानून की जगह लेगा यह नया कानून | This new law will replace the old law

विधेयक पेश करते हुए गृह राज्य मंत्री अजय कुमार मिश्रा ने बताया कि मौजूदा अधिनियम को बने 102 साल हो गए हैं. अंग्रेजों के समय बने इस कानून में सिर्फ फिंगर प्रिंट और फुटप्रिंट लेने की अनुमति दी गई है. उन्होंने बताया कि इससे जांच एजेंसियों को मदद मिलेगी और दोषसिद्धि भी बढ़ेगी. यह नया क्रिमिनल प्रोसीजर (आइडेंटिफिकेशन) बिल, 1920 के बंदी शनाख्त कानून की जगह लेगा. इस नए के पेश होने के बाद कैदियों की पहचान अधिनियम 1920 को खत्म कर दिया जाएगा.


नया कानून किन लोगों को पर लागू होगा? | To whom will the new law apply?

  • प्रस्तावित कानून तीन तरह के लोगों पर लागू होगा. पहला ऐसे लोग जिन्हें किसी भी अपराध में सजा मिली है. 
  • दूसरा ऐसे गिरफ्तार लोग जिन पर किसी भी कानून के तहत सजा के प्रावधान की धाराएं लगी हैं. 
  • इसके साथ ही ऐसे लोग जिन पर सीआरपीसी की धारा 117 के तहत शांति बनाए रखने के लिए कार्रवाई की गई है. उन पर भी ये कानून लागू होगा.


कोई सैंपल देने से मना कर सकता है क्या? | Can someone refuse to give a sample?

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन लोगों को महिलाओं या बच्चों के खिलाफ अपराधों के लिए दोषी या गिरफ्तार नहीं किया गया है, या वे लोग जो सात साल से कम समय के लिए दंडनीय अपराध के लिए हिरासत में हैं, वे अपने जैविक नमूने देने से इनकार कर सकते हैं.

बिल के मुताबिक महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध का मामलों को छोड़कर जिन मामलों में सात साल से कम की सजा है उनके आरोपी अपने बायलोजिकल सैंपल देने से मना कर सकते हैं. बिल में कहा गया है कि मजिस्ट्रेट के लिखित आदेश को छोड़कर आरोपी के बिना ट्रायल के रिहा होने या दोष मुक्त होने पर उसका डाटा भी नष्ट किया जा सकता है.

कानून के अनुसार, यदि दोषियों द्वारा माप लेने के लिए कोई विरोध किया जाता है, तो इसे आईपीसी की धारा 186 (लोक सेवक को बाधित करना) के तहत अपराध के रूप में माना जाएगा, जिसके लिए तीन महीने की जेल या 500 रुपए का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं.


ये जानकारी/ डाटा कैसे संग्रहित किया जाएगा? | How will this information/data be stored?

बिल के मुताबिक ये डाटा राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के पास रखा जाएगा। NCRB ये रिकॉर्ड राज्य या केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन या किसी दूसरी कानूनी एजेंसी से इकट्ठा करेगी. NCRB के पास इस डाटा को संग्रहित करने उसे संरक्षित करने और उसे नष्ट करने की शक्ति होगी. इस डाटा को 75 साल तक सुरक्षित रखा जा सकेगा. इसके बाद इसे खत्म कर दिया जाएगा. हालांकि, सजा पूरी होने या कोर्ट से बरी होने की स्थिति में डेटा को पहले भी खत्म किया जा सकेगा.


जानकारी/ डाटा 75 साल रखने से क्या होगा? | What will happen keeping the data for 75 years?

बिल पेश करते हुए गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र ने कहा कि मौजूदा कानून 102 साल पुराना है. बीते 102 साल में अपराध की प्रकृति में भारी बदलाव आया है, इसलिए कानून में बदलाव जरूरी है. 

इस बदलाव से अपराधियों के शारीरिक मापदंड का रिकॉर्ड रखने के लिए आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल की इजाजत मिलेगी. उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया ने अपराध और अपराधियों पर नकेल कसने के लिए कानून में अहम बदलाव किए हैं.

बिल के कानूनी जामा पहनने के बाद एक ही अपराधी द्वारा बार-बार अपराध किए जाने पर सुबूत न होने की समस्या खत्म होगी. पुलिस के पास सभी अपराधियों का हर तरह का डाटा मौजूद रहेगा. इससे जांच करने और सुबूत इकट्ठा करने में आसानी होगी.


डेटा शेयर नहीं किया जाएगा | Data will not be shared - Amit Shah

उन्होंने कहा कि वाहन चोरी होने सहित कई अपराधों को सुलझाने के लिए डेटाबेस का इस्तेमाल ढाई साल से किया जा रहा है. इसके लिए डेटा एक प्रोटेक्टेड हार्डवेयर में स्टोर किया जाएगा, और जो सैंपल्स (मिलान के लिए) भेजते हैं उन्हें रिजल्ट भेजा जाएगा. हालांकि डेटा शेयर नहीं किया जाएगा. शाह ने कहा कि ये बिल यह सुनिश्चित करने के लिए लाया गया है कि पुलिस और इन्वेस्टिगेटर अपराधियों से दो कदम आगे रहें. उन्होंने कहा कि इसको लेकर कोई आशंका नहीं होनी चाहिए.

शाह ने यह भी कहा कि जो लोग मानवाधिकार का हवाला दे रहे हैं, उन्हें बलात्कार के पीड़ितों के मानवाधिकार के बारे में भी सोचना चाहिए. उन्होंने कहा, 'उन्हें (विपक्ष) को केवल बलात्कारियों, लुटेरों की चिंता है... लेकिन केंद्र कानून का पालन करने वाले नागरिकों के मानवाधिकार की चिंता करता है'.

अमित शाह ने कहा कि इन प्रावधानों का इस्तेमाल केवल "जघन्य अपराधों" के मामलों में ही किया जाएगा. उन्होंने कहा कि बिल के नियमों में इसी स्पष्टीकरण का पालन किया जाएगा. उनके अनुसार, कानून का उद्देश्य "देश की कानून-व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करना" है. अमित शाह का कहना है 'नई पीढ़ी के अपराधों से पुराने तरीकों के जरिए नहीं निपटा जा सकता. हमें आपराधिक न्याय प्रणाली को अगले युग में ले जाने की कोशिश करनी चाहिए'.

उन्‍होंने कहा, 'यह 102 साल पुराना कानून है, इसमें वैज्ञानिक आयामों को जोड़ा गया है. यह बिल देश मे दोष सिद्धि के माध्यम के लिए लाया गया है जिसने अपराध किया है उसको सजा दिलाने के लिये लाया गया है. वर्ष 2014 में मोदीजी स्मार्ट पुलिस का कांसेप्ट लेकर आए थे.अब क्राइम और क्रिमिनल बदल गए हैं तो हम पुलिस को आधुनिक क्यों नहीं करें.


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