Sant Ravidas Jayanti 2022 Hindi: कौन थे संत रविदास? क्यों मनायी जाती है उनकी जयंती | Why Sant Ravidas Jayanti is celebrated in Hindi? Know history Importance doha quotes messages in Hindi

What is Sant Ravidas Jayanti 2022 in Hindi: जानिये कौन थे संत रविदास ? उनका इतिहास और जीवन परिचय, क्यों मनायी जाती है संत रविदास जयंती | Know all about Sant Ravidas in Hindi, History, Significance, Doha, Quotes, Messages in Hindi


हिंदू पंचांग के अनुसार हर साल माघ मास की पूर्णिमा को संत रविदास जयंती मनाई जाती है. इस वर्ष रविदास जयंती 2022 में 16 फरवरी, बुधवार को मनाई जा रही है. (Sant Ravidas Birth in Hindi) संत रविदास का जन्म 1377 सीई वारणसी, उत्तर प्रदेश में माघ पूरनमासी को हुआ. 


गुरु रविदास एक प्रसिद्ध संत थे, भक्ति आंदोलन के साथ साथ आध्यात्मिकता और जातिवाद के खिलाफ लोगों को जागरूक करते थे. (Sant Ravidas Various Names in Hindi) भक्त उन्हें रैदास, रोहिदास और रूहिदास के नाम से भी बुलाते थे. संत रविदास की माता का नाम कलसा देवी और पिता का नाम संतोख दास था. संत रविदास ने अंपने जीवनकाल में लोगों के बीच भेदभाव को दूर करने का अथक प्रयास किया और हमेशा सद्भाव और शांति से रहने की शिक्षा दी.


आइये इस लेख के माध्यम से हम संत रविदास के बारे में उनके जीवन के बारे में सम्पूर्ण जानकारी प्राप्त करेंगे. (Sant Ravidas Story, History, Biography in Hindi) संत रविदास की कहानी, इतिहास और उनसे जुड़े महत्वपूर्ण घटनाओ तथ्यों को भी जानेंगे. (Sant Ravidas Messages, Doha, Quotes in Hindi) संत रविदास के विचार, दोहे, रचनाये इत्यादि के बारे में. यह यह भी देखेंगे की आखिर संत रविदास जयंती क्यों मनाई जाती है?

संत रविदास जयंती क्यों मनाया जाता है? | Why Sant Ravidas Jayanti is celebrated in Hindi?


संत रविदास जयंती 2022 | Sant Ravidas Jayanti 2022 in Hindi 


हर साल माघ मास की पूर्णिमा तिथि को संत रविदास जयंती मनाई जाती है. (Sant Ravidas Jayanti 2022) इस वर्ष रविदास जयंती 2022 में 16 फरवरी, बुधवार को मनाई जा रही है. वर्ष 2020 में रविदास जयंती 09 फरवरी को मनाई गई थी और 2021 में 27 फरवरी को. रविदास जयंती को रैदास जयंती नाम से भी जाना जाता है. यह जयंती खासकर गुरु संत रविदास के जन्मोत्सव को मनाने के लिए लिए मनाई जाती है. रविदास जयंती हर वर्ष हिंदी महीनों के अनुसार माघ शुक्ल, माघी पूर्णिमा को आती है.


गुरु रविदास एक प्रसिद्ध संत थे, भक्ति आंदोलन के साथ साथ आध्यात्मिकता और जातिवाद के खिलाफ लोगों को जागरूक करते थे. भक्त उन्हें रैदास, रोहिदास और रूहिदास के नाम से भी बुलाते थे. संत रविदास ने अंपने जीवनकाल में लोगों के बीच भेदभाव को दूर करने का अथक प्रयास किया और हमेशा सद्भाव और शांति से रहने की शिक्षा दी.


गुरु रविदास (Sant Ravidas Jayanti 2022) 15वीं और 16वीं शताब्दी के भक्ति आंदोलन के एक रहस्यवादी कवि संत थे और उन्होंने रविदासिया धर्म की स्थापना की थी. रविदास जयंती उनके जन्म के उपलक्ष्य में मनाई जाती है. ऐसी मान्यता है कि गुरु रविदास ने कई भजन लिखे थे, उनमें से कुछ का जिक्र सिख धर्म की पवित्र पुस्तक, गुरु ग्रंथ साहिब में मिलता है. संत रविदास ने अपने विचार और रचनाओं से समाज की बुराइयां दूर करने में अहम भूमिका निभाई थी.


संत रविदास जयंती क्यों मनाया जाता है? | Why Sant Ravidas Jayanti is celebrated in Hindi?


(Reason behind Sant Ravidas Jayanti in Hindi) रविदास जयंती मनाने का मुख्य उद्देश्य संत रविदास जी की शिक्षाओं को याद करना है. रविदास जी को याद करने के लिए रविदास जयंती मनाई जाती है. क्योंकि रविदास जी एक महान कवि और आध्यात्मिक गुरु थे जिन्होंने समाज में व्याप्त बुराइयों को लेखन और आंदोलन करके के दूर किया था. रविदास जी ने ऐसा कहा है कि मनुष्य की आत्मा ईश्वर का रूप है. रविदास जी ने मनुष्यों को भेदभाव न करने और भाईचारे की नीती अपनाने की शिक्षा दी है. इसलिए हर साल उनके कार्य को याद करने और उन्हें सम्मान देने के लिए रविदास जयंती मनाई जाती है.


संत रविदास का जीवन परिचय हिंदी में | Sant Ravidas biography in Hindi


रविदास जी कौन थे जिनके कारण संत रविदास जयंती मनाई जाती है? | Who was Ravidas ji due to which Sant Ravidas Jayanti is celebrated?


(Sant Ravidas Biography in Hindi) गुरु रविदास भारत के महान कवि, दार्शनिक और समाज सुधाकर थे. संत रविदास का जन्म वाराणसी, उत्तरप्रदेश में हुआ था. संत शिरोमणि कवि रविदास का जन्म माघ पूर्णिमा को 1376 ईस्वी को उत्तर प्रदेश के वाराणसी शहर के गोबर्धनपुर गांव में हुआ था. उनकी माता का नाम कर्मा देवी (कलसा) तथा पिता का नाम संतोख दास (रग्घु) था. उनके दादा का नाम श्री कालूराम जी, दादी का नाम श्रीमती लखपती जी, पत्नी का नाम श्रीमती लोनाजी और पुत्र का नाम श्रीविजय दास जी है. 


गुरु रविदास जी बचपन से ही एक बहुत बहादुर और भगवान के सच्चे भक्त थे. उन्होंने अपनी शिक्षा पंडित शारदा नन्द गुरु से प्राप्त की थी. गुरु रविदास जब बड़े हुए तो उनका भक्ति के प्रति स्नेह बढ गया था. संत रविवास जी बहुत ही धार्मिक स्वभाव के व्यक्ति थे. इन्होंने आजीविका के लिए अपने पैतृक कार्य को अपनाते हुए हमेशा भगवान की भक्ति में हमेशा ही लीन रहा करते थे. रविदासजी चर्मकार कुल से होने के कारण वे जूते बनाते थे. ऐसा करने में उन्हें बहुत खुशी मिलती थी और वे पूरी लगन तथा परिश्रम से अपना कार्य करते थे. वे लोगों को हमेशा धर्म पर चलने की शिक्षा देते थे. वह भगवान श्रीराम के परम भक्त थे. रविदास जी हमेशा गोविन्दा, रघुनाथ, राजाराम जैसे शब्दों का उच्चारण कर भक्ति के प्रति आश्रित थे. 


संत रविदास के अन्य नाम | Different name of Sant Ravidas in Hindi?


(Sant Ravidas Various Names in Hindi) भक्त संत रविदास को कई विभिन्न नामो से जानते थे जैसे की रैदास, रोहिदास और रूहिदास के नाम से भी बुलाते थे. रविदाजी को पंजाब में रविदास कहा जाता है. उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश और राजस्थान में उन्हें रैदास के नाम से ही जाना जाता है. गुजरात और महाराष्ट्र के लोग 'रोहिदास' और बंगाल के लोग उन्हें ‘रुइदास’ कहते हैं. कई पुरानी पांडुलिपियों में उन्हें रायादास, रेदास, रेमदास और रौदास के नाम से भी जाना गया है. कहते हैं कि माघ मास की पूर्णिमा को जब रविदास जी ने जन्म लिया वह रविवार का दिन था जिसके कारण इनका नाम रविदास रखा गया. 


रविदास की संत रविदास बनाने की कहानी? | Story of Ravidas making Sant Ravidas in Hindi?


(Sant Ravidas Story in Hindi) संत रविदास के बारे में प्रचलित कथा के अनुसार कहा जाता है कि एक बार वह अपने मित्र के साथ खेल रहे थे. अगले दिन संत रविदास जी उसी स्थान पर आए, लेकिन उनके मित्र वहां नहीं थे. जब रविदास ने उनकी तलाश शुरू की तो उन्हें इस बात का अंदाजा भी नहीं था कि उनके दोस्त मर चुके हैं. जब उन्हें यह समाचार मिला तो उन्हें बहुत पीड़ा हुई और वह उस स्थान पर गए जहां उनके मित्रों की लाश पड़ी थी. वह उनके पास गए और धीरे से कहा कि यह खेलने और सोने का समय नहीं है, यह सुनते ही उसका दोस्त उठ खड़ा हुआ। तब से रविदास को संत मना लिया गया. ऐसा माना जाता है कि ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि संत रविदास को बचपन से ही अलौकिक शक्तियां प्राप्त थीं, और लोग उसी दिन से उनकी शक्तियों पर विश्वास करने लगे.


संत रविदास पर दबाव | Know the pressure given to Sant Ravidas in Hindi


उनका जन्म ऐसे समय में हुआ था जब उत्तर भारत के कुछ क्षेत्रों में मुगलों का शासन था चारों ओर अत्याचार, गरीबी, भ्रष्टाचार व अशिक्षा का बोलबाला था. उस समय मुस्लिम शासकों द्वारा प्रयास किया जाता था कि अधिकांश हिन्दुओं को मुस्लिम बनाया जाए. संत रविदास की ख्याति लगातार बढ़ रही थी जिसके चलते उनके लाखों भक्त थे जिनमें हर जाति के लोग शामिल थे. यह सब देखकर एक परिद्ध मुस्लिम 'सदना पीर' उनको मुसलमान बनाने आया था. उसका सोचना था कि यदि रविदास मुसलमान बन जाते हैं तो उनके लाखों भक्त भी मुस्लिम हो जाएंगे. ऐसा सोचकर उनपर हर प्रकार से दबाव बनाया गया था लेकिन संत रविदास तो संत थे उन्हें किसी हिन्दू या मुस्लिम से नहीं मानवता से मतलब था.


संत रविदास का सामाजिक और धार्मिक झुकाव | Social and Religious Inclination of Sant Ravidas in Hindi


समय बीतने के साथ, उन्होंने अपना अधिकांश समय भगवान राम और भगवान कृष्ण की पूजा में बिताना शुरू कर दिया और धार्मिक कर्मों का पालन करके एक संत बन गए. उन्होंने हमेशा धर्म, जाति और पंथ के आधार पर दूसरों के बीच भेदभाव न करने की शिक्षा दी. लोग आज भी उनकी शिक्षाओं का पालन करते हैं और उनसे सबक लेते हैं.


रविदास जी एक बहुत बड़े धार्मिक गुरु थे. उन्होंने अपने रचनाएँ, कविताएँ, दोहे आदि के माध्यम से लोगों को संदेश दिया है. उन्होंने अपने देश के लोगों को समाज में सामाजिक सुधार करने का भी संदेश दिया. संत रविदास ने अपने दोहों व पदों के माध्यम से समाज में जातिगत भेदभाव को दूर कर सामाजिक एकता पर बल दिया और मानवतावादी मूल्यों की नींव रखी. रविदास जी ने देश में व्याप्त लोगों का अंधविश्वास दूर किया, सामाजिक सुधार कार्य किए, भक्ति से प्रति विश्वास जताया, लोगों को सही दिशा का संदेश दिया. रविदास जी के ऐसे महान कार्यों भला हम कैसे भूल सकते हैं, इसलिए हर साल उनके कार्यों पर आस्था रखने के लिए रविदास जयंती मनाई जाती है. संत रविदास ने अपनी कविताओं के लिए जनसाधारण की ब्रजभाषा का प्रयोग किया है. साथ ही इसमें अवधी, राजस्थानी, खड़ी बोली और रेख्ता यानी उर्दू-फारसी के शब्दों का भी मिश्रण है. रविदासजी के लगभग चालीस पद सिख धर्म के पवित्र धर्मग्रंथ 'गुरुग्रंथ साहब' में भी सम्मिलित किए गए है.


(Sant Ravidas Devotees in Hindi) कहते हैं कि स्वामी रामानंदाचार्य वैष्णव भक्तिधारा के महान संत हैं. संत रविदास उनके शिष्य थे. संत रविदास तो संत कबीर के समकालीन व गुरूभाई माने जाते हैं. स्वयं कबीरदास जी ने 'संतन में रविदास' कहकर इन्हें मान्यता दी है. राजस्थान की कृष्णभक्त कवयित्री मीराबाई उनकी शिष्या थीं. यह भी कहा जाता है कि चित्तौड़ के राणा सांगा की पत्नी झाली रानी उनकी शिष्या बनीं थीं. कहा जाता है कि संत रविदास जी मीरा बाई के धार्मिक गुरु हुआ करते थे. गुरु रविदास से प्रभावित होकर मीराबाई ने उन्हें अपना गुरु मान लिया था. राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले में मीरा के मंदिर के सामने एक छोटी छतरी बनी है, जिसमें संत रविदास के पद चिन्ह दिखाई देते है. आज के दिन लोग संत रविदास को आदर्श मानकर लोग उनकी पूजा करते हैं.


संत रविदास जयंती पर क्या करे ?| What to do on Sant Ravidas Jayanti in Hindi?


(Work to follow on Sant Ravidas Jayanti in Hindi) हिंदू मान्यताओं के अनुसार, संत रविदास के अनुयायी उनकी जयंती पर पवित्र नदियों में स्नान करते हैं और उनके जीवन की शिक्षाओं से प्रेरणा लेते हैं. संत रविदास जी के जीवन में कई घटनाएं घटी हैं, जो एक आदर्श और शांतिपूर्ण जीवन जीने का तरीका सिखाती है. उनके अनुयायी इस दिन को एक वार्षिक उत्सव के रूप में मनाते हैं और उनके जन्म स्थान पर लाखों भक्त इकट्ठा होते हैं. इस दिन कई भव्य उत्सव आयोजित किए जाते हैं और संत रविदास की झांकी निकाली जाती है और उनके दोहे पढ़े जाते हैं. साथ ही रविदास की झांकी में भजन कीर्तन किए जाते हैं और उनके छंदों से लोग प्रेरणा लेते हैं. वाराणसी में संत रविदास का भव्य मंदिर और मठ है. जहां सभी जाति के लोग दर्शन करने के लिए आते हैं. वाराणसी में श्री गुरु रविदास पार्क है जो नगवा में उनके यादगार के रुप में बनाया गया है जो उनके नाम पर 'गुरु रविदास स्मारक और पार्क' बना है.


संत शिरोमणि रविदास से जुड़ी अनकही बाते | Top important unknown facts about Sant Ravidas in Hindi


  • संत रविवास जी बहुत ही धार्मिक स्वभाव के व्यक्ति थे. इन्होंने आजीविका के लिए अपने पैतृक कार्य को अपनाते हुए हमेशा भगवान की भक्ति में हमेशा ही लीन रहा करते थे.
  • संत रविदास कबीरदास के समकालीन और गुरुभाई कहे जाते हैं. स्वयं कबीरदास ने उन्हें 'संतन में रविदास' कहकर संबोधित किया है. वे बेहद परोपकारी थे और किसी को ऊंचा या नीचा नहीं मानते थे. उन्होंने तमाम पदों की रचनाएं कीं, जिन्हें पवित्र ग्रंथ गुरुग्रंथ साहिब में भी शामिल किया गया है.
  • कहा जाता है कि संत रविदास का जन्म चर्मकार कुल में हुआ था, इसलिए वे जूते बनाने का काम करते थे. वे किसी भी काम को छोटा या बड़ा नहीं समझते थे. इसलिए हर काम को पूरे मन और लगन से करते थे. उनका मानना था कि किसी भी काम को पूरे शुद्ध मन और निष्ठा के साथ ही करना चाहिए, ऐसे में उसका परिणाम भी हमेशा अच्छा ही होगा.
  • रविदास जी जाति की बजाय मानवता में यकीन रखते थे और सभी को एक समान मानते थे. उनका मानना था कि परमात्मा ने ​इंसान की रचना की है, सभी इंसान समान हैं और उनके अधिकार भी समान हैं. न कोई ऊंचा होता है और न ही कोई नीचा होता है.
  • मान्यता है कि कृष्ण भक्त मीराबाई भी संत रविदास की शिष्या थीं. इतना ही नहीं, चित्तौड़ साम्राज्य के राजा राणा सांगा और उनकी पत्नी भी संत रविदास के विचारों से प्रभावित होकर उनके शिष्य बन गए थे.
  • संत ​रविदास के शिष्यों में हर जाति के लोग शामिल थे. आज भी वाराणसी में उनका भव्य मंदिर और मठ बना है. जहां देशभर से लोग उनके दर्शन करने के लिए आते हैं.
  • संत रविदास ने अपना जीवन प्रभु की भक्ति और सत्संग में बिताया था. उन्हें रविदास, गुरु रविदास, रैदास, रूहिदास और रोहिदास जैसे नामों से जाना जाता है. संत रविदास ने चालीस पदों की रचना की थी जिसे सिखों के पवित्र ग्रंथ गुरुग्रंथ साहिब में भी शामिल किया गया था.
  • संत रविदास की जयंती के दिन मंदिर और मठों में कीर्तन-भजन का विशेष आयोजन किया जाता है. कई जगहों पर झांकियां निकाली जाती हैं. साथ ही कई स्थानों पर सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं.


संत रविदास के महत्वपूर्ण उपदेश-अनमोल वचन (Updesh-Anmol Vachan) हिंदी में | Top Important teachings of Sant Ravidas - priceless words in Hindi


  • व्यक्ति पद या जन्म से बड़ा या छोटा नहीं होता है, वह गुणों या कर्मों से बड़ा या छोटा होता है.
  • वे समाज में वर्ण व्यवस्था के विरोधी थे. उन्होंने कहा है कि सभी प्रभु की संतान हैं, किसी की कोई जात नहीं है.
  • रविदास जी ने बताया है कि सच्चे मन में ही प्रभु का वास होता है. जिनके मन में छल कपट होता है, उनके अंदर प्रभु का वास नहीं होता है. संत रैदास ने कहा है कि मन चंगा तो कठौती में गंगा
  • संत रविदास जी ने दुराचार, अधिक धन का संचय, अनैतिकता और मांसाहार को गलत माना है. उन्होंने अंधविश्वास, भेदभाव, मानसिक संकीर्णता को समाज विरोधी माना है.
  • संत रविदास जी भी कर्म को प्रधानता देते थे. उनका कहना था कि व्यक्ति को कर्म में विश्वास करना चाहिए. आप कर्म करेंगे, तभी आपको फल की प्राप्ति होगी. फल की चिंता से कर्म न करें.
  • संत रैदास ने कहा है कि व्यक्ति को अभिमान नहीं करना चाहिए. दूसरों को तुच्छ न समझें. उनकी क्षमता जिस कार्य को करने की है, संभवत: वह आप नहीं कर सकते.
  • वे कहते हैं कि हम सभी यह सोचते हैं कि संसार ही सबकुछ है, लेकिन यह सत्य नहीं है. परमात्मा ही सत्य है.
  • व्यक्ति पद या जन्म से बड़ा या छोटा नहीं होता है, वह गुणों या कर्मों से बड़ा या छोटा होता है.
  • वे समाज में वर्ण व्यवस्था के विरोधी थे. उन्होंने कहा है कि सभी प्रभु की संतान हैं, किसी की कोई जात नहीं है.
  • रविदास जी ने बताया है कि सच्चे मन में ही प्रभु का वास होता है. जिनके मन में छल कपट होता है, उनके अंदर प्रभु का वास नहीं होता है. संत रैदास ने कहा है कि मन चंगा तो कठौती में गंगा
  • किसी की पूजा इसलिए नहीं करनी चाहियें क्योंकि वो किसी पूजनीय पद पर बैठा हैं. यदि उस व्यक्ति में योग्य गुण नहीं हैं तो उसकी पूजा नहीं करनी चाहियें। इसके विपरीत यदि कोई व्यक्ति ऊँचे पद पर नहीं बैठा है परन्तु उसमे योग्य गुण हैं तो ऐसे व्यक्ति को पूजना चाहियें.
  • हमें हमेशा कर्म करते रहना चाहियें और साथ साथ मिलने वाले फल की भी आशा नहीं छोड़नी चाहयें, क्योंकि कर्म हमारा धर्म है और फल हमारा सौभाग्य.
  • जिस प्रकार तेज़ हवा के कारण सागर मे बड़ी-बड़ी लहरें उठती हैं, और फिर सागर में ही समा जाती हैं, उनका अलग अस्तित्व नहीं होता. इसी प्रकार परमात्मा के बिना मानव का भी कोई अस्तित्व नहीं है.
  • कभी भी अपने अंदर अभिमान को जन्म न दें. इस छोटी से चींटी शक्कर के दानों को बीन सकती है परन्तु एक विशालकाय हाँथी ऐसा नहीं कर सकता.
  • मोह-माया में फसा जीव भटक्ता रहता है. इस माया को बनाने वाला ही मुक्ती दाता है.
  • भ्रम के कारण साँप और रस्सी तथा सोने के गहने और सोने में अन्तर नहीं जाना जाता, किन्तु भ्रम दूर होते ही इनका अन्तर ज्ञात हो जाता है, उसी प्रकार अज्ञानता के हटते ही मानव आत्मा, परमात्मा का मार्ग जान जाती है, तब परमात्मा और मनुष्य मे कोई भेदभाव वाली बात नहीं रहती.
  • जीव को यह भ्रम है कि यह संसार ही सत्य है किंतु जैसा वह समझ रहा है वैसा नही है, वास्तव में संसार असत्य है.
  • जिस प्रकार तेज़ हवा के कारण सागर मे बड़ी-बड़ी लहरें उठती हैं, और फिर सागर में ही समा जाती हैं, उनका अलग अस्तित्व नहीं होता. इसी प्रकार परमात्मा के बिना मानव का भी कोई अस्तित्व नहीं है.
  • जिसके हर्दय मे रात दिन राम समाये रहते है, ऐसा भक्त राम के समान है, उस पर न तो क्रोध का असर होता है और न ही काम भावना उस पर हावी हो सकती है.
  • निर्मल मन में ही भगवान वास करते हैं. अगर आपके मन में किसी के प्रति बैर भाव नहीं है, कोई लालच या द्वेष नहीं है तो आपका मन ही भगवान का मंदिर, दीपक और धूप है. ऐसे पवित्र विचारों वाले मन में प्रभु सदैव निवास करते हैं.


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रविदास के दोहे-कहावतें (Doha-Kahavat)  हिंदी में | Top Best Suryadas's couplets and sayings in Hindi


(Sant Ravidas Dohas, Messages, Quotes in Hindi) रविदास एक महान संत होने के साथ दर्शनशास्त्री, कवि, समाज-सुधारक और ईश्वर के अनुयायी थे. कहा जाता है कि संत रविदास का व्यक्तित्व इतना सहज और प्रभावशाली था कि कबीरदास (Kabir Das) ने भी उन्हें 'संतन में रविदास' कहकर संबोधित किया है. उन्हें कबीरदास का गुरुभाई भी कहा जाता है. मान्यता है कि मीराबाई, चित्तौड़ के सम्राट राणा सांगा और उनकी पत्नी जैसे तमाम लोग उनके अनुयायी थे. 


संत रविदास ने अनेक दोहे और पदों की रचना की जो आज भी काफी प्रचलित हैं. संत रविदास को गुरु रविदास, रैदास, रूहिदास, रोहिदास, सतगुरु और जगतगुरु आदि नामों से पुकारा जाता है. मन जो काम करने के लिए अंत:करण से तैयार हो, वही काम करना उचित है. अगर मन सही है तो इसे कठौते के जल में ही गंगा स्नान का पुण्य प्राप्त हो सकता है. माना जाता है कि इस प्रकार के उनके व्यवहार के बाद से ही यह कहावत प्रचलित हो गई कि 'मन चंगा तो कठौती में गंगा'.


ब्राह्मण मत पूजिए जो होवे गुणहीन,

पूजिए चरण चंडाल के जो होने गुण प्रवीन ||

अर्थ - इस दोहे के माध्यम से संत रविदास जी कहते हैं की किसी की सिर्फ इसलिए पूजा नहीं करनी चाहिए क्योंकि वह किसी पूजनीय पद पर है. यदि कोई व्यक्ति ऊँचें पद पर तो है पर उसमे उस पद के योग्य गुण नहीं है तो उसकी पूजा नहीं करनी चाहिए. इसके अतरिक्त कोई ऐसा व्यक्ति जो किसी ऊंचे पद पर तो नहीं है परन्तु उसमें पूज्जनीय गुण हैं तो उसका पूजन अवश्य करना चाहिए.


मन ही पूजा मन ही धूप, 

मन ही सेऊं सहज स्वरूप ||

अर्थ - इस दोहे के माध्यम से स्वामी रविदास जी कहना चाहते हैं की जिसका मन निर्मल होता है भगवान उसी में वास करते हैं. जिस व्यक्ति के मन में कोई बैर भाव नहीं है, किसी प्रकार का लालच नहीं है, किसी से कोई द्वेष नहीं है तो उसका मन भगवान का मंदिर, दीपक और धूप के सामान होता है. ऐसे पवित्र विचारों वाले मन में प्रभु सदैव निवास करते हैं.


रविदास जन्म के कारनै, होत न कोउ नीच |

नकर कूं नीच करि डारी है, ओछे करम की कीच ||

अर्थ -इस दोहे में रविदासजी के कहने का तात्पर्य है की किसी जाति में जन्म के कारण व्यक्ति नीचा या छोटा नहीं होता है. किसी व्यक्ति को भिन्न उसके कर्म बनाते हैं. इसलिए हमें सदैव अपने कर्मों पर ध्यान देना चाहिए. हमारे कर्म सदैव ऊंचें होने चाहिए.


मन चंगा तो कठौती में गंगा |

अर्थ - यदि आपका मन पवित्र है तो साक्षात् ईश्वर आपके हृदय में निवास करते है.


रैदास कहै जाकै हदै, रहे रैन दिन राम |

सो भगता भगवंत सम, क्रोध न व्यापै काम ||

अर्थ - रैदास जी कहते है कि जिसके हर्दय मे रात दिन राम समाये रहते है, ऐसा भक्त राम के समान है, उस पर न तो क्रोध का असर होता है और न ही काम भावना उस पर हावी हो सकती है.


करम बंधन में बन्ध रहियो, फल की ना तज्जियो आस |

कर्म मानुष का धर्म है, संत भाखै रविदास ||


गुरु जी मैं तेरी पतंग, हवा में उड़ जाऊंगी |

अपने हाथों से न छोड़ना डोर, वरना मैं कट जाऊंगी ||


कह रैदास तेरी भगति दूरि है, भाग बड़े सो पावै |

तजि अभिमान मेटि आपा पर, पिपिलक हवै चुनि खावै ||


वर्णाश्रम अभिमान तजि, पद रज बंदहिजासु की |

सन्देह-ग्रन्थि खण्डन-निपन, बानि विमुल रैदास की ||


मन ही पूजा मन ही धूप, मन ही सेऊँ सहज सरूप |


तोडूं न पाती पूजौं न देवा, सहज समाधि करौं हरि सेवा |


ऐसा चाहूं राज मैं, मिले सबन को अन्न |

छोट-बड़ो सब सम बसे, रविदास रहे प्रसन्न ||


हरि-सा हीरा छांड कै, करै आन की आस |

ते नर जमपुर जाहिंगे, सत भाषै रविदास ||

अर्थ - हरी के समान बहुमूल्य हीरे को छोड़ कर अन्य की आशा करने वाले अवश्य ही नरक जायेगें. यानि प्रभु भक्ति को छोड़ कर इधर-उधर भटकना व्यर्थ है.


जा देखे घिन उपजै, नरक कुंड मेँ बास |

प्रेम भगति सों ऊधरे, प्रगटत जन रैदास ||

अर्थ – जिस रविदास को देखने से घर्णा होती थी, जिसका नरक कुंद मे वास था, ऐसे रविदास जी का प्रेम भक्ति ने कल्याण कर दिया है ओंर वह एक मनुष्य के रूप मै प्रकट हो गए है.


जाति-जाति में जाति हैं, जो केतन के पात |

रैदास मनुष ना जुड़ सके जब तक जाति न जात ||

अर्थ - जिस तरह केले के पेड़ के तने को छिला जाये तो पत्ते के नीचे पत्ता फिर पत्ते के नीचे पत्ता और अंत में पूरा पेड़ खत्म हो जाता है लेकिन कुछ नही मिलता. उसी प्रकार इंसान को भी जातियों में बाँट दिया गया है. इन जातियों के विभाजन से इन्सान तो अलग अलग बंट जाता है और अंत में खत्म भी हो जाते है, लेकिन यह जाति खत्म नही होती है. इसलिए रविदास जी कहते है जब तक ये जाति खत्म नही होगी, तब तक इन्सान एक दुसरे से जुड़ नही सकता है यानि एक नही हो सकता है.


संत रविदास की रचनाएं (Rachna) हिंदी में | Top Compositions of Sant Ravidas in Hindi


अब कैसे छूटै राम नाम रट लागी |

 

प्रभु जी, तुम चंदन हम पानी, 

जाकी अंग-अंग बास समानी |

 

प्रभु जी, तुम घन बन हम मोरा, 

जैसे चितवत चंद चकोरा |

 

प्रभु जी, तुम दीपक हम बाती, 

जाकी जोति बरै दिन राती |

 

प्रभु जी, तुम मोती हम धागा, 

जैसे सोनहिं मिलत सुहागा |

 

प्रभु जी, तुम तुम स्वामी हम दासा, 

ऐसी भक्ति करै रैदासा |


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राम मैं पूजा कहा चढ़ाऊं |

फल अरु फूल अनूप न पाऊं ||टेक|| 

 

थन तर दूध जो बछरू जुठारी |

पुहुप भंवर जल मीन बिगारी ||1||

 

मलयागिर बेधियो भुअंगा |

विष अमृत दोउ एक संगा ||2||

 

मन ही पूजा मन ही धूप |

मन ही सेऊं सहज सरूप ||3||

 

पूजा अरचा न जानूं तेरी |

कह रैदास कवन गति मोरी ||4||


महान संत रविदास से जुड़े सवाल और उनके जवाब | Frequently asked Questions and answers about Sant Ravidas in Hindi


रविदास जी किसकी भक्ति करते थे? | Whom did Ravidas ji worship in Hindi?

संत रविदास जी भगवान राम के विभिन्न स्वरुप राम, रघुनाथ, राजा राम चन्द्र, कृष्णा, गोविन्द आदि के नामों का इस्तेमाल अपनी भावनाओं को उजागर करने के लिये करते थे और उनकी ही प्रेमा भक्ति और पूजा करते थे.


रविदास के जन्म के समय भारत में किसका शासन था? | Who ruled India at the time of the birth of Ravidas in Hindi?

संत रविदास जन्म ऐसे समय में हुआ था जब उत्तर भारत के कुछ क्षेत्रों में मुगलों का शासन था चारों ओर अत्याचार, गरीबी, भ्रष्टाचार व अशिक्षा का बोलबाला था.


संत रविदास जयंती कब पड़ती है? | When does Sant Ravidas Jayanti fall in Hindi?

संत रविदास जयंती हिन्दू कैलेंडर के अनुसार माघ महीने की पूर्णिमा पर मनाई जाती है. वर्ष 2022 में संत रविदास जयंती बुधवार, 16 फरवरी 2022 को है.


संत रविदास का जन्म कब और कहा हुआ था? | When and where was Sant Ravidas born in Hindi?

संत रविदास का जन्म 1377 सीई वारणसी, उत्तर प्रदेश में माघ पूरनमासी को हुआ.

 

गुरु रविदास के पिता का नाम क्या था? | What was the name of Guru Ravidas's father in Hindi?

बाबा संतो़ख दास


संत रविदास की माता का क्या नाम था? | What was the name of the mother of Sant Ravidas in Hindi?

करमा बाई


संत रविदास की पत्नी का क्या नाम था? | What was the name of the wife of Sant Ravidas in Hindi?

लोना


गुरु रविदास जी का जन्म कहां हुआ था ? | Where was Guru Ravidas ji born in Hindi?

वाराणसी


संत रविदास का परिवार | Family of Sant Ravida in Hindi?

कहा जाता है कि संत रविदास जी के पिता रघ्घू या राघवदास और माता का नाम करमा बाई था. उनकी पत्नी लोना एवं एक पुत्र विजयदास हुए. उनकी एक पुत्री रविदासिनी थी.


मीरा के गुरु कौन थे? | Who was Meera's guru in Hindi?

कहा जाता है कि संत रविदास ही मीरा के गुरु थे.


साल 2022 ने संत रविदास जयंती कब है? | When is Sant Ravidas Jayanti in the year 2022 in Hindi?

वर्ष 2022 में संत रविदास जयंती बुधवार फरवरी को है.


संत रविदास जयंती 2021 में कब थी? | When was Sant Ravidas Jayanti in 2021 in Hindi?

27 फरवरी को


वर्ष 2020 में रविदास जयंती कब मनाई गई थी? | When was Ravidas Jayanti celebrated in the year 2020 in Hindi?

09 फरवरी


संत रैदास की मृत्यु कब हुई थी? | When did Sant Raidas die in Hindi?

1540


संत रविदास जयंती क्यों मनाया जाता है? | Why is Sant Ravidas Jayanti celebrated in Hindi?

संत रविदास जी को याद करने के लिए.


संत रविदास के अन्य नाम क्या है? | What is another name for Sant Ravidas in Hindi?

संत रविदास को गुरु रविदास, रैदास, रूहिदास, रोहिदास, सतगुरु और जगतगुरु आदि नामों से पुकारा जाता है.


संत रविदास की भाषा क्या है? | What is the language of Sant Ravidas in Hindi?

रविदास ने अपनी काव्य-रचनाओं में सरल, व्यावहारिक ब्रजभाषा का प्रयोग किया करते थे, जिसमें अवधी, राजस्थानी, खड़ी बोली और उर्दू-फ़ारसी के शब्दों का भी मिश्रण है.


रविदास और रैदास में क्या अंतर है? | What is the difference between Ravidas and Raidas in Hindi?

अलग अलग स्थानों पे उन्हें अलग अलग नामो से जाना जाता है. 'आदि ग्रंथ' या गुरु ग्रंथ साहिब में जहां कहीं भी उनके पद संकलित हैं, वहां उनका नाम 'रविदास' ही लिखा गया है. उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान में उन्हें रैदास के नाम से ही जाना जाता है. गुजरात और महाराष्ट्र के लोग उन्हें 'रोहिदास' के नाम से पुकारते हैं, और बंगाल के लोग उन्हें 'रुइदास' कहते हैं.


संत रविदास के काव्य के प्रमुख विषय क्या है? | What is the main theme of the poetry of Sant Ravidas in Hindi?

रैदास की वाणी भक्ति की सच्ची भावना, समाज के व्यापक हित की कामना तथा मानव प्रेम से ओत-प्रोत होती थी. इसलिए उसका श्रोताओं के मन पर गहरा प्रभाव पड़ता था. उनके भजनों तथा उपदेशों से लोगों को ऐसी शिक्षा मिलती थी जिससे उनकी शंकाओं का सन्तोषजनक समाधान हो जाता था और लोग स्वत: उनके अनुयायी बन जाते थे.


Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं और इन जानकारियों को गूगल द्वारा प्राप्त की गयी है.


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