Matri Pitri Pujan Diwas 2022: क्या होता है मातृ-पितृ पूजन दिवस? कब, क्यों और कैसे मनाया जाता है ? | What is Matri Pitri Pujan Diwas In Hindi?

Matri Pitri Pujan Diwas 2022: मातृ-पितृ पूजन दिवस क्या होता है ? कब, क्यों और कैसे मनाया जाता है ? | What is Matri Pitri Pujan Diwas In Hindi?


14 फरवरी (14 February) सिर्फ प्रेमी-प्रेमिका से ही नहीं बल्कि माता-पिता से भी प्यार जताने का दिन होता है. 14 फरवरी को देशभर में मातृ-पितृ पूजन दिवस मनाया जा रहा है. स्कूलों-कॉलेजों में इसके लिए विशेष आयोजन किए जा रहे हैं. कई समितियां और दल इसके लिए युवाओं को जागरूक कर रहे हैं.


अपने संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए हिन्दू धर्म में मातृ-पितृ पूजन दिवस मनाने का प्रचलन है. माता पिता के बलिदानो और उनके कार्यो को सम्मान देने के लिए मातृ-पितृ पूजन दिवस मनाया जाता है. हिंदू धर्म ने इस मातृ-पितृ को पूजने के इस दिन को लेकर बड़ी ही रोमांचित कहानी है, जिसे आप पहले भी कई बार देख और सुन चुके होंगे. आइये जानते है इस दिन से जुड़े कहानी और इसके महत्व के बारे में...

What is Matri Pitru Pujan Diwas and why is it celebrated in Hindi?
Why Matri Pitru Pujan Diwas is celebrated in Hindi


मातृ पितृ पूजन दिवस क्या है क्यों मनाया जाता है? | What is Matri Pitru Pujan Diwas and why is it celebrated in Hindi?


हमारी भारतीय संस्कृति में माता-पिता को भगवान से बड़ा माना जाता है. हिन्दू संस्कृति में हम अपने माता पिता की पूजा करते है. माता-पिता ने हमारे पालन-पोषण में कितना कष्ट उठाया है. हमारे लिए कितना त्याग किया है. इनकी पूजा-अर्चना व सेवा करने से छोटे-से-छोटा व्यक्ति भी महान बन जाता है. मंदिर में तो पत्थर की मूर्ति में भगवान की भावना की जाती है जबकि जीते जागते माता-पिता एवं गुरुदेव में तो सचमुच भगवान बसे हैं. ऐसे देवस्वरूप माता-पिता का जहाँ आदर-पूजन होता हो वहाँ की धरती माता भी अपने आपको सौभाग्यशाली मानती है. 14 फरवरी के दिन देशभर में मातृ-पितृ पूजन दिवस भी मनाया जा रहा है. सनातन, संस्कृति और संस्कारों का यह एक बहुत बड़ा महत्व है.


माता-पिता की सेवा करनेवाला स्वयं चिरआदरणीय बन जाता है. इस सिद्धांत को जिन्होंने भी अपनाया वे खुद भी आदरणीय और पूजनीय बन गये, फिर चाहे वे भगवान गणेशजी हों, भगवान श्रीरामचंद्रजी हों, भीष्म पितामह हों अथवा एक साधारण सा बालक श्रवणकुमार हो.


माता-पिता को सम्मान देने के लिए मातृ पितृ पूजन दिवस मनाया जाता है. यह दिवस उनके सभी बलिदानों को धन्यवाद करने के लिए समर्पित होता है. बच्चों को यह पता नही होता है कि माँ-बाप कितना कष्ट सहकर एक बच्चे लालन-पालन करते है. यह उनको तब पता चलता है जब वह स्वयं माता/पिता बन जाते हैं. श्रवण कुमार जैसा पुत्र पाने पर माता-पिता को गर्व होता है जो उनके हर आज्ञा का पालन करता हो.


आज के दौर में तो बेटे अपने माता-पिता को वृद्धा आश्रम भेज देते है. क्या ऐसे पुत्र कभी भी अपने मातृ-पितृ ऋण से मुक्त हो पायेंगे. इन्हें भी इनके कर्मों का फल मिलेगा जब ये बूढ़े हो जायेंगे तो इनके पुत्र भी इनके साथ ऐसा ही व्यवहार करेगे. इंसान को अपने कर्मों के अनुसार ही फल का भोग इसी पृथ्वी पर करना पड़ता है.


मातृ-पितृ पूजन दिवस की कहानी | Matri Pitri Pujan Diwas story in Hindi


पौराणिक कथाओ के अनुसार एक बार भगवान शंकर और माता पार्वती के पुत्र श्री गणेश और कार्तिकेय के बीच होड़ लगी कि, कौन बड़ा है? इस बात का निर्णय लेने के लिए शिव-पार्वती जी ने दोनों से कहा कि जो संपूर्ण पृथ्वी की परिक्रमा करके सबसे पहले यहां पहुंचेगा, उसी को बड़ा माना जाएगा. 


ये बात सुन भगवान कार्तिकेय अपने वाहन मयूर(मोर) लेकर पृथ्वी की परिक्रमा करने निकल पड़े. लेकिन भगवान गणेश चुपके से एकांत में जाकर बैठ गए और सोचने लगे. कुछ देर बाद वो उठे और झट से माता पार्वती और पिता शिव के पास जाकर हाथ जोड़कर बैठ गए. भगवान गणेश ने दोनों की आज्ञा लेकर अपने माता-पिता को ऊंचे स्थान पर बिठाया, उनके चरणों की पूजा की और परिक्रमा करने लगे.


एक-एक कर भगवान श्री गणेश ने अपने माता-पिता की सात बार परिक्रमा की. ये सब देख माता -पार्वती ने पूछा, वत्स! ये परिक्रमाए क्यों की? इस पर श्री गणेश ने जवाब दिया और कहा, सर्वतीर्थमयी माता... सर्वदेवमयो पिता... यानी सारी पृथ्वी की परिक्रमा करने से जो पुण्य होता है, वही पुण्य माता की परिक्रमा करने से हो जाता है. पिता का पूजन करने से सब देवताओं का पूजन होता है क्योंकि पिता देवस्वरूप हैं, यह शास्त्रवचन है.


क्या होता है मातृ-पितृ पूजन दिवस के दिन ? | What happens on Matri Pitri Pujan Diwas in Hindi?


  • जिस प्रकार माता पिता हमारे लिए दिन रात मेहनत करते है. हमारे लिए अपना सर्वस्व त्याग करते है. हमारा यह कर्त्तव्य है की उन्हें हम सम्मान दे. सम्मान और आदर वैसे तो पुरे वर्ष जीवन करना चाहिए. लेकिन साल में कोई एक दिन ऐसा होना चाहिए जो सिर्फ उनको समर्पित हो, इसलिए मातृ-पितृ पूजन दिवस मनाया जाता है.
  • इस दिन बच्चे अपने माता पिता का सम्मान करते है, उनकी पूजा करते है, उन्हें उनके द्वारा त्याग के लिए धन्यवाद स्वरुप जो हो सके उपहार देते है.
  • बच्चे जितना हो सके उतना आज के दिन अपने माता पिता का कार्य कर उन्हें आराम देने की चेष्टा करते है और आगे जीवन में कोई संकट ना आये इसके लिए संकल्प लेते है.
  • इस अवसर पर स्कूलों में कार्यक्रम आयोजित कर इस दिन का महत्व बताया जाता है.
  • इस दौरान जगह जगह सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किये जाते है. जिसमे माता-पिता की सेवा कर अनूठी मिशाल पेश करने वाली संतान को सम्मानित आदि किया जाता है. सामूहिक रूप से वैदिक मंत्रोच्‍चार के साथ माता पिता का पूजन होता है. 


कैसे मनाया जाता है मातृ-पितृ पूजन दिवस? | How Matri-Pitri Pujan Diwas is celebrated in Hindi


  • अपने माता-पिता को किसी ऊंचे आसन पर बिठाएं.
  • माता-पिता के माथे पर कुमकुम का तिलक करें.
  • माता-पिता के सिर पर पुष्प और अक्षत रखें, फूलमाला पहनाएं और आरती करें.
  • अब माता-पिता की सात परिक्रमा करें.
  • आखिर में माता-पिता की सेवा करने का दृढ़ संकल्प करें.
  • माता - पिता तो वैसे ही बच्चों पर मेहरबान होते हैं, वैसे ही बच्चों का भला चाहते हैं और जब बच्चों से पूजित होंगे तो उनके अंतरात्मा का भी आशीर्वाद बच्चों को मिलेगा. बच्चों का भी भला, माँ-बाप का भी भला !


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मातृ पितृ पूजन दिवस शुभकामना सन्देश | Parents Worship Day Matri Pitri Pujan Diwas Wishes Quotes in Hindi 


चरण पूज लो मात पिता के, इनसे बड़ा ना देव कोई होगा|

प्यार और अनुशासन का संगम हैं ये, इनके आशीर्वाद से ही जीवन सफल होगा ||


माता पिता ही सच्चे गुरु है, जिनमे निहित है व्यहारिक ज्ञान|

जीने की कला सिखाते हैं वो, ना करना कभी इनका अपमान||


दुनिया की सारी दौलत से, माता - पिता हैं मूल्यवान |

उपकार बहोत ही हैँ इनके, सदा करो इनका सम्मान ||


जो हर मोड़ पे देते साथ सदा, जिन्होंने हमारे लिये अपने सपनें दफनाएं ||

नतमस्तक होकर मात - पिता के चरणों में, अपना जीवन सफल बनायें ||


अपनी खुशियों को दरकिनार कर, बच्चों की खुशी के लिए जो जियें सदा |

आप पर बना रहे उनका विश्वास, अच्छी संतान का अपना फ़र्ज़ करो अदा ||


वन्दन है उन मात-पिता को, जिन्होंने हमको जीवन दान दिया |

जीवन भर ऋणि रहेंगे उनके, हम पर है बड़ा एहसान किया ||


बंद किस्मत के लिये कोई ताली नही होती, सुखी उम्मीदों की कोई डाली नही होती | 

जो झुक जाए माँ -बाप के चरणों में । उसकी झोली कभी खाली नही होती ||


हर रिश्ते में मिलावट देखी, कच्चे रंगों की सजावट देखी |

लेकिन सालों साल देखा है ‪‎माँ‬ को, उसके चेहरे पे न थकावट देखी, न ममता में मिलावट देखी ||


माता पिता का साथ, उनका विस्वास, जीवन का सच शुख है |

उनके चरणो में शीश झुके हमेशा, यही हमारा परम-धर्म है ||


फूल कभी दो बार नहीं खिलते, जन्म कभ दो बार नही मिलते |

मिलने को तो हजारो लोग मिल जाते है, पर हजारो गलतियाँ माफ़ करने वाले माँ-बाप नहीं मिलते है ||


ना जरूरत उसे पूजा और पाठ की |

जिसने सेवा कर ली अपने माँ-बाप की ||


जो माँ-बाप की मजबूरी समझकर, अपने हालात को बदलते है ||

वही बच्चे आगे चलकर, दुनिया में बड़ा नाम करते है ||


मेरी दुनिया में इतनी जो शौहरत है |

वो मेरे माता-पिता की बदौलत है ||


जो माँ-बाप के हर अरमान पूरे कर दे, उनके हर सपनों को साकार कर दे |

ऐसे बेटे मातृ-पितृ ऋण से मुक्त होते है, जो उनके दामन को खुशियों से भर दे ||


घेर लेने मुझको जब भी बलाएँ आ गई |

ढाल बनकर सामने माँ-बाप की दुआएँ आ गई ||


जिसने माँ-बाप को ही अपना खुदा माना |

उसने हकीकत में इस दुनिया को जाना ||


इज्जत भी मिलेगी, दौलत भी मिलेगी |

माँ-बाप की सेवा करो जन्नत भी मिलेगी ||


सबसे पहले मात-पिता का कर वंदन, उसके बाद गुरुकृपा का अवलंबन |

जिसने यह उपहार दिए उस ईश्वर का बारम्बार अभिनंदन ||


सूर्य पिता जीवन उजियारा, मां चंदा ममता की धारा |

जैसे बरसे नूर खुदा का, हमे मिला यह दिव्य सहारा ||


जिसके होने से मैं खुद को मुक्कम्मल मानता हूं |

मैं उस खुदा के बाद अपने माँ-बाप को जानता हूं ||


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