Lohri 2022 : आखिर क्यों मनाई जाती है लोहड़ी पर्व? क्या है लोहड़ी पर्व का इतिहास | Lohri Festival Significance and History in Hindi

Lohri 2022 : लोहड़ी का त्यौहार कब और क्यों मनाया जाता है? जानिये, लोहड़ी पर्व से जुडी इतिहास और इसका महत्व | Lohri Festival Significance and History in Hindi


लोहड़ी उत्तर भारत का एक लोकप्रिय त्योहार है. इसे खास तौर पर पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में मकर संक्रांति की पूर्व संध्या पर नई फसल के उत्सव के रूप में मनाया जाता है. आज लोहड़ी का त्योहार पूरे उत्साह और उमंग के साथ पूरे देश में मनाया जा रहा है. खुशियों की सौगात देने वाला ये त्योहार हर किसी को बहुत पसंद होता है. लोहड़ी का पावन पर्व हर साल मकर संक्रांति से ठीक एक दिन पहले मनाया जाता है. लोहड़ी मनाने वाले किसान इस दिन को अपने लिए नए साल की शुरुआत मानते हैं.


आपने लोहड़ी तो खूब मनाई होगी या फिर लोहड़ी त्यौहार के बारे में जरू सुना होगा. लेकिन क्या आप जानते हैं क्यों मनाई जाती है लोहड़ी. बहुत से लोग लोहड़ी को साल का सबसे छोटा दिन और रात सबसे लंबी के तौर पर मनाते हैं. लोहड़ी को लेकर कई कहानियां भी प्रचलित हैं जिन्हें लोहड़ी के दिन खासतौर पर सुना जाता है जैसे दुल्ला भट्टी की कहानी, होलिका और लोहड़ी की कहानी आदि. इस लेख में हम लोहड़ी त्यौहार से जुडी सवालो और उनसे जुड़े जवाबो को जानेंगे. इस लेख में हम लोहड़ी त्यौहार क्या है?, लोहड़ी का त्यौहार क्यों मनाया जाता है?, लोहड़ी त्यौहार से जुडी पौराणिक कहानिया क्या है?, लोहड़ी त्यौहार का इतिहास क्या है?, लोहड़ी का पर्व कैसे मनाते है?, लोहड़ी पर्व का महत्व क्या है? आदि के बारे में जानेंगे


लोहड़ी के त्यौहार क्यों मनाया जाता है ? | लोहड़ी त्यौहार से जुडी कहानी | Why is the festival of Lohri celebrated in Hindi?
लोहड़ी पर्व | Lohri Festival


लोहड़ी पर्व | Lohri Festival


लोहड़ी उत्तर भारत का एक लोकप्रिय त्योहार है. इसे खास तौर पर पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में मकर संक्रांति की पूर्व संध्या पर नई फसल के उत्सव के रूप में मनाया जाता है. आज लोहड़ी का त्योहार पूरे उत्साह और उमंग के साथ पूरे देश में मनाया जा रहा है. खुशियों की सौगात देने वाला ये त्योहार हर किसी को बहुत पसंद होता है. लोहड़ी का पावन पर्व हर साल मकर संक्रांति से ठीक एक दिन पहले मनाया जाता है. यह पर्व देश के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग नाम से भी मनाया जाता है. लोहड़ी मनाने वाले किसान इस दिन को अपने लिए नए साल की शुरुआत मानते हैं.


लोहड़ी पंजाबी और हरियाणवी लोग बहुत उल्लास से मनाते हैं. यह देश के उत्तर प्रान्त में ज्यादा मनाया जाता हैं. इन दिनों पुरे देश में पतंगों का ताता लगा रहता हैं. लोहड़ी की संध्या पर सभी एक साथ त्योहार को मनाते हैं. इस दौरान सभी जमकर लोहड़ी के गीत भी गाते हैं और खुशियों को मनाते हैं. लोहड़ी की रात खुली जगह पर आग जलाई जाती है. लोग लोकगीत गाते हुए नए धान के लावे के साथ खील, मक्का, गुड़, रेवड़ी, मूंगफली आदि उस आग को अर्पित कर परिक्रमा करते हैं. लोहड़ी मनाने वाले किसान इस दिन को अपने लिए नए साल की शुरुआत मानते हैं. किसान इस मौके पर फसल की पूजा भी करते हैं. गन्ने की कटाई के बाद उससे बने गुड़ को इस त्योहार में इस्तेमाल किया जाता है. हालांकि पुरे देश में भिन्न-भिन्न मान्यताओं के साथ लोहड़ी त्यौहार का आनंद लिया जाता हैं. 


पंजाबी समाज में इस पर्व की तैयारी कई दिनों पहले ही शुरू हो जाती है. इसका संबंध मन्नत से जोड़ा गया है अर्थात जिस घर में नई बहू आई होती है या घर में संतान का जन्म हुआ होता है, तो उस परिवार की ओर से खुशी बांटते हुए लोहड़ी मनाई जाती है. सगे-संबंधी और रिश्तेदार उन्हें इस दिन विशेष सौगात के साथ बधाइयां भी देते हैं.


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लोहड़ी का त्यौहार क्या है ? | What is the festival of Lohri in Hindi?


मकर संक्रांति से पहले वाली रात को सूर्यास्त के बाद मनाया जाने वाला पर्व है लोहड़ी. लोहड़ी का अर्थ है - ल (लकड़ी)+ ओह (गोहा यानी सूखे उपले)+ ड़ी (रेवड़ी). इस पर्व के 20-25 दिन पहले ही लोग 'लोहड़ी' के लोकगीत गा-गाकर लकड़ी और उपले इकट्ठे करते हैं. फिर इकट्‍ठी की गई सामग्री को ‍चौराहे/मुहले के किसी खुले स्थान पर आग जलाते हैं. इस उत्सव को पंजाबी समाज बहुत ही जोशो-खरोश से मनाता है. गोबर के उपलों की माला बनाकर मन्नत पूरी होने की खुशी में लोहड़ी के समय जलती हुई अग्नि में उन्हें भेंट किया जाता है. इसे 'चर्खा चढ़ाना' कहते हैं.


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लोहड़ी के त्यौहार क्यों मनाया जाता है ? | लोहड़ी त्यौहार से जुडी कहानी | Why is the festival of Lohri celebrated in Hindi? 


पुराणों के अनुसार लोहड़ी को सती के त्याग के रूप में प्रतिवर्ष मनाया जाता हैं. कथानुसार जब प्रजापति दक्ष ने अपनी पुत्री सती के पति महादेव शिव का तिरस्कार किया था और अपने जामाता को यज्ञ में शामिल ना करने से उनकी पुत्री ने अपनी आपको को अग्नि में समर्पित कर दिया था. उसी दिन को एक पश्चाताप के रूप में प्रति वर्ष लोहड़ी पर मनाया जाता हैं और इसी कारण घर की विवाहित बेटी को इस दिन तोहफे दिये जाते हैं और भोजन पर आमंत्रित कर उसका मान सम्मान किया जाता हैं. इसी ख़ुशी में श्रृंगार का सामान सभी विवाहित महिलाओ को बाँटा जाता हैं.


लोहड़ी त्यौहार मनाने के पीछे एक और एतिहासिक कथा भी हैं जिसे दुल्ला भट्टी के नाम से जाना जाता हैं. यह कथा अकबर के शासनकाल की हैं उन दिनों दुल्ला भट्टी पंजाब प्रान्त का सरदार था, इसे पंजाब का नायक कहा जाता था. उन दिनों संदलबार नामक एक जगह थी, जो अब पाकिस्तान का हिस्सा हैं. वहाँ लड़कियों की बाजारों में बोली लगाईं जाती थी. तब दुल्ला भट्टी ने इस का विरोध किया और लड़कियों को सम्मानपूर्वक इस दुष्कर्म से बचाया और उनकी शादी करवाकर उन्हें सम्मानित जीवन दिया. इस विजय के दिन को लोहड़ी के गीतों में गाया जाता हैं और दुल्ला भट्टी को याद किया जाता हैं.


इस लोहड़ी त्यौहार को पंजाब में फसल काटने के दौरान मनाया जाता है. फसल काटने के बाद किसानों की आमदनी होती और इनके घर में खुशियां आती हैं. पारंपरिक मान्यता के अनुसार, लोहड़ी फसल की कटाई और बुआई के तौर पर मनाई जाती है. लोहड़ी को लेकर एक मान्यता ये भी है कि इस दिन लोहड़ी का जन्म होलिका की बहन के रूप में हुआ था. बेशक होलिका का दहन हो गया था. किसान लोहड़ी के दिन को नए साल की आर्थिक शुरुआत के रूप में भी मनाते हैं.


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कैसे मनाया जाता हैं लोहड़ी का पर्व ? | How Lohri Festival is celebrated in Hindi?


पंजाबियों के विशेष त्यौहार हैं लोहड़ी जिसे वे धूमधाम से मनाते हैं. नाच, गाना और ढोल तो पंजाबियों की शान होते हैं और इसके बिना इनके त्यौहार अधूरे हैं. लोहड़ी मनाने के लिए लकड़ियों की ढेरी पर सूखे उपले भी रखे जाते हैं. समूह के साथ लोहड़ी पूजन करने के बाद उसमें तिल, गुड़, रेवड़ी एवं मूंगफली का भोग लगाया जाता है. इस अवसर पर ढोल की थाप के साथ गिद्दा और भांगड़ा नृत्य विशेष आकर्षण का केंद्र होते हैं.


लोहड़ी आने के कई दिनों पहले ही युवा एवम बच्चे लोहड़ी के गीत गाते हैं. पन्द्रह दिनों पहले यह गीत गाना शुरू कर दिया जाता हैं जिन्हें घर-घर जाकर गया जाता हैं. इन गीतों में वीर शहीदों को याद किया जाता हैं जिनमे दुल्ला भट्टी के नाम विशेष रूप से लिया जाता हैं.


पंजाबी समाज में इस पर्व की तैयारी कई दिनों पहले ही शुरू हो जाती है. इसका संबंध मन्नत से जोड़ा गया है अर्थात जिस घर में नई बहू आई होती है या घर में संतान का जन्म हुआ होता है, तो उस परिवार की ओर से खुशी बांटते हुए लोहड़ी मनाई जाती है. सगे-संबंधी और रिश्तेदार उन्हें इस दिन विशेष सौगात के साथ बधाइयां भी देते हैं.


किसान इन दिनों बहुत उत्साह से अपनी फसल घर लाते हैं और उत्सव मनाते हैं. लोहड़ी को पंजाब प्रान्त में किसान नव वर्ष के रूप में मनाते हैं. यह पर्व पंजाबी और हरियाणवी लोग ज्यादा मनाते हैं और यही इस दिन को नव वर्ष के रूप में भी मनाते हैं.


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लोहड़ी पर्व से जुडी महत्वपूर्ण रोचक तथा अनसुने किस्से 


  • पंजाब में लोहड़ी का त्योहार दुल्ला भट्टी से जोड़कर मनाया जाता है. मुगल शासक अकबर के समय में दुल्ला भट्टी पंजाब में गरीबों के मददगार माने जाते थे. उस समय लड़कियों को गुलामी के लिए अमीरों को बेच दिया जाता था. कहा जाता है कि दुल्ला भट्टी ने ऐसी बहुत सी लड़कियों को मुक्त कराया और उनकी फिर शादी कराई.
  • लोहड़ी त्योहार के पीछे धार्मिक आस्थाएं भी जुड़ी हुई हैं. लोहड़ी पर आग जलाने को लेकर मान्यता है कि यह आग राजा दक्ष की पुत्री सती की याद में जलाई जाती है.
  • बहुत से लोगों का मानना है कि लोहड़ी का नाम संत कबीर की पत्नी लोही के नाम पर पड़ा. पंजाब के कुछ ग्रामीण इलाकों में इसे लोई भी कहा जाता है.
  • लोहड़ी को पहले कई जगहों पर लोह भी बोला जाता था. लोह का मतलब होता है लोहा. इसे त्योहार से जोड़ने के पीछे बताया जाता है कि फसल कटने के बाद उससे मिले अनाज की रोटियां तवे पर सेकी जाती हैं. तवा लोहे का होता है. इस तरह फसल के उत्सव के रूप में मनाई जाने वाली लोहड़ी का नाम लोहे से पड़ा.
  • पौराणिक कथाओं में बताया गया है कि लोहड़ी होलिका की बहन थीं. लोहड़ी अच्छी प्रवृत्ति वाली थीं. इसलिए उनकी पूजा होती है और उन्हीं के नाम पर त्योहार मनाया जाता है.
  • कई स्थानों पर लोहड़ी को तिलोड़ी के तौर पर भी जाना जाता था. यह शब्द तिल और रोड़ी यानी गुड़ से मिलकर बना है. बाद में तिलोड़ी को ही लोहड़ी कहा जाने लगा.


लोहड़ी पर्व से जुडी सवाल और उनके जवाब | Frequently asked questions about Lohri in Hindi


लोहड़ी का त्यौहार कौन मनाता है ?

लोहड़ी का त्यौहार पुरे देश में मनाया जाता है. विशेष रूप से पंजाब में इसे बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है.


जानें क्यों लोहड़ी के त्यौहार में अग्नि में अन्न डाला जाता है? 

लोहड़ी के त्यौहार को वसंत ऋतु के आगमन के तौर पर भी मनाया जाता है. इसलिए रबी की फसलों से उपजे अन्न को अग्नि में समर्पित करते हैं, नई फसलों का भोग लगाकर देवताओं से धन और संपन्नता की प्रार्थना करते हैं.


लोहड़ी का अर्थ क्या है ?

लोहड़ी का अर्थ है - ल (लकड़ी)+ ओह (गोहा यानी सूखे उपले)+ ड़ी (रेवड़ी).


'चर्खा चढ़ाना' किसे कहते है ?

गोबर के उपलों की माला बनाकर मन्नत पूरी होने की खुशी में लोहड़ी के समय जलती हुई अग्नि में उन्हें भेंट किया जाता है. इसे 'चर्खा चढ़ाना' कहते हैं.


लोहड़ी की आग में क्या डाला जाता है ?

यह त्योहार आग जलाकर खासतौर पर शाम को मनाया जाता है इस दौरान लोग लोहड़ी की आग में गुड़, तिल, रेवड़ी गजक, रेवड़ी, पॉपकॉर्न आदि डालते हैं.


लोहड़ी क्यों मनाया जाता है ?

नई फसल की शुरुआत के लिए


लोहड़ी में क्या करते हैं ?

गीत गए जाते हैं, खेल खेले जाते हैं.


लोहड़ी में किसकी पूजा की जाती है ?

लोहड़ी में लोहड़ी माता जी की पूजा की जाती है ?


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