Netaji Subhash Chandra Bose Jayanti 2022 : पराक्रम दिवस पर जानिये नेताजी सुभाष चंद्र बोस के जीवन से जुडी Top 10 महत्वपूर्ण तथ्य ...

Netaji Subhash Chandra Bose Jayanti 2022: जानिये नेताजी सुभाष चंद्र बोस से जुडी 10 महत्वपूर्ण रोचक तथ्य | Know top 10 hidden interesting facts about Netaji Subhash Chandra Bose in Hindi


स्वतंत्र भारत में नेताजी सुभाष चंद्र बोस का अमूल्य योगदान है. नेताजी ने भारत के आजादी के लिए अपना पूरा जीवन लगा दिया. उन्होंने ना सिर्फ देश में बल्कि विदेशो में भी जाकर भारत के आजादी के लिए अपना पराक्रम दिखाया, जिसे आज कोई भूल नहीं सकता. आज भारत का हर एक नागरिक नेताजी सुभाष चंद्र बोस का अभिनन्दन करता है. उनका धन्यवाद देता है.


नेताजी सुभाष चंद्र बोस क्रांति कारी विचार के थे. नेताजी को याद करते ही हमारे आखों के सामने एक एक वीर योद्धा और कुशल राजनीतिज्ञ का चेहरा सामने आता है. नेताजी सुभाष चंद्र बोस एक महान स्वतंत्रता सेनानी होने के साथ साथ एक वीर सैनिक, एक वीर योद्धा, एक महान सेनापति, कुशल राजनीतिज्ञ भी थे. उनके व्यक्तित्व के बारे में जितना भी कहा जाए वह कम ही है.


नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने भारत को अंग्रेजों की गुलामी से आजाद कराने के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया. आजाद हिंद फौज के गठन से लेकर हर भारतीय को आजादी का महत्व बताने तक, देश से लेकर विदेशो तक उन्होंने हर जगह भारत के पलड़े को भारी किया. इस लेख में हम नेताजी सुभाष चंद्र बोस के जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण घटनाओ से सम्बंधित जानकारी प्राप्त करेंगे. साथ ही आपको नेताजी के जीवन से जुड़े कुछ अहम तथ्यों के बारे में बताते है.


नेताजी सुभाष चन्द्र बोस जयंती 2022 | Netaji Subhash Chandra Bose Jayanti 2022
Netaji Subhash Chandra Bose Jayanti 2022


नेताजी सुभाष चन्द्र बोस जयंती 2022 | Netaji Subhash Chandra Bose Jayanti 2022


नेताजी सुभाष चन्द्र बोस का नाम उन व्यक्तियों में आता है, जिन्होंने अपने आवाज मात्र से ही सामान्य जन में नयी ऊर्जा भर देते थे. सुभाष चन्द्र बोस द्वारा दिया गया 'जय हिंद' का नारा भारत का राष्ट्रीय नारा बन गया है. नेताजी द्वारा दिया गया 'तुम मुझे खून दो मैं तुम्हे आजादी दूँगा' नारा राष्ट्र व्यापी बन गया. उनके द्वारा 'दिल्ली चलो' का नारा आज भी कई बार उपयोग में लिया जाता है.


अपने आवाज से जान जागृत करने वाले तथा युवाओ में नई ऊर्जा भरने वाले नेताजी सुभाष चन्द्र बोस का जन्म 23 जनवरी 1897 को उड़ीसा में हुआ था. इसलिए इस दिन उनके जन्मदिवस को सुभाष चंद्र बोस जयंती के रूप में मनाया जाता है. इसी कड़ी में नेताजी द्वारा किये गए महान कार्यो को याद करने और उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए भारत सरकार ने नेताजी के जन्मदिन को पराक्रम दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया है. आइये देखते है नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण घटनाओ के बारे में.


नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के जीवन से जुड़ी 10+ खास बातें | Top 10 important incident 'Netaji Subhash Chandra Bose' life


  1. नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जन्म 23 जनवरी 1897 को ओडिशा, बंगाल डिविजन के कटक में हुआ. उनके पिता का नाम जानकीनाथ बोस तथा मां का नाम प्रभावती था. नेताजी के पिता कटक शहर के मशहूर वकील थे. प्रभावती और जानकीनाथ बोस की कुल 14 संतानें थी, जिसमें 6 बेटियां और 8 बेटे थे. उनमे सुभाष चंद्र उनकी 9वीं संतान और 5वें बेटे थे.
  2. नेताजी की प्राथमिक पढ़ाई कटक के रेवेंशॉव कॉलेजिएट स्कूल से हुई. तत्पश्चात उनकी शिक्षा कोलकाता के प्रेजीडेंसी कॉलेज और स्कॉटिश चर्च कॉलेज से हुई. इसके बाद उनके माता-पिता के कहने पर नेताजी ने भारतीय प्रशासनिक सेवा (इंडियन सिविल सर्विस) की तैयारी के लिए इंग्लैंड के केंब्रिज विश्वविद्यालय में दाखिला लिया. हालांकि उस समय किसी भारतीय को इंग्लैंड क्या इतना ऊँची शिक्षा तक नहीं ले पाता था.
  3. वर्ष 1920 में उन्होंने इंग्लैंड में सिविल सर्विस परीक्षा पास की. नेताजी ने मैट्रिक परीक्षा में दूसरा और भारतीय सिविल सेवा (आईसीएस) परीक्षा में चौथा स्थान हासिल किया. लेकिन भारतीय स्वतंत्रता संघर्ष में हिस्सा लेने के लिए उन्होंने जॉब छोड़ दी. वर्ष 1921 में भारत के स्वतंत्रता संग्राम में शामिल होने के लिए इंग्लैंड से भारत वापस आ गए.
  4. नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने वर्ष 1937 में अपनी सेक्रेटरी ऑस्ट्रियन युवती एमिली से शादी की. दोनों की एक बेटी अनीता हुई, और वर्तमान में वो जर्मनी में अपने परिवार के साथ रहती हैं. कभी कभी परिवार से मिलने वो भारत आती है.
  5. साल 1938 में नेताजी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष चुने गए, जिसके पश्चात उन्होंने राष्ट्रीय योजना आयोग का गठन किया. 1939 के कांग्रेस अधिवेशन में नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने गांधी जी के समर्थन से खड़े पट्टाभी सीतारमैया को हराकर विजय प्राप्त की. इस पर गांधी और बोस के बीच अनबन बढ़ गई, जिसके बाद नेताजी ने खुद ही कांग्रेस को छोड़ दिया.
  6. वर्ष 1937 में जापान ने चीन पर आक्रमण कर दिया. सुभाष चंद्र बोस की अध्यक्षता में कांग्रेस ने चीनी जनता की मदद के लिये डॉ॰ द्वारकानाथ कोटनिस के नेतृत्व में चिकित्सकीय दल भेजा. परन्तु आगे चलकर उन्हें भारत के स्वतंत्र संग्राम में जापान की मदद ली. इसके वजह से उन्हें लोगो से बहुत कुछ सुनना पड़ा. परन्तु उन्होंने उसकी परवाह नहीं की. 
  7. 3 मई 1939 को नेताजी ने कांग्रेस के अन्दर ही फॉरवर्ड ब्लॉक के नाम से अपनी पार्टी की स्थापना की. कुछ दिन बाद सुभाष चंद्र बोस को कांग्रेस से ही निकाल दिया गया. इसके बाद में फॉरवर्ड ब्लॉक अपने आप एक स्वतन्त्र पार्टी बन गयी. 
  8. 3 सितम्बर 1939 को मद्रास में सुभाष को ब्रिटेन और जर्मनी में युद्ध छिड़ने की सूचना मिली. इसी के साथ फॉरवर्ड ब्लॉक ने स्वतन्त्रता संग्राम को और अधिक तीव्र करने के लिये जन जागृति शुरू की. अगले ही वर्ष जुलाई में कलकत्ता स्थित हालवेट स्तम्भ जो भारत की गुलामी का प्रतीक था, सुभाष की यूथ ब्रिगेड ने रातोंरात वह स्तम्भ मिट्टी में मिला दिया. इसके कारण अंग्रेज सरकार ने फॉरवर्ड ब्लॉक से जुड़े सभी मुख्य नेताओ को कारावास में डाला. 
  9. द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान उन्होंने सोवियत संघ, नाजी जर्मनी, जापान जैसे देशों की यात्रा की और ब्रिटिश सरकार के खिलाफ मदद मांगी. भेष बदलकर वे काबुल से होते हुए रूस की राजधानी मास्को पहुंचे. वहां से वे जर्मनी आये, इधर वे हिटलर से मुलाक़ात की. परन्तु जब उन्हें मदद की कोई उम्मीद नहीं दिखी, तब वे समुन्द्र रास्ते से इंडोनेशिया पहुंचे.
  10. अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई तेज करने के लिए नेताजी ने 21 अक्टूबर 1943 को 'आजाद हिंद सरकार' की स्थापना की. इसी के साथ 'आजाद हिंद फौज' का गठन किया. इसे जर्मनी, जापान, फिलीपींस, कोरिया, चीन, इटली, मान्चुको और आयरलैंड सहित 11 देशो की सरकारों ने मान्यता दी.
  11. इसके बाद सुभाष चंद्र बोस अपनी फौज के साथ 4 जुलाई 1944 को बर्मा (वर्तमान में म्यांमार) पहुंचे. यहां उन्होंने नारा दिया 'तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा'. बोस ने आज़ाद हिन्द फौज की स्थापना के साथ एक महिला बटालियन भी गठित की थी, जिसमें उन्होंने रानी झांसी रेजिमेंट का गठन किया था.
  12. नेताजी सुभाष चंद्र बोस जीवन को कुल 11 बार कारावास हुआ. सबसे पहले उन्हें 16 जुलाई 1921 में छह महीने का कारावास हुआ था.
  13. कहा जाता है की 18 अगस्त, 1945 को ताइवान में हुई एक विमान दुर्घटना में नेताजी सुभाष की मौत हुई. परन्तु इसकी पुष्टि को लेकर तीन जांच आयोग बैठे, जिसमें से दो जांच आयोगों ने दावा किया कि दुर्घटना के बाद नेताजी की मृत्यु हो गई थी. जबकि न्यायमूर्ति एमके मुखर्जी की अध्यक्षता वाले तीसरे जांच आयोग का कहना है कि घटना के बाद नेताजी जीवित थे. 


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नेताजी सुभाष द्वारा 10+ महत्वपूर्ण कार्य जिसने अंग्रेजो को हिलाकर रख दिया | Top 10 important works by Netaji Subhash that shook the British


  1. रवींद्रनाथ ठाकुर की सलाह पर सुभाष भारत वापस आये और मुंबई में महात्मा गांधी से मिले. गाँधीजी के मणिभवन 20 जुलाई 1921 को गाँधीजी और सुभाष के बीच पहली मुलाकात हुई. गाँधीजी के सलाह पर नेताजी बंगाल गए और दासबाबू के नेतृत्व अंग्रेजो के विरुद्ध असहयोग आंदोलन में अपना योगदान दिया. 
  2. 1930 में सुभाष चंद्र बोस कारावास में होते हुए भी चुनाव में उन्हें कोलकाता का महापौर चुना गया. इसलिए अंग्रेजी हुकूमत को उन्हें रिहा करना पड़ा. नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने कोलकाता का महापौर होने पर वहां के सभी अंग्रेजी सडको और स्थानों के नाम फिर से भारतीय लोगो के नाम रखना प्रारम्भ किया. साथ ही भारतीय लोगो को नगरपालिका में सरकारी काम भी देने का कार्य किया. 
  3. नेताजी वर्ष 1938 भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष बने और देश में अंग्रेजो के विरुद्ध लड़ाई में तेजी लेकर आये.
  4. सुभाष चंद्र बोस ने बंगलौर में मशहूर वैज्ञानिक सर विश्वेश्वरय्या की अध्यक्षता में एक विज्ञान परिषद की स्थापना भी की.
  5. कांग्रेस में रहते हुए, नेताजी ने 3 मई 1939 को कांग्रेस के अन्दर ही फॉरवर्ड ब्लॉक के नाम से अपनी पार्टी की स्थापना की. इसका उद्देश्य अंग्रेजो के खिलाप लड़ाई तेज करनी थी. परन्तु कुछ दिन बाद सुभाष चंद्र बोस को ही निकाल दिया गया. इसके बाद में फॉरवर्ड ब्लॉक अपने आप एक स्वतन्त्र पार्टी बन गयी. 
  6. सुभाष चंद्र बोस ने अपने जर्मनी यात्रा में जर्मनी में कई नेताओ से भारत की स्वतंत्र संग्राम में सहायता मांगी. इसी दौरान नेताजीबीसुभाष भारतीय स्वतन्त्रता संगठन और आज़ाद हिन्द रेडियो की स्थापना की. आखिर 29 मई 1942 के दिन, सुभाष जर्मनी के सर्वोच्च नेता एडॉल्फ हिटलर से मिले. परन्तु कुछ ख़ास मदद ना मिलाने पर वे वहां से चले आये.
  7. द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान आज़ाद हिन्द फौज ने जापानी सेना के सहयोग से भारत पर आक्रमण किया. नेताजी ने 5 जुलाई 1943 को सिंगापुर के टाउन हाल के सामने 'सुप्रीम कमाण्डर' के रूप में फौज को प्रेरित करते हुए "दिल्ली चलो!" का नारा दिया और जापानी सेना के साथ मिलकर ब्रिटिश व कामनवेल्थ सेना से बर्मा सहित इंफाल और कोहिमा में एक साथ जमकर मोर्चा लिया.
  8. अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई तेज करने के लिए नेताजी ने 21 अक्टूबर 1943 को 'आजाद हिंद सरकार' की स्थापना की. इसी के साथ 'आजाद हिंद फौज' का गठन किया. 
  9. बोस ने आज़ाद हिन्द फौज की स्थापना के साथ एक महिला बटालियन भी गठित की थी, जिसमें उन्होंने रानी झांसी रेजिमेंट का गठन किया था.
  10. सुभाष चंद्र बोस अपनी फौज के साथ 4 जुलाई 1944 को बर्मा (वर्तमान में म्यांमार) पहुंचे. यहां उन्होंने नारा दिया 'तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा'. 
  11. 6 जुलाई 1944 को आज़ाद हिन्द रेडियो पर अपने भाषण के माध्यम से गान्धीजी को सम्बोधित करते हुए नेताजी ने जापानी सहायता लेने का और आर्जी-हुकूमते-आज़ाद-हिन्द तथा आज़ाद हिन्द फौज की स्थापना के उद्देश्य के दौरान नेताजी ने गान्धीजी को राष्ट्रपिता कहा तभी गांधीजी ने भी उन्हे नेताजी कहा.
  12. आज़ाद हिन्द फौज और जापानी सेना ने मिलकर अंग्रेजों से अंदमान और निकोबार द्वीप समूह जीत लिये. नेताजी ने इन द्वीपों को "शहीद द्वीप" और "स्वराज द्वीप" का नाम दिया.
  13. पूर्वी एशिया में नेताजी ने अनेक भाषण देकर वहाँ के स्थायी भारतीय लोगों से आज़ाद हिन्द फौज में भर्ती होने और उसे आर्थिक मदद देने का आह्वान किया. उन्होंने अपने भाषणों में 'तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूँगा' का नारा दिया, को आज भी प्रसिद्ध है.
  14. सुभाष चंद्र बोस ने ही 'जय हिंद' का नारा दिया जो आगे चलकर भारत का राष्ट्रीय नारा बन गया है.


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नेताजी सुभाषचंद्र बोस को सम्मान | Honor to Netaji Subhash Chandra Bose in Hindi


  1. भारतीय राजनीतिक व्यवस्था और स्वतंत्रता संग्राम में उनके महत्वपूर्ण योगदान के कारण सभी भारतीय उनकी बहुत सम्मान करते है. 
  2. नेताजी सुभाषचंद्र बोस का सम्मान ना सिर्फ देश में बल्कि विदेशो में भी किया जाता है. उनकी प्रतिमा ना सिर्फ भारत में है बल्कि जापान सहित अन्य देशो में भी है.
  3. नेताजी सुभाष चंद्र बोस के जन्मदिन को 23 जनवरी नेताजी सुभाष चंद्र बोस जयंती के रूप में मनाया जाता है.
  4. सुभाष चंद्र बोस से जुड़े 100 गोपनीय दस्तावेज अब सार्वजनिक किये जा चुके है. दरअसल वर्ष 2016 में प्रधानमंत्री मोदी ने सुभाष चंद्र बोस से जुड़ी सौ गोपनीय फाइलों का डिजिटल संस्करण सार्वजनिक किया. अभी ये दिल्ली स्थित राष्ट्रीय अभिलेखागार में मौजूद हैं.
  5. नेताजी को सम्मान देते हुए आज़ाद हिन्द सरकार के 75 वर्ष पूर्ण होने पर इतिहास में पहली बार वर्ष 2018 में भारत के प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले पर तिरंगा फहराया.
  6. भारत सरकार ने नेताजी की 125वीं जयंती 23 जनवरी 2021 को उनके जन्मदिन को पराक्रम दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया है. 
  7. वर्ष 2022 से गणतंत्र दिवस समारोह में सुभाष चंद्र बोस की जयंती को भी शामिल किया जाएगा यानी अब रिपब्लिक डे का समारोह 24 जनवरी के बजाय हर साल 23 जनवरी से शुरू होगा.
  8. नरेंद्र मोदी सरकार ने अंडमान निकोबार द्वीप समूह के तीन द्वीपों में से एक रॉस द्वीप का नाम बदलकर सुभाष चंद्र बोस द्वीप कर दिया.
  9. प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने नेताजी सुभाषचंद्र बोसजी की 125वीं जयंती पर ग्रेनाइट से बनी उनकी भव्यप्रतिमा को इंडिया गेट पर स्थापित किये जाने का निर्णय लिया है. नेताजी की प्रतिमा का कार्य पूरा होने तक उनकी होलोग्राम प्रतिमा वहां मौजूद रहेगी.
  10. प्रधानमंत्री जी ने एक और बड़ा निर्णय किया है देश में नेताजी के नाम पर एक पुरस्कार शुरू करने का, इससे आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में काम करने वाले सभी लोगों को सुभाष चंद्र बोस के नाम के साथ जुड़े हुए पुरस्कार हमेशा आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए प्रेरित करते रहेंगे.
  11. प्रत्येक वर्ष नेताजी सुभाषचंद्र बोस के जयंती पर पूरा देश उनको नमन करता है. उनके द्वारा दिए गए योगदान को याद करता है. उन्हें श्रद्धा पूर्वक श्रद्धांजलि दी जाती है.


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नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के अनमोल सुविचार | Famous Invaluable of Netaji Subhash Chandra Bose Quotes in Hindi


जब भी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की बात होती है तो उनके ऊर्जादाई भाषणों और प्रेरक वाक्यों का उपयोग अवश्य किया जाता है. आज भी किसी जन आंदोलन में उनका दिया गया नारा 'चलो दिल्ली' का बहुत उपयोग किया जाता है. द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान भारतीय सैनिको और जन साधारण में आत्मविश्वाश जगाते हुए उन्होंने ‘तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूंगा!’ का नारा दिया था. नेताजी हमेशा अपने देश के आजादी के लिए सोचते रहते थे. उनके द्वारा दिया गया ‘जय हिन्द जय भारत का नारा, भारत का राष्ट्रीय नारा बन गया हैं. 


नेताजी अपने देश और इस मिट्टी का मोल समझते थे. उनके भाषणों में आजादी की बात प्रमुखता से होती थी. उन्होंने कहा था, 'ये हमारा कर्तव्य है कि हम अपनी स्वतंत्रता का मोल अपने खून से चुकाएं'. इसी प्रकार उन्होंने अपने एक भाषण में जीत और हार का अर्थ समझाया और राष्ट्रवाद की भी बात की है. उन्होंने कहा 'राष्ट्रवाद मानव जाति के उच्चतम आदर्श सत्य, शिव और सुन्दर से प्रेरित है.' नेताजी जब भी भाषण देते है लोगो में एक नयी ताकत नयी ऊर्जा नया उत्साह भर जाता था. आइये देखते है नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वारा कहे गए अनमोल वचन जो आज भी हमें ऊर्जा प्रदान करती है. 


Netaji Subhash Chandra Bose Jayanti Quotes in Hindi


  1. तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हे आज़ादी दूंगा !
  2. स्वतंत्रता दिया नहीं जाता, इसे लिया जाता है .
  3. भविष्य अब भी मेरे हाथ में है .
  4. सफलता, हमेशा असफलता के स्‍तंभ पर खड़ी होती है .
  5. राष्ट्रवाद मानव जाति के सर्वोच्च आदर्शों सत्यम, शिवम्, सुन्दरम से प्रेरित है .
  6. अच्छे चरित्र निर्माण करना ही छात्रों का मुख्य कर्तव्य होना चाहियें .
  7. हमारा कार्य केवल कर्म करना हैं ! कर्म ही हमारा कर्तव्य है ! फल देने वाला स्वामी ऊपर वाला है .
  8. माँ का प्यार स्वार्थ रहित और सबसे गहरा होता है ! इसको किसी भी प्रकार नापा नहीं जा सकता .
  9. संघर्ष ने मुझे मनुष्य बनाया, मुझमे आत्मविश्वास उत्पन्न हुआ ,जो पहले मुझमे नहीं था .
  10. अन्याय सहना और गलत के साथ समझौता करना सबसे बड़ा अपराध है .
  11. इतिहास में कभी भी विचार-विमर्श से कोई वास्तविक परिवर्तन प्राप्त नहीं किया गया है .
  12. मेरी सारी की सारी भावनाएं मृतप्राय हो चुकी हैं और एक भयानक कठोरता मुझे कसती जा रही है .
  13. हमारा सफर कितना ही भयानक, कष्टदायी और बदतर हो, लेकिन हमें आगे बढ़ते रहना ही है. सफलता का दिन दूर हो सकता हैं, लेकिन उसका आना अनिवार्य ही है .
  14. जीवन में प्रगति का आशय यह है की शंका संदेह उठते रहें, और उनके समाधान के प्रयास का क्रम चलता रहे .
  15. जो अपनी ताकत पर भरोसा करते हैं, वो आगे बढ़ते हैं और उधार की ताकत वाले घायल हो जाते हैं.
  16. हमें अपने जीवन को अधिकतम सिद्धांतों पर बनाना पड़ेगा. हमें बैठ कर नहीं रहना है क्योंकि जीवन के पूर्ण सत्य को हम नहीं जानते .
  17. मेरे पास एक लक्ष्य है जिसे मुझे हर हाल में पूरा करना हैं. मेरा जन्म उसी के लिए हुआ है ! मुझे नैतिक विचारों की धारा में नहीं बहना है .
  18. एक व्यक्ति एक विचार के लिए मर सकता है, लेकिन वह विचार उसकी मृत्यु के बाद, एक हजार जीवन में खुद को अवतार लेगा .
  19. अपने पूरे जीवन में मैंने कभी खुशामद नहीं की है. दूसरों को अच्छी लगने वाली बातें करना मुझे नहीं आता .
  20. मैंने अपने अनुभवों से सीखा है ; जब भी जीवन भटकता हैं, कोई न कोई किरण उबार लेती है और जीवन से दूर भटकने नहीं देती .
  21. राजनीतिक सौदेबाजी का रहस्य है अपने आपको सच की तुलना मैं ज्यादा मजबूत दिखना .
  22. भारत हमें बुला रहा है. खून खून को बुला रहा है. उठो, हमारे पास बर्बाद करने के लिए समय नहीं है. अपने हथियरों को उठा लो. दिल्ली के लिए सड़क स्वतंत्रता की राह है. चलो दिल्ली !
  23. सैनिक जो हमेशा अपने देश के लिए वफादार रहते हैं, जो हमेशा अपने जीवन का न्योछावर करने के लिए तैयार रहते हैं, वे अजेय होते हैं .
  24. आज हमारे पास बस एक ही इच्छा होनी चाहिए, मरने की इच्छा ताकि भारत जीवित रह सके ! एक शहीद की मौत मरने की इच्छा ताकि आजादी का मार्ग शहीदों के खून से किया जा सके .
  25. कभी भी भारत के भाग्य में अपना विश्वास खोना नहीं. पृथ्वी पर कोई शक्ति ऐसी नहीं है जो भारत को बंधन में रख सकती है. भारत जरूर आज़ाद होगा और वह भी बहुत जल्द ही .
  26. आदमी, पैसा और सामग्री, खुद से, विजय और स्वतंत्रता नहीं दिला सकते . हमारे पास मकसद-शक्ति होना बहुत ही जरूरी है जो हमें बहादुर और कर्मवीर कारनामे करने की प्रेरणा देगा .
  27. भारत में राष्ट्रवाद ने एक ऐसी शक्ति का संचार किया है, जो हमारे लोगों के अन्दर सदियों से निष्क्रिय पड़ी थी .
  28. यह हमारा कर्तव्य है कि हम अपनी स्वाधीनता का मोल अपने खून से चुकाएं. हमें अपने बलिदान और परिश्रम से जो आज़ादी मिले, हमारे अन्दर से उसकी रक्षा करने की ताकत होनी चाहिए .
  29. मेरे मन में कोई संदेह नहीं है कि हमारी प्रमुख राष्ट्रीय समस्याएं गरीबी, अशिक्षा, बीमारी, वैज्ञानिक उत्पादन एवं वितरण सिर्फ समाजवादी तरीके से ही की जा सकती है .
  30. एक सच्चे सिपाही को सैन्य और आध्यात्मिक दोनों ही प्रशिक्षण की ज़रुरत होती है .
  31. सैनिकों के रूप में आपको हमेशा तीन आदर्शों को ध्यान में रखकर जीना होगा : वफादारी, कर्तव्य और बलिदान .
  32. इतिहास गवाह है की कोई भी वास्तविक परिवर्तन चर्चाओं से कभी नहीं हुआ .
  33. जिस व्यक्ति के अंदर सनक नहीं होती वो कभी महान नहीं बन सकता. लेकिन उसके अंदर, इसके आलावा भी कुछ और होना चाहिए .


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