Netaji Subhash Chandra Bose Jayanti 2022: कब और क्यों मनाई जाती है नेताजी सुभाष चंद्र बोस जयंती? जानें, नेताजी सुभाष चंद्र बोस जयंती का महत्व

Subhash Chandra Bose Jayanti 2022: आखिर क्यों मनाया जाता है नेताजी सुभाष चंद्र बोस जयंती? जानिये इसका इतिहास और महत्व | When and why Netaji Subhash Chandra Bose Jayanti celebrated in Hindi? History, Significance, Parakram Diwas

जब भी नेताजी सुभाष चंद्र बोस का नाम लिया जाता है, तब एक वीर सैनिक, एक वीर योद्धा, एक महान सेनापति, कुशल राजनीतिज्ञ का शौर्य हमारे मस्तिष्क में छा जाता है. सुभाष चंद्र बोस सिर्फ एक नाम नहीं बल्कि यह शौर्य और पराक्रम की गाथा है. उनके व्यक्तित्व का जितना भी वर्णन किया जाए वह कम ही होगा. नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने भारत के लिए अपना पूरा जीवन लगा दिया. भारत के लिए अपना सर्वस्व त्याग दिया. उनकी जीवन गाथा बहुत सारे लोगो के लिए आज प्रेणना का स्त्रोत बन गई है.

नेताजी सुभाष चंद्र बोस का भारत के आजादी में अभूतपूर्व योगदान है. उन्हें कितने बार जेल जाना पड़ा. कितनी यातनाए साहनी पड़ी. उन्होंने ही आजाद हिंद फौज के गठन से लेकर हर भारतीय को आजादी का महत्व बताने का कार्य किया है. इस लेख में नेताजी सुभाष चंद्र बोस के बारे में विस्तृत जानकारी देखेंगे. नेताजी सुभाष चंद्र बोस कैसे एक उत्तम विद्यार्थी से एक अग्रणी स्वतंत्रता नेता बन गए. आज इस लेख के माध्यम से हम आपको नेताजी के जीवन के बारे में कुछ खास बातें बताते हैं.

Netaji Subhash Chandra Bose Jayanti 2022, पराक्रम दिवस क्यों मनाया जाता है?

नेताजी सुभाष चंद्र बोस जयंती 2022 | Netaji Subhash Chandra Bose Jayanti 2022 


नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने देश के आजादी के लिए देश के युवाओ में जान भर दी, एक नयी ऊर्जा दिया. उन्होंने तुम मुझे खून दो, मैं तुम्‍हें आजादी दूंगा....! जय हिन्द! जैस नारों से आजादी की लड़ाई को नई ऊर्जा प्रदान की. उनका यह जयघोस आज भी प्रेणनादाई और उत्साह वर्धक है. नेताजी सुभाष चंद्र बोस का नाम भारत के उन महान स्वतंत्रता सेनानियों में शामिल हैं जिनसे आज के दौर का युवा वर्ग प्रेरणा लेता है. 

कांग्रेस में महात्मा गांधी अहिंसा का मार्ग पर चलते थे, तो वहीं सुभाष चंद्र बोस जोशीले क्रांतिकारी दल के प्रिय थे. उनका मानना था कि अहिंसा के जरिए स्वतंत्रता नहीं पाई जा सकती. दूसरे विश्व युद्ध के दौरान उन्होंने सोवियत संघ, नाजी जर्मनी, जापान जैसे देशों की यात्रा की और ब्रिटिश सरकार के खिलाफ सहयोग मांगा. उन्होंने आजाद हिंद रेडियो स्टेशन जर्मनी में शुरू किया और पूर्वी एशिया में भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन का नेतृत्व किया. 

अंग्रेजों से भारत को आजाद कराने के लिए नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने 21 अक्टूबर 1943 को 'आजाद हिंद सरकार' की स्थापना करते हुए 'आजाद हिंद फौज' का गठन किया था. बोस ने आज़ाद हिन्द फौज की स्थापना के साथ एक महिला बटालियन भी गठित की थी, जिसमें उन्होंने रानी झांसी रेजिमेंट का गठन किया था. इसके बाद सुभाष चंद्र बोस अपनी फौज के साथ 4 जुलाई 1944 को बर्मा (वर्तमान में म्यांमार) पहुंचे. यहां उन्होंने नारा दिया 'तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा'. उन्होंने ही 'जय हिन्द' जैसे ज्वलंत और ऊर्जादाई नारा दिया है.

'नेताजी सुभाष चंद्र बोस जयंती' क्यों मनाई जाती है? | Why is 'Netaji Subhash Chandra Bose Jayanti' celebrated in Hindi?


नेताजी सुभाष चंद्र बोस (Subhash Chandra Bose) का जन्म 23 जनवरी 1897 को उड़ीसा (Odisha) के कटक में हुआ था. नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वारा किये गए महान कार्यो को याद करने और उन्हें सम्मानित करने के लिए उनके जन्मदिन को हर साल नेताजी सुभाष चंद्र बोस जयंती के रूप में मनाया जाता है. साथ ही उन्हें श्रद्धांजलि भी दी जाती है. इस वर्ष 2022 में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 125वीं जयंती मनाई जा रही है.

पराक्रम दिवस क्यों मनाया जाता है? | Why is Parakram Day celebrated in Hindi?


नेताजी सुभाष चंद्र बोस के जन्मदिवस को ‘पराक्रम दिवस’ (Parakram Diwas) के रूप में भी मनाया जाता है. उनके जन्म को 'नेताजी सुभाष चंद्र बोस जयंती' के रूप में मना कर उन्हें याद किया जाता है. इसी क्रम में उनके द्वारा दिए गए योगदान के लिए नेताजी के जन्मदिवस 23 जनवरी को ‘पराक्रम दिवस’ (Parakram Diwas) के रूप में मनाया जाता है. 

'नेताजी सुभाष चंद्र बोस जयंती' पर पराक्रम दिवस क्यों मनाई जाती है? | Why is Parakram Divas celebrated on 'Netaji Subhash Chandra Bose Jayanti'?


भारत में स्वतंत्रता संग्राम के महानायक और ‘जय हिंद’ का नारा देने वाले सुभाष चंद्र बोस की जयंती हर साल 23 जनवरी को मनाई जाती है. उनके जन्म को 'नेताजी सुभाष चंद्र बोस जयंती' के रूप में मना कर उन्हें याद किया जाता है. इसी क्रम में उनके द्वारा दिए गए योगदान के लिए नेताजी के जन्मदिवस को 'पराक्रम दिवस' (Parakram Diwas) के रूप में भी मनाया जाने लगा. इसकी शुरुआत साल 2021 में हुई. 

दरअसल, भारत सरकार ने नेता जी की 125वीं जयंती यानी 23 जनवरी 2021 को पराक्रम दिवस के रूप में मनाने का फैसला किया था. अर्थात प्रति वर्ष नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती को पराक्रम दिवस के रूप में मनाई जायेगी.  

नेताजी सुभाष चंद्र बोस को सम्मान देते हुए भारत सरकार ने अंडमान निकोबार द्वीप समूह के तीन द्वीपों में से एक रॉस द्वीप का नाम बदलकर सुभाष चंद्र बोस द्वीप कर दिया. इसके साथ ही वर्ष 2016 में मोदी सरकार ने सुभाष चंद्र बोस से जुड़ी सौ गोपनीय फाइलों का डिजिटल संस्करण कर सार्वजनिक किया, ये दस्तावेज दिल्ली स्थित राष्ट्रीय अभिलेखागार में मौजूद हैं.

इस साल वर्ष 2022 से गणतंत्र दिवस समारोह में सुभाष चंद्र बोस की जयंती को भी शामिल किया जाएगा यानी अब रिपब्लिक डे का समारोह 24 जनवरी के बजाय हर साल 23 जनवरी से शुरू होगा.

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