Netaji Subhash Chandra Bose Jayanti 2022 : इंडिया गेट पर नेताजी की प्रतिमा के होलोग्राम का अनावरण किया गया

Netaji Subhash Chandra Bose Jayanti 2022 : पराक्रम दिवस पर जाने नेताजी सुभाष चंद्र बोस को कैसे श्रद्धांजलि दी गयी...


नेताजी सुभाष, जिन्होंने हमें स्वाधीन और संप्रभु भारत का विश्वास दिलाया था, जिन्होंने बड़े गर्व के साथ, बड़े आत्मविश्वास के साथ, बड़े साहस के साथ अंग्रेजी सत्ता के सामने कहा था- 'मैं स्वतंत्रता की भीख नहीं लूंगा, मैं इसे हासिल करूंगा'. जिन्होंने भारत की धरती पर पहली आज़ाद सरकार को स्थापित किया था, हमारे उन नेताजी की भव्य प्रतिमा आज डिजिटल स्वरूप में इंडिया गेट के समीप स्थापित हो रही है. जल्द ही इस होलोग्राम प्रतिमा के स्थान पर ग्रेनाइट की विशाल प्रतिमा भी लगेगी. ये प्रतिमा आज़ादी के महानायक को कृतज्ञ राष्ट्र की श्रद्धांजलि है. नेताजी सुभाष की ये प्रतिमा हमारी लोकतान्त्रिक संस्थाओं को, हमारी पीढ़ियों को राष्ट्रीय कर्तव्य का बोध कराएगी, आने वाली पीढ़ियों को, वर्तमान पीढ़ी को निरंतर प्रेरणा देती रहेगी.


पराक्रम दिवस की एक झलक | A Glimpse of Parakram Diwas


पराक्रम दिवस की एक झलक | A Glimpse of Parakram Diwas


  • प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज नेताजी सुभाष चंद्र बोस जी की जयंती के अवसर पर इंडिया गेट पर नेताजी की प्रतिमा के होलोग्राम का अनावरण किया.
  • केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की प्रतिमा के होलोग्राम के अनावरण के लिए पूरे देश की तरफ से प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का धन्यवाद किया.
  • आज नेताजी का 125वां जन्मदिन है और कुछ समय पहले ही प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने नेताजी के जन्मदिन को पराक्रम दिवस के रूप में मनाने की शुरूआत की है.
  • आज इस पराक्रम दिवस के अवसर पर एक ऐतिहासिक फ़ैसला लेते हुए मोदी जी ने ये भी निर्णय लिया है कि आज़ादी के अमृत महोत्सव में गणतंत्र दिवस की शुरूआत भी 23 जनवरी से की जाएगी.
  • नेताजी का 125वां जन्मदिन मनाने के हिस्से के रूप में इंडिया गेट पर नेताजी सुभाषचंद्र बोस की भव्य प्रतिमा लगाने का निर्णय भी देश के प्रधानमंत्री ने लिया है.
  • नेताजी की प्रतिमा आने वाली पीढ़ियों को कई वर्षों तक पराक्रम, देशभक्ति और बलिदान की प्रेरणा देगी क्योंकि ये सिर्फ़ ग्रेनाईट से बनी हुई प्रतिमा नहीं होगी, बल्कि देश के करोड़ों लोगों के मन में नेताजी के लिए भाव की अभिव्यक्ति होगी.
  • कलकत्ता से बर्लिन के रास्ते जापान तक की यात्रा भारत को आज़ाद करने का नेताजी का पुरूषार्थ और एक भव्य प्रयास था और ये प्रतिमा इसका प्रतीक होगी.
  • आज देश के करोड़ों लोगों के मन को शांति मिलेगी कि नेताजी का जिस प्रकार का योगदान देश के आज़ादी संघर्ष में रहा उसका सम्मान देश के प्रधानमंत्री जी ने इतने सालों के बाद किया है और ये प्रतिमा इसका प्रतीक बनकर रहेगी.
  • चलो दिल्ली का नारा आज भी युवाओं को चेतना और ऊर्जा प्रदान करता है, नेताजी के संघर्ष की गाथाएं आज भी युवाओं को भारत के पुनर्निर्माण के साथ जोड़ती हैं और उनके व्यक्तित्व से आने वाले दिनों में कई युवा प्रेरणा लेकर आगे बढ़ेंगे.
  • कई सालों तक देश की आज़ादी के संघर्ष में जिन्होंने बड़ा पराक्रम दिखाया और योगदान दिया, उनके नाम को भुलाने का प्रयास किया गया.
  • आज आज़ादी के अमृत वर्ष के दौरान नेताजी की प्रतिमा लगाने का जो फ़ैसला किया गया है, इससे पूरा देश संतोष और उत्साह का अनुभव कर रहा है.
  • प्रधानमंत्री जी ने एक और बड़ा निर्णय किया है देश में नेताजी के नाम पर एक पुरस्कार शुरू करने का, इससे आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में काम करने वाले सभी लोगों को सुभाष चंद्र बोस के नाम के साथ जुड़े हुए पुरस्कार हमेशा आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए प्रेरित करते रहेंगे.


इंडिया गेट पर नेताजी की होलोग्राम प्रतिमा के अनावरण के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में श्री अमित शाह ने कहा कि आज नेताजी का 125वां जन्मदिन है, और कुछ समय पहले ही प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने नेताजी के जन्मदिन को पराक्रम दिवस के रूप में मनाने की शुरूआत की है. आज इस पराक्रम दिवस के अवसर पर एक ऐतिहासिक फ़ैसला लेते हुए मोदी जी ने ये भी निर्णय लिया है कि आज़ादी के अमृत महोत्सव में गणतंत्र दिवस की शुरूआत भी 23 जनवरी से की जाएगी.


नेताजी सुभाष चंद्र बोस की भव्य प्रतिमा लगाने का निर्णय भी देश के प्रधानमंत्री ने लिया है. नेताजी की प्रतिमा आने वाली पीढ़ियों को कई वर्षों तक पराक्रम, देशभक्ति और बलिदान की प्रेरणा देगी क्योंकि ये सिर्फ़ ग्रेनाईट से बनी हुई प्रतिमा नहीं होगी, बल्कि देश के करोड़ों लोगों के मन में नेताजी के लिए भाव की अभिव्यक्ति होगी. एक ऐसा व्यक्तित्व जिसने अपने पूरे जीवन का सुख त्याग करते हुए लगभग 35,000 किलोमीटर की यात्रा कार से या पनडुब्बी से की. कलकत्ता से बर्लिन के रास्ते जापान तक की यात्रा भारत को आज़ाद करने का नेताजी का पुरूषार्थ और एक भव्य प्रयास था और ये प्रतिमा इसका प्रतीक होगी.


नेताजी के संघर्ष की गाथाएं आज भी युवाओं को भारत के पुनर्निर्माण के साथ जोड़ती हैं, और उनके व्यक्तित्व से आने वाले दिनों में कई युवा प्रेरणा लेकर आगे बढ़ेंगे. उन्होंने कहा कि कई सालों तक देश की आज़ादी के संघर्ष में जिन्होंने बड़ा पराक्रम दिखाया और योगदान दिया, उनके नाम को भुलाने का प्रयास किया गया. आज आज़ादी के अमृत वर्ष के दौरान नेताजी की प्रतिमा लगाने का जो फ़ैसला किया गया है, इससे पूरा देश संतोष और उत्साह का अनुभव कर रहा है.


नेताजी सुभाष, जिन्होंने हमें स्वाधीन और संप्रभु भारत का विश्वास दिलाया था, जिन्होंने बड़े गर्व के साथ, बड़े आत्मविश्वास के साथ, बड़े साहस के साथ अंग्रेजी सत्ता के सामने कहा था- 'मैं स्वतंत्रता की भीख नहीं लूंगा, मैं इसे हासिल करूंगा'. जिन्होंने भारत की धरती पर पहली आज़ाद सरकार को स्थापित किया था, हमारे उन नेताजी की भव्य प्रतिमा आज डिजिटल स्वरूप में इंडिया गेट के समीप स्थापित हो रही है. जल्द ही इस होलोग्राम प्रतिमा के स्थान पर ग्रेनाइट की विशाल प्रतिमा भी लगेगी. ये प्रतिमा आज़ादी के महानायक को कृतज्ञ राष्ट्र की श्रद्धांजलि है. नेताजी सुभाष की ये प्रतिमा हमारी लोकतान्त्रिक संस्थाओं को, हमारी पीढ़ियों को राष्ट्रीय कर्तव्य का बोध कराएगी, आने वाली पीढ़ियों को, वर्तमान पीढ़ी को निरंतर प्रेरणा देती रहेगी.


पिछले साल से देश ने नेताजी की जयंती को पराक्रम दिवस के रूप में मनाना शुरू किया है. आज पराक्रम दिवस के अवसर पर सुभाषचंद्र बोस आपदा प्रबंधन पुरस्कार भी दिए गए हैं. परिस्थितियां कैसी भी हों, अगर हममे हौंसला है तो हम आपदा को भी अवसर में बदल सकते हैं. यही संदेश नेताजी ने हमे आजादी की लड़ाई के दौरान दिया था. नेताजी कहते थे कभी भी स्वतंत्र भारत के सपने का विश्वास मत खोना. दुनिया की कोई ताकत नहीं है जो भारत को झकझोर सके. वो ये जानते थे तभी ये बात हमेशा कहते थे भारत में राष्ट्रवाद ने ऐसी सृजनात्मक शक्ति का संचार किया है जो सदियों से लोगों के अंदर सोई पड़ी थी. हमें राष्ट्रवाद भी जिंदा रखना है. हमें सृजन भी करना है, और राष्ट्र चेतना को जागृत भी रखना है.


src: pib


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