Gateway To Hell : बंद होगा 'नर्क का दरवाजा'! | जाने क्या है 'नर्क के द्वार' का रहस्य? | कैसे हुई इसकी शुरुआत? | The Secret of 'Gateway To Hell' information in Hindi

Gateway To Hell Turkmenistan : जानिये क्या है 'नर्क का दरवाजा', जिसे तुर्कमेनिस्तान सरकार बंद करने की तैयारी कर रहा है, 1971 से आखिर क्यों धधक रही है आग? 

'नर्क का दरवाजा' (Gateway To Hell) यानी 'गेटवे टू हेल' का नामों निशान जल्द ही मिटने वाला है. तुर्कमेनिस्तान में बने 'नर्क के दरवाजे' को बंद करने की तैयारी शुरू कर दी गई है. तुर्कमेनिस्तान के राष्ट्रपति गुरबांगुली बर्डीमुखामेदोव ने इसे बुझाने का आदेश दे‍ दिया है. 

आखिर ऐसा क्या हुआ की तुर्कमेनिस्तान सरकार ने अब इस 'नर्क के द्वार' (Gateway To Hell) को हमेशा के लिए बंद करने का फैसला लिया है! 1971 से आखिर क्यों धधक रही है आग? क्या है यह नरक का दरवाजा, Gateway of Hell का रहस्य, जहन्नुम का रास्ता, जान लेने वाला मंदिर, आगे पढ़े नरक का दरवाजा (Gateway of Hell) से जुडी महत्वपूर्ण जानकारी
नर्क का दरवाजा| Gateway To Hell
नर्क का दरवाजा| Gateway To Hell

नर्क का दरवाजा| Gateway To Hell


दुनिया में ऐसी कई रहस्यमयी चीजे है, जिसे आज भी वैज्ञानिक समझने और सुलझाने की प्रयत्न कर रहे हैं. परन्तु अभी भी रहस्य ही बने हुए हैं. इसीमे आता है जहन्नुम का रास्ता (Way of Hell). इसे लोग नरक का दरवाजा (Narak ka Darwaja) भी कह रहे है. 

तुर्कमेनिस्तान के काराकुम रेगिस्तान में पिछले 50 साल से जल रहे 'नर्क का दरवाजा' यानी 'गेटवे टू हेल' का नामों निशान जल्द ही मिटने वाला है. तुर्कमेनिस्तान सरकार ने अब इस 'नर्क के द्वार' (Gateway To Hell) को हमेशा के लिए बंद करने का फैसला किया है. तुर्कमेनिस्तान में बने 'नर्क के दरवाजे' को बंद करने की तैयारी शुरू कर दी गई है. तुर्कमेनिस्तान के राष्ट्रपति गुरबांगुली बर्डीमुखामेदोव ने इसे बुझाने का आदेश दे‍ दिया है. 
 

क्‍या है नर्क का दरवाजा? | What is the 'Door of Hell'/ 'Gateways of Hell' in Hindi? 


तुर्कमेनिस्तान में काराकुम (Karakum) रेगिस्तान है. यहां के उत्‍तरी हिस्‍से में ग्रेटर नाम का गड्ढ़ा है. यह गड्ढ़ा 69 मीटर चौड़ा और 30 मीटर गहरा है. दुनियाभर में 'नर्क का दरवाजा' (Gateway To Hell) नाम से मशहूर 'गेटवे टू हेल' दरअसल, 229 फुट चौड़ा और 66 फुट गहरा मीथेन गैस से भरा एक गड्ढा है. यहां पिछले 50 साल से लगातार मीथेन गैस का रिसाव हो रहा है. कई दशकों से इसमें से आग धधक रही है. इसे यहां की भाषा में नर्क का दरवाजा (Gateway To Hell) कहा जाता है, लेकिन इसका कोई कनेक्‍शन नर्क या शैतान से बिल्‍कुल भी नहीं है. इस गड्ढ़े से निकलने वाली आग की वजह है प्राकृतिक गैस मेथेन. 

क्यों बंद किया जा रहा है 'नर्क का दरवाजा'? | Why 'Gateways of Hell' is getting closed in Hindi?


इसके कारण गड्ढे में दिन-रात लगातार आग जलती रहती है. अब इस नर्क के द्वार को बंद करने की तैयारी की जा रही है. 
'नर्क का दरवाजा' (Gateway To Hell) गड्ढे से निकलने वाले प्रदूषण के चलते पर्यावरण को बहुत नुकसान हो रहा है. इस गड्ढे को गैस क्रेटर के नाम से भी जाना जाता है, जो 1971 से लगातार धधक रहा है. इस गड्ढे को पूरी तरह से बंद करने के निर्देश 2010 में भी दिए गए थे. 

तुर्कमेनिस्तान के राष्ट्रपति के अनुसार इंसनों की गलती के कारण हमारा पर्यावरण दूषित हो रहा है. लोगों के स्वास्थ्य पर इसका बुरा प्रभाव पड़ रहा है. गड्ढे से निकलने वाली गैस आस-पास के गांव में रहने वाले लोगों की सेहत बिगाड़ रही है. उन्होंने कहा कि हम अपना बेशकीमती संसाधन भी खो रहे हैं. हम इसी मीथेन गैस का उपयोग बेहतरीन ऊजा के रूप में कर सकते हैं.

कैसे बना यह 'नर्क का दरवाजा'? | How 'Gateways of Hell' was built in Hindi ?


कहा जाता है की दूसरे विश्व युद्ध के बाद सोवियत संघ के आर्थिक हालात ठीक नहीं थे. तब सोवियत संघ के भूवैज्ञानिक कच्चे तेल के भंडार की तलाश करने के लिए काराकुम के रेगिस्तान में आए थे. वो इसमें सफल भी हुए और यहां उन्हें जगह-जगह प्राकृतिक गैस के भंडार मिले. परन्तु इस खोज के दौरान जमीन धंस और तीन बड़े गड्ढे हो गए थे. इनमे से मिथेन गैस के रिसने का खतरा था. जो वायुमंडल में घुल सकती थी. इसे रोकने के लिए एक गड्ढे में आग लगा दी गई. सोचा गया कि गैस खत्म होने पर ये आग अपनेआप बुझ जाएगी. लेकिन ऐसा हो नहीं सका. परन्तु इस से तथ्य अभी उपलब्ध नहीं है.

इस 'नर्क का दरवाजा' (Gateway To Hell) गड्ढे से डरावने 230 फीट चौड़े गड्ढे में आज भी आग धधक रही है, जिसे मीलों दूर से देखा जा सकता है. इसी डरावने वाली वजह से इसे 'गेट्स ऑफ हेल', 'माउथ ऑफ हेल', 'नरक का मुंह', 'नर्क का दरवाजा', Gateway To Hell आदि भी कहा जाता है. हालाँकि समय के साथ इसकी बढ़ती लोकप्रियता के कारण 2018 में इसका आध‍िकारिक नाम तय किया गया. राष्‍ट्रपति ने इसे ‘शाइनिंग ऑफ काराकुम’ नाम दिया.

कैसे बना 'नर्क का दरवाजा' एक चर्चित टूरिस्‍ट प्‍लेस ? | 'Gateways of Hell' a great tourist place!


समय के साथ धीरे-धीरे दुनियाभर में इसकी चर्चा होने लगी और यह गड्ढ़ा तुर्कमेनिस्तान के सबसे चर्चित और आकर्षित करने वाले टूरिस्‍ट प्‍लेस में शामिल हो गया. प्रत्येक वर्ष इसे देखने के लिए हजारों पर्यटक आते हैं और इसकी तस्‍वीरों को लेना नहीं भूलते. यह 'नर्क का दरवाजा' (Gateway To Hell) अपनी लोकेशन से कई किलोमीटर दूर से ही यह गड्ढा नजर आने आने लगता है. 

'नरक का दरवाजा' (Gateway To Hell) पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहा है (Gates of Hell Place). दुनियाभर से लोग इसे देखने आते हैं. मुंह', 'नर्क का दरवाजा'? आदि भी कहा जाता है. हालाँकि समय के साथ इसकी बढ़ती लोकप्रियता के कारण 2018 में इसका आध‍िकारिक नाम तय किया गया, राष्‍ट्रपति ने इसे ‘शाइनिंग ऑफ काराकुम’ नाम दिया.

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