[50+] Mahashivratri 2022 Puja Mantra Jaap in Hindi: महाशिवरात्रि पर भगवान शंकर को इन मंत्रों से करें प्रसन्न, हर समस्या हो जाएगी खत्म, दूर होगा ग्रहों का दोष | Mahashivratri Mantra happiness and prosperity in Hindi

Mahashivratri 2022 Puja Mantra in Hindi/ Sanskrit: महाशिवरात्रि पर करें इन मंत्रों का जाप, हर समस्या हो जाएगी खत्म, दूर होगा ग्रहों का दोष | Mahashivratri Mantra Chant, Sanskrit Slokas, Quotes and it's Benefits for happiness, prosperity and peace of mind in Hindi


महाशिवरात्रि पर भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व है. भगवान शिव सभी प्रकार की मनोकामनाओं को पूर्ण करते हैं और जीवन में आने वाली परेशानियों को दूर करते हैं. इस महाशिवरात्रि पर इन मंत्रों से पूजा कर अपने जीवन की खुशहाली और मनोकामनाओं को पूर्ति का आशीर्वाद ले सकते हैं. (Mantra on Mahashivratri 2022 in Hindi)


देवो के देव भगवान् शंकर सभी कष्टों के हर्ता है. महादेव का पूजा पाठ कभी व्यर्थ नहीं जाता. महाशिवरात्रि के दिन भगवान् शंकर का पूजा करना विशेष माना जाता है और बहुत लाभदायक होता है. महाशिवरात्रि पर सुख, शांति, धन, समृद्धि, सफलता, प्रगति, संतान, प्रमोशन, नौकरी, विवाह, प्रेम और बीमारी से मुक्ति जैसी कई कामनाएं आपकी हैं तो आपको कुछ मंत्र का जाप जरूर करना चाहिए. ये ऐसे मंत्र हैं जो वैसे तो कभी भी जपने से फलदायी साबित होते हैं, लेकिन महाशिवरात्रि के दिन इन मंत्रों का जाप करना तुरंत और विशेषफलदायी साबित होता है. (Read all Mahashivratri Mantras 2022 in Hindi and Sanskrit)


महाशिवरात्रि पर भगवान् शिव के इन मंत्रों का जाप कर, हर समस्या हो खत्म हो जाती है. सभी ग्रहों का दोष ख़त्म हो जाते हैं. यदि आप भी महाशिवरात्रि के दिन भगवान् शंकर की पूजा कर रहे है तो इन मन्त्रों को पूजा के दौरान अवश्य पढ़े. आइये जानते है भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए उन खास मंत्रों के बारे में जो एक नहीं कई मनोकामनाओं को पूर्ण करते हैं. (Mahashivratri Mantra Chant, Quotes, Wishes, Messages and it's Benefits for happiness, prosperity and peace of mind in Hindi and Sanskrit)


Mahashivratri Mantra Chant, Quotes, Wishes, Messages and it's Benefits for happiness, prosperity and peace of mind in Hindi
महाशिवरात्रि मंत्र
Mahashivratri Mantras in Hindi/ Sanskriti


महाशिवरात्रि के त्यौहार के बारे में जाने | All about Mahashivratri Festival in Hindi


भगवान शिव को देवों के देव महादेव कहा जाता है. वेद पुराणों और शास्त्रों के अनुसार जब संसार के समस्त देवी-देवता हार मान जाते हैं तो भगवान शंकर समस्या का हल सुझाते हैं. देवो के देव भगवान् शंकर सभी कष्टों के हर्ता है. महादेव का पूजा पाठ कभी व्यर्थ नहीं जाता. महाशिवरात्रि के दिन भगवान् शंकर का पूजा करना विशेष माना जाता है और बहुत लाभदायक होता है. महाशिवरात्रि पर भगवान् शिव के मंत्रों का जाप करते रहने से, हर समस्या हो खत्म हो जाती है. सभी ग्रहों का दोष ख़त्म हो जाते हैं. 


माना जाता है कि भगवान शिव की अराधना करना शुभ फलकारी होता है. शिव पुराण के अनुसार, भोलेनाथ को एक लोटा जल चढ़ाने मात्र से प्रसन्न किया जा सकता है. महाशिवरात्रि के दिन शिवभक्त भगवान शिव की पूरे विधि-विधान से पूजा करते हैं. कहा जाता है कि भगवान शिव की पूजा के दौरान मंत्रों के जाप का विशेष महत्व होता है. ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, मंत्रों के जाप से भक्त पर बाबा भोलेनाथ की असीम कृपा बरसती है, और मनोकामनाएं पूरी होती हैं. आप भी भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए पूजा के दौरान इन मंत्रों का करें जाप. ये मंत्र एक नहीं कई मनोकामनाओं को पूर्ण करने में लाभदायी होते हैं.


Mahashivratri Mantra Chant, Quotes, Wishes, Messages and it's Benefits for happiness, prosperity and peace of mind in Hindi


महाशिवरात्रि का त्यौहार क्यों मनाया जाता है? | Why Mahashivratri Festival is celebrated in Hindi?


महाशिवरात्रि का पर्व भगवान शिव को समर्पित है. इस दिन भगवान शिव के साथ साथ भगवान शिव के परिवार की भी पूजा की जाती है. ऐसा माना जाता है कि इसी दिन भगवान शिव और माता पार्वती का मिलन हुआ था. महाशिवरात्रि पर की जाने वाली पूजा कई प्रकार के कष्टों को दूर करती है. इस वर्ष 2022 में महाशिवरात्रि 1 मार्च 2022 को मनाई जा रही है. महाशिवरात्रि के दिन शिव पूजा का विशेष महत्त्व है. इस दिन भोलेनाथ की पूजा करने से ग्रहों के दोष को भी दूर करने में सहायक मानी गई है.


महाशिवरात्रि की पूजा विधि पूजा कैसे कैसे?  | How to worship on Mahashivratri Puja Vidhi in Hindi?


  • महाशिवरात्रि पर भगवान शिव को पंचामृत से स्नान कराएं. इसके बाद जलाभिषेक करें.
  • शिवलिंग या शिव प्रतिमा पर बेलपत्र, अक्षत, चंदन, धतूरा, कनेल का फूल, भांग,दक्षिणा आदि चढ़ाएं.
  • धूप, दीप और अगरबत्ती दिखाकर भगवान के समक्ष दीप जलाएं.
  • इसके बाद सफेद पेड़ा या खीर का भोग लगाएं.
  • पूजा में सभी चीजें चढ़ाते हुए ॐ नमो भगवते रूद्राय, ॐ नमः शिवाय रूद्राय् शम्भवाय् भवानीपतये नमो नमः मंत्र का जाप करें.
  • संध्या के समय भी शिवजी के समक्ष पूरी रात दीप जलाएं.
  • संभव हो तो शिवमंदिर में जाकर रात्रि जागरण करें अन्यथा घर में ही भजन कीर्तन करें.
  • व्रत में फलाहार करें, लेकिन सूर्य डूबने के बाद फलहार न करें.


Mahashivratri Mantra Chant, Quotes, Wishes, Messages and it's Benefits for happiness, prosperity and peace of mind in Hindi


महाशिवरात्रि मंत्र | Mahashivratri Mantras in Hindi/ Sanskriti


इस महाशिवरात्रि पर इन महामंत्रों का करें जाप, जो आपके जीवन में सुख, शांति, धन, समृद्धि, सफलता, प्रगति, संतान, प्रमोशन, नौकरी, विवाह, प्रेम और बीमारी जैसे कई परेशानियों से मुक्ति दिलाएगी और आपके कामनाएं पूरी करेंगी.


  • ॐ शिवाय नम:
  • ॐ हराय नम:
  • ॐ इन्द्रमुखाय नम: 
  • ॐ सर्वात्मने नम:
  • ॐ त्रिनेत्राय नम:
  • ॐ श्रीकंठाय नम:
  • ॐ वामदेवाय नम:
  • ॐ तत्पुरुषाय नम:
  • ॐ ईशानाय नम:
  • ॐ अनंतधर्माय नम:
  • ॐ ज्ञानभूताय नम:
  • ॐ प्रधानाय नम:
  • ॐ व्योमात्मने नम:
  • ॐ युक्तकेशात्मरूपाय नम:
  • ॐ अनंतवैराग्यसिंघाय नम:


भगवान शिव का मूल मंत्र | Mool Mantra of Lord Shiva in Hindi

ऊँ नम: शिवाय


भगवान् शंकर गायत्री मंत्र | Lord Shiva Gayatri Mantra in Hindi

ॐ भूर्भुवः स्वः
तत्सवितुर्वरेण्यम्
भर्गो देवस्य धीमहि
धियो यो नः प्रचोदयात् |


शिव गायत्री मंत्र | Shiv Gayatri mantra in Hindi

ॐ तत्पुरुषाय विद्महे, महादेवाय धीमहि, तन्नो रूद्र प्रचोदयात् |


महाशिवरात्रि रूद्र स्वरुप मंत्र | Mahashivratri Rudra Swaroop Mantra in Hindi

ॐ नमो भगवते रूद्राय, ॐ नमः शिवाय रूद्राय् शम्भवाय् भवानीपतये नमो नमः |


महाशिवरात्रि पर भगवान शंकर का महामृत्युंजय मंत्र | Mahamrityunjaya Mantra of Lord Shankar on Mahashivratri in Hindi

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् | 

उर्वारुकमिव बन्धनान मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ||


महामृत्युंजय गायत्री मंत्र | Mahamrityunjaya Gayatri Mantra in Hindi

ॐ हौं जूं स: ॐ भूर्भुव: स्व: ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवद्र्धनम् |

उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ॐ स्व: भुव: ॐ स: जूं हौं ॐ ||


महाशिवरात्रि पर भगवान् शिव के प्रिय मंत्र | Lord Shiva's favorite mantra on Mahashivratri in Hindi

 

  • ॐ नमः शिवाय |
  • नमो नीलकण्ठाय |
  • ॐ पार्वतीपतये नमः |
  • ॐ ह्रीं ह्रौं नमः शिवाय |
  • ॐ नमो भगवते दक्षिणामूर्त्तये मह्यं मेधा प्रयच्छ स्वाहा |


महाशिवरात्रि पर भगवान शिव के प्रभावशाली मंत्र | Influential Mantras of Lord Shiva on Mahashivratri in Hindi


ओम साधो जातये नम: |

ओम वाम देवाय नम: ||


ओम अघोराय नम: |

ओम तत्पुरूषाय नम: ||


ओम ईशानाय नम: |

ॐ ह्रीं ह्रौं नमः शिवाय ||



महाशिवरात्रि पर 4 प्रहर के 4 मंत्र | 4 mantras of 4 prahars on Mahashivratri 


  • महाशिवरात्रि के प्रथम प्रहर में संकल्प करके शिवलिंग को दूध से स्नान करवाकर 'ॐ हीं ईशानाय नम:' का जाप करना चाहिए.
  • द्वितीय प्रहर में शिवलिंग को दही से स्नान करवाकर 'ॐ हीं अधोराय नम:' का जाप करें.
  • तृतीय प्रहर में शिवलिंग को घृत से स्नान करवाकर 'ॐ हीं वामदेवाय नम:' का जाप करें.
  • चतुर्थ प्रहर में शिवलिंग को शहद से स्नान करवाकर 'ॐ हीं सद्योजाताय नम:' मंत्र का जाप करना करें.


महाशिवरात्रि के दिन मनोवांछित फल प्राप्त करने के लिए भगवान् शिव के इस मंत्र का जाप करना चाहिए | Get desired results on the day of Mahashivratri  by chanting this mantra of Lord Shiva


नागेंद्रहाराय त्रिलोचनाय भस्मांगरागाय महेश्वराय |

नित्याय शुद्धाय दिगंबराय तस्मै "न" काराय नमः शिवाय ||


मंदाकिनी सलिल चंदन चर्चिताय नंदीश्वर प्रथमनाथ महेश्वराय | 

मंदारपुष्प बहुपुष्प सपूजिताय तस्मै "म" काराय नमः शिवाय ||


शिवाय गौरी वदनाब्जवृंद सूर्याय दक्षाध्वरनाशकाय | 

श्री नीलकंठाय वृषध्वजाय तस्मै "शि" काराय नमः शिवाय ||


वशिष्ठ कुम्भोद्भव गौतमार्य मुनींद्र देवार्चित शेखराय | 

चंद्रार्क वैश्वानर लोचनाय तस्मै "व" काराय नमः शिवाय ||


यज्ञस्वरूपाय जटाधराय पिनाकहस्ताय सनातनाय | 

दिव्याय देवाय दिगंबराय तस्मै "य" काराय नमः शिवाय ||


पंचाक्षरमिदं पुण्यं यः पठेत् शिव सन्निधौ | 

शिवलोकमवाप्नोति शिवेन सह मोदते ||


|| इति श्रीमच्छंकराचार्यविरचितं श्रीशिवपञ्चाक्षरस्तोत्रं सम्पूर्णम् ||


महाशिवरात्रि के दिन स्वास्थ्य प्राप्ति के लिए भगवान शिवजी के इन मंत्रो का जाप करे | Lord Shiva Mantra for Good Health on the day of Mahashivratri in Hindi


सौराष्ट्रदेशे विशदेऽतिरम्ये ज्योतिर्मयं चन्द्रकलावतंसम् |

भक्तिप्रदानाय कृपावतीर्णं तं सोमनाथं शरणं प्रपद्ये ||

कावेरिकानर्मदयो: पवित्रे समागमे सज्जनतारणाय ||

सदैव मान्धातृपुरे वसन्तमोंकारमीशं शिवमेकमीडे ||


महाशिवरात्रि के दिन भोले नाथ के इस मंत्र से जप करने से ग्रहदोष या बुरे सपने जैसी कई परेशानियां दूर होती हैं | Lord Shiva Mantra to remove many problems like planetary defects or nightmares


द: स्वप्नदु: शकुन दुर्गतिदौर्मनस्य, दुर्भिक्षदुर्व्यसन दुस्सहदुर्यशांसि |

उत्पाततापविषभीतिमसद्रहार्ति, व्याधीश्चनाशयतुमे जगतातमीशः ||


Mahashivratri Mantra Chant, Quotes, Wishes, Messages and it's Benefits for happiness, prosperity and peace of mind in Hindi


भगवान् शिव जी की पूजा के लिए इन मंत्रो का जाप करना चाहिए | of Lord Shiva mantras to chant for the worship in Hindi/ Sanskrit


शिव जी की पूजा के दौरान इस मंत्र के द्वारा उन्हें स्नान समर्पण करना चाहिए,

ॐ वरुणस्योत्तम्भनमसि वरुणस्य सकम्भ सर्ज्जनीस्थो |

वरुणस्य ऋतसदन्यसि वरुणस्य ऋतसदनमसि वरुणस्य ऋतसदनमासीद् ||

भगवान शिव की पूजा करते समय इस मंत्र के द्वारा उन्हें यज्ञोपवीत समर्पण करना चाहिए-

ॐ ब्रह्म ज्ज्ञानप्रथमं पुरस्ताद्विसीमतः सुरुचो वेन आवः |

स बुध्न्या उपमा अस्य विष्ठाः सतश्च योनिमसतश्च विवः ||


शिव की पूजा में इस मंत्र के द्वारा अर्धनारीश्वर भगवान भोलेनाथ को धूप समर्पण करना चाहिए,

ॐ नमः कपर्दिने च व्युप्त केशाय च नमः सहस्त्राक्षाय च शतधन्वने च |

नमो गिरिशयाय च शिपिविष्टाय च नमो मेढुष्टमाय चेषुमते च ||


इस मंत्र के द्वारा चन्द्रशेखर भगवान भोलेनाथ को नैवेद्य अर्पण करना चाहिए,

ॐ नमो ज्येष्ठाय च कनिष्ठाय च नमः पूर्वजाय चापरजाय च |

नमो मध्यमाय चापगल्भाय च नमो जघन्याय च बुधन्याय च ||


शिवजी की पूजा में इस मंत्र के द्वारा भगवान भोलेनाथ को गंध समर्पण करना चाहिए,

ॐ नमः श्वभ्यः श्वपतिभ्यश्च वो नमो नमो भवाय च रुद्राय च नमः |

शर्वाय च पशुपतये च नमो नीलग्रीवाय च शितिकण्ठाय च ||


भगवान भोलेनाथ की पूजा के दौरान इस मंत्र के द्वारा त्रिलोचनाय भगवान शिव को पुष्प समर्पण करना चाहिए,

ॐ नमः पार्याय चावार्याय च नमः प्रतरणाय चोत्तरणाय च |

नमस्तीर्थ्याय च कूल्याय च नमः शष्प्याय च फेन्याय च ||


शिव पूजा के दौरान इस मंत्र के द्वारा भगवान शिव को ताम्बूल पूगीफल समर्पण करना चाहिए,

ॐ इमा रुद्राय तवसे कपर्दिने क्षयद्वीराय प्रभरामहे मतीः |

यशा शमशद् द्विपदे चतुष्पदे विश्वं पुष्टं ग्रामे अस्तिमन्ननातुराम् ||


इस मंत्र से भगवान शिवजी को बिल्वपत्र समर्पण करना चाहिए,

दर्शनं बिल्वपत्रस्य स्पर्शनं पापनाशनम् |

अघोरपापसंहारं बिल्वपत्रं शिवार्पणम् ||


भगवान शिव की पूजा करते समय इस मंत्र से भोलेनाथ को सुगन्धित तेल समर्पण करना चाहिए,

ॐ नमः कपर्दिने च व्युप्त केशाय च नमः सहस्त्राक्षाय च शतधन्वने च |

नमो गिरिशयाय च शिपिविष्टाय च नमो मेढुष्टमाय चेषुमते च ||


इस मंत्र के द्वारा भगवान भोलेनाथ को दीप दर्शन कराना चाहिए,

ॐ नमः आराधे चात्रिराय च नमः शीघ्रयाय च शीभ्याय च |

नमः ऊर्म्याय चावस्वन्याय च नमो नादेयाय च द्वीप्याय च ||


इस मंत्र के द्वारा भगवान भोलेनाथ को दीप दर्शन कराना चाहिए,

ॐ नमः आराधे चात्रिराय च नमः शीघ्रयाय च शीभ्याय च |

नमः ऊर्म्याय चावस्वन्याय च नमो नादेयाय च द्वीप्याय च ||


महाशिवरात्रि महादेव महाकाल भगवान् शंकर भोलेनाथ शिवजी संस्कृत श्लोक | Mahashivratri Mahadev Mahakal Lord Shankar Bholenath Shivji Sanskrit Shlok in Hindi Sanskrit


नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय भस्माङ्गरागाय महेश्वराय | 

नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय तस्मै नकाराय नम: शिवाय ||


मन्दाकिनीसलिलचन्दनचर्चिताय नन्दीश्वरप्रमथनाथमहेश्वराय | मन्दारपुष्पबहुपुष्पसुपूजिताय तस्मै मकाराय नम: शिवाय ||


शिवाय गौरीवदनाब्जवृन्द सूर्याय दक्षाध्वरनाशकाय | श्रीनीलकण्ठाय वृषध्वजाय तस्मै शिकाराय नम: शिवाय ||


वसिष्ठकुम्भोद्भवगौतमार्य मुनीन्द्रदेवार्चितशेखराय | चन्द्रार्कवैश्वानरलोचनाय तस्मै वकाराय नम: शिवायः ||


यक्षस्वरूपाय जटाधराय पिनाकहस्ताय सनातनाय | 

दिव्याय देवाय दिगम्बराय तस्मै यकाराय नम: शिवाय् ||


ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ||


सदुपायकथास्वपण्डितो हृदये दु:खशरेण खण्डित: | शशिखण्डमण्डनं शरणं यामि शरण्यमीरम् ||


महत: परित: प्रसर्पतस्तमसो दर्शनभेदिनो भिदे | 

दिननाथ इव स्वतेजसा हृदयव्योम्नि मनागुदेहि न: ||


[संस्कृत] शिव शंकर महाकाल पञ्चाक्षर स्तोत्रम् | Mahakaal Shiva Panchakshara Stotram in Hindi Sanskrit


नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय भस्माङ्गरागाय महेश्वराय |

नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय तस्मै नकाराय नम:शिवाय ||1||


मंदाकिनीसलिलचन्दनचर्चिताय नन्दीश्वरप्रमथनाथ महेश्वराय |

मण्दारपुष्पबहुपुष्पसुपूजिताय तस्मै मकाराय नम:शिवाय ||2||


शिवाय गौरीवदनाब्जवृन्दसूर्याय दक्षाध्वरनाशकाय |

श्रीनीलकण्ठाय बृषध्वजाय तस्मै शिकाराय नम:शिवाय ||3||


वसिष्ठकुम्भोद्भवगौतमार्यमुनीन्द्रदेवार्चितशेखराय |

चन्द्रार्कवैश्वानरलोचनाय तस्मै वकाराय नम:शिवाय ||4||


यक्षस्वरूपाय जटाधराय पिनाकहस्ताय सनातनाय|

दिव्याय देवाय दिगम्बराय तस्मै यकाराय नम:शिवाय ||5||


पञ्चाक्षरिमदं पुण्यं य: पठेच्छिवसन्निधौ |

शिवलोकमवाप्नोति शिवेन सह मोदते ||6||


महाशिवरात्रि के दिन कैसे करे मंत्रो का जाप | How to chant mantras on the day of Mahashivratri in Hindi


  • मानसिक जाप अधिक श्रेष्ठ होता है.
  • जाप, होम, दान, स्वाध्याय व पितृ कार्य के लिए स्वर्ण व कुशा की अंगूठी हाथ में धारण करें.
  • दूसरे के आसन पर बैठकर जाप न करें.
  • बिना आसन के जाप न करें.
  • जाप काल में आलस्य, जंभाई, निद्रा, थूकना, छींकना, भय, वार्तालाप करना, क्रोध करना आदि सब मना है.
  • लोभयुक्त आसन पर बैठते ही सारा अनुष्ठान नष्ट हो जाता है.
  • जाप के बाद आसन के नीचे जल छिड़ककर जल को मस्तक पर लगाएं, वरना जप फल को इंद्र स्वयं ले लेते हैं.
  • स्नान कर माथे पर तिलक लगाकर जाप करें.
  • पितृऋण, देवऋण की मुक्ति के लिए 5 यज्ञों को किया जाता है.
  • पूर्व व उत्तर दिशा में ही देखकर जाप करें.


भगवान शंकर भोलेनाथ महाकाल के 108 नाम | All 108 Names of Lord Shiva Mahakaal in Hindi Sanskrit

 

भगवान शंकर भोलेनाथ बड़े ही भोले और दयालु हैं. शिवलिंग पर सिर्फ एक लोटा जल चढ़ाने से ही ये खुश हो जाते हैं और भक्त की मनोकामना पूर्ण करते हैं. शास्त्रों के अनुसार शिव जी जितने सौम्य और कोमल हैं वे उतने ही उग्र और क्रूर हैं. शिवजी का भोलेनाथ स्वरुप लोगों की श्रद्धा भक्ति से प्रसन्न होकर मनोवांछित फल प्रदान करता है. तो वहीं शिव का काल भैरव रूप दुष्ट और पापियों का संहार करता है. (Know All 108 Names of Lord Shiva in Hindi Sanskrit)


शास्त्रों और पुराणों में भगवान शिव के अनेक नाम है. जिसमें से 108 नामों का विशेष महत्व है. भक्त इन्हें शंकर, भोलेनाथ, महादेव, महाकाल आदि नामों से पुकारते हैं. यहां अर्थ सहित नामों को प्रस्तुत किया जा रहा है. महाकाल के 108 नाम ऐसे हैं जिनको लेने मात्र से भक्तों के कष्ट दूर हो जाते हैं. जो इस प्रकार है, 


  • शिव:- कल्याण स्वरूप
  • महेश्वर:- माया के अधीश्वर
  • शम्भू:- आनंद स्वरूप वाले
  • पिनाकी:- पिनाक धनुष धारण करने वाले
  • शशिशेखर:- चंद्रमा धारण करने वाले
  • वामदेव:- अत्यंत सुंदर स्वरूप वाले
  • विरूपाक्ष:- विचित्र अथवा तीन आंख वाले
  • कपर्दी:- जटा धारण करने वाले
  • नीललोहित:- नीले और लाल रंग वाले
  • शंकर:- सबका कल्याण करने वाले
  • शूलपाणी:- हाथ में त्रिशूल धारण करने वाले
  • खटवांगी:- खटिया का एक पाया रखने वाले
  • विष्णुवल्लभ:- भगवान विष्णु के अति प्रिय
  • शिपिविष्ट:- सितुहा में प्रवेश करने वाले
  • अंबिकानाथ:- देवी भगवती के पति
  • श्रीकण्ठ:- सुंदर कण्ठ वाले
  • भक्तवत्सल:- भक्तों को अत्यंत स्नेह करने वाले
  • भव:- संसार के रूप में प्रकट होने वाले
  • शर्व:- कष्टों को नष्ट करने वाले
  • त्रिलोकेश:- तीनों लोकों के स्वामी
  • शितिकण्ठ:- सफेद कण्ठ वाले
  • शिवाप्रिय:- पार्वती के प्रिय
  • उग्र:- अत्यंत उग्र रूप वाले
  • कपाली:- कपाल धारण करने वाले
  • कामारी:- कामदेव के शत्रु, अंधकार को हरने वाले
  • सुरसूदन:- अंधक दैत्य को मारने वाले
  • गंगाधर:- गंगा को जटाओं में धारण करने वाले
  • ललाटाक्ष:- माथे पर आंख धारण किए हुए
  • महाकाल:- कालों के भी काल
  • कृपानिधि:- करुणा की खान
  • भीम:- भयंकर या रुद्र रूप वाले
  • परशुहस्त:- हाथ में फरसा धारण करने वाले
  • मृगपाणी:- हाथ में हिरण धारण करने वाले
  • जटाधर:- जटा रखने वाले
  • कैलाशवासी:- कैलाश पर निवास करने वाले
  • कवची:- कवच धारण करने वाले
  • कठोर:- अत्यंत मजबूत देह वाले
  • त्रिपुरांतक:- त्रिपुरासुर का विनाश करने वाले
  • वृषांक:- बैल-चिह्न की ध्वजा वाले
  • वृषभारूढ़:- बैल पर सवार होने वाले
  • भस्मोद्धूलितविग्रह:- भस्म लगाने वाले
  • सामप्रिय:- सामगान से प्रेम करने वाले
  • स्वरमयी:- सातों स्वरों में निवास करने वाले
  • त्रयीमूर्ति:- वेद रूपी विग्रह करने वाले
  • अनीश्वर:- जो स्वयं ही सबके स्वामी है
  • सर्वज्ञ:- सब कुछ जानने वाले
  • परमात्मा:- सब आत्माओं में सर्वोच्च
  • सोमसूर्याग्निलोचन:- चंद्र, सूर्य और अग्निरूपी आंख वाले
  • हवि:- आहुति रूपी द्रव्य वाले
  • यज्ञमय:- यज्ञ स्वरूप वाले
  • सोम:- उमा के सहित रूप वाले
  • पंचवक्त्र:- पांच मुख वाले
  • सदाशिव:- नित्य कल्याण रूप वाले
  • विश्वेश्वर:- विश्व के ईश्वर
  • वीरभद्र:- वीर तथा शांत स्वरूप वाले
  • गणनाथ:- गणों के स्वामी
  • प्रजापति:- प्रजा का पालन- पोषण करने वाले
  • हिरण्यरेता:- स्वर्ण तेज वाले
  • दुर्धुर्ष:- किसी से न हारने वाले
  • गिरीश:- पर्वतों के स्वामी
  • गिरिश्वर:- कैलाश पर्वत पर रहने वाले
  • अनघ:- पापरहित या पुण्य आत्मा
  • भुजंगभूषण:- सांपों व नागों के आभूषण धारण करने वाले
  • भर्ग:- पापों का नाश करने वाले
  • गिरिधन्वा:- मेरू पर्वत को धनुष बनाने वाले
  • गिरिप्रिय:- पर्वत को प्रेम करने वाले
  • कृत्तिवासा:- गजचर्म पहनने वाले
  • पुराराति:- पुरों का नाश करने वाले
  • भगवान्:- सर्वसमर्थ ऐश्वर्य संपन्न
  • प्रमथाधिप:- प्रथम गणों के अधिपति
  • मृत्युंजय:- मृत्यु को जीतने वाले
  • सूक्ष्मतनु:- सूक्ष्म शरीर वाले
  • जगद्व्यापी:- जगत में व्याप्त होकर रहने वाले
  • जगद्गुरू:- जगत के गुरु
  • व्योमकेश:- आकाश रूपी बाल वाले
  • महासेनजनक:- कार्तिकेय के पिता
  • चारुविक्रम:- सुन्दर पराक्रम वाले
  • रूद्र:- उग्र रूप वाले
  • भूतपति:- भूतप्रेत व पंचभूतों के स्वामी
  • स्थाणु:- स्पंदन रहित कूटस्थ रूप वाले
  • अहिर्बुध्न्य:- कुण्डलिनी- धारण करने वाले
  • दिगम्बर:- नग्न, आकाश रूपी वस्त्र वाले
  • अष्टमूर्ति:- आठ रूप वाले
  • अनेकात्मा:- अनेक आत्मा वाले
  • सात्त्विक:- सत्व गुण वाले
  • शुद्धविग्रह:- दिव्यमूर्ति वाले
  • शाश्वत:- नित्य रहने वाले
  • खण्डपरशु:- टूटा हुआ फरसा धारण करने वाले
  • अज:- जन्म रहित
  • पाशविमोचन:- बंधन से छुड़ाने वाले
  • मृड:- सुखस्वरूप वाले
  • पशुपति:- पशुओं के स्वामी
  • देव:- स्वयं प्रकाश रूप
  • महादेव:- देवों के देव
  • अव्यय:- खर्च होने पर भी न घटने वाले
  • हरि:- विष्णु समरूपी
  • पूषदन्तभित्:- पूषा के दांत उखाड़ने वाले
  • अव्यग्र:- व्यथित न होने वाले
  • दक्षाध्वरहर:- दक्ष के यज्ञ का नाश करने वाले
  • हर:- पापों को हरने वाले
  • भगनेत्रभिद्:- भग देवता की आंख फोड़ने वाले
  • अव्यक्त:- इंद्रियों के सामने प्रकट न होने वाले
  • सहस्राक्ष:- अनंत आँख वाले
  • सहस्रपाद:- अनंत पैर वाले
  • अपवर्गप्रद:- मोक्ष देने वाले
  • अनंत:- देशकाल वस्तु रूपी परिच्छेद से रहित
  • तारक:- तारने वाले
  • परमेश्वर:- प्रथम ईश्वर


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