Jagannath Puri Temple Rahasya: जानिए विज्ञान को भी चुनौती देते जगन्नाथ मंदिर से जुड़े खास रहस्य, जिसे देखकर दुनिया भी है हैरान

Jagannath Puri Temple Miracle Rahasya in Hindi: जाने जगन्नाथ मंदिर से जुड़े अद्भुत रहस्य, जिसे आज तक वैज्ञानिक भी समझ नहीं पाए | Amazing secrets about Jagannath Puri Temple in Hindi

ॐ नमोः भगवते वासुदेवाय नमः

जगन्नाथ मंदिर भगवान श्रीकृष्ण उनके भाई बालभद्र और बहन सुभद्रा के लिए विश्व प्रसिद्द है. यह मंदिर ओडिसा के पूरी में स्थित है. पुरी के इस मंदिर में भगवान जगन्नाथ (श्रीकृष्णा), उनके भाई बालभद्र और बहन सुभद्रा की काठ की मूर्तियां हैं. लकड़ी की मूर्तियों वाला ये देश का अनोखा मंदिर है. जगन्नाथ मंदिर की ऐसी तमाम विशेषताएं हैं, साथ ही मंदिर से जुड़ी ऐसी कई कहानियां हैं जो सदियों से रहस्य बनी हुई हैं. जगन्नाथपुरी का यह मंदिर है, ना सिर्फ इंसान के समझ बल्कि विज्ञान को भी मात देता है. 

जगन्नाथ पुरी मंदिर ना सिर्फ भारत में बल्कि यह विश्व प्रसिद्द है. जगन्नाथ पुरी मंदिर के भव्यता और चमत्कारों से शायद ही कोई अनभिज्ञ होगा. जगन्नाथपुरी मंदिर में कई ऐसे रहस्य हैं जिन्हें सुनकर बड़ी हैरत होती है. जिन्हे आजतक वैज्ञानिक भी समझ नहीं पाए है. आज हम इस लेख में धरती के बैकुंठ जगन्नाथ पुरी मंदिर के बारे में देखेंगे, जगन्नाथ पुरी मंदिर से जुडी अनोखे चमत्कार को जानेंगे. आइये जानते है जगन्नाथ पुरी मंदिर से जुड़ी वो बातें जो सैकड़ों साल से बनी हुई हैं रहस्य!
श्री जगन्नाथ पूरी मंदिर | Shree Jagannath Puri Temple
श्री जगन्नाथ पूरी मंदिर | Shree Jagannath Puri Temple

जगन्नाथ पूरी मंदिर | Jagannath Puri Temple


पुराणों के अनुसार भगवान विष्णु के चार धाम बदरीनाथ, द्वारिका, रामेश्वरम और पुरी है. जो की जग प्रसिद्द है. माना जाता है कि जब भी भगवान विष्णु अपने चारों धामों की यात्रा पर जाते हैं, तब सबसे पहले हिमालय की ऊंची चोटियों पर बने अपने धाम बद्रीनाथ में स्नान करते हैं. पश्चिम में गुजरात के द्वारिका में वस्त्र पहनते हैं. ओडिशा के पुरी में भोजन करते हैं और फिर अंत में दक्षिण में तमिलनाडु के रामेश्‍वरम में विश्राम करते हैं. 

द्वापर युग के बाद भगवान श्री कृष्ण पुरी में निवास करने लगे और कहलाने लगे जग के नाथ अर्थात जगन्नाथ. पुरी का जगन्नाथ धाम चार धामों में से एक है. यहां भगवान जगन्नाथ बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ विराजते हैं. जगन्नाथ पुरी के इस स्थान को शाकक्षेत्र, नीलांचल तथा नीलगिरि भी कहा जाता है. बद्रीनाथ धाम को जहां जगत के पालनहार भगवान विष्णु का आंठवां बैकुंठ माना जाता है, वहीं जगन्नाथ धाम को भी धरती के बैकुंठ स्वरूप माना गया है.

जगन्नाथ मंदिर भगवान श्रीकृष्ण उनके भाई भगवान बालभद्र और बहन देवी सुभद्रा के लिए विश्व प्रसिद्द है. यह मंदिर ओडिसा के पूरी में स्थित है. पुरी के इस मंदिर में भगवान जगन्नाथ (श्रीकृष्णा), उनके भाई बालभद्र और बहन सुभद्रा की मूर्तियां हैं. ये मूर्तियां मिट्टी या पत्थर की नहीं हैं बल्कि यह चन्दन की लकड़ी से बनी हुई हैं. लकड़ी की मूर्तियों वाला ये देश का अकेला अनोखा मंदिर है, जो की आज भी लोगो के समझ और विज्ञान से परे है. 

श्री जगन्नाथ पूरी मंदिर | Shree Jagannath Puri Temple
श्री जगन्नाथ पूरी मंदिर | Shree Jagannath Puri Temple


जगन्नाथ पूरी मंदिर के रहस्य | Secrets of Jagannath Puri Temple in Hindi


श्रीकृष्ण का हृदय | Shree Krishna Heart


मंदिर से जुड़ी एक मान्यता है कि जब भगवान कृष्ण ने अपनी देह का त्याग किया तथा उनका अंतिम संस्कार किया गया तो शरीर के एक हिस्से को छोड़कर उनकी पूरी देह पंचतत्व में विलीन हो गई. मान्यता है कि भगवान कृष्ण का हृदय एक जिंदा इंसान की तरह ही धड़कता रहा. कहते हैं कि वो दिल आज भी सुरक्षित है और भगवान जगन्नाथ की लकड़ी की मूर्ति के अंदर है.

12 साल में बदली जाती हैं मूर्तियां | Idols are changed after every 12 years


जगन्नाथ पुरी मंदिर की तीनों मूर्तियां प्रत्येक 12 वर्ष में बदली जाती हैं. यह मूर्ति मिट्टी या पत्थर की नहीं हैं बल्कि यह चन्दन की लकड़ी से बनी हुई हैं. हर 12 साल बाद इन मूर्तियों को बदल दिया जाता है. इन मूर्तियों को हर बारह वर्ष बाद बदले जाने का विधान है, पवित्र वृक्ष की लकड़ियों से पुनः मूर्तियों की प्रतिकृति बना कर फिर से उन्हें एक बड़े आयोजन के साथ प्रतिष्ठित किया जाता है. जिस वक्त मूर्तियां बदली जाती हैं तो पूरे शहर में बिजली काट दी जाती है. मंदिर के आसपास पूरी तरह अंधेरा कर दिया जाता है. मंदिर के बाहर सीआरपीएफ की सुरक्षा तैनात कर दी जाती है. मंदिर में किसी की भी एंट्री पर पाबंदी होती है. सिर्फ उसी पुजारी को मंदिर के अंदर जाने की इजाजत होती है जिन्हें मूर्तियां बदलनी होती हैं. पुजारी की आंखों पर भी पट्टी बांधी जाती है. हाथों में ग्लव्स पहनाए जाते हैं. इसके बाद मूर्तियां बदलने की प्रक्रिया शुरू होती है. पुरानी मूर्तियों की जगह नई मूर्तियां लगा दी जाती हैं, लेकिन एक ऐसी चीज है जो कभी नहीं बदली जाती, इसे ब्रह्म पदार्थ कहते है. ब्रह्म पदार्थ को पुरानी मूर्ति से निकालकर नई मूर्ति में डाला जाता है.

क्या है ब्रह्म पदार्थ? | What is Brahma substance in Hindi?


ब्रह्म पदार्थ क्या है, इसके बारे में अभी तक कोई जानकारी किसी के पास नहीं है. बस कुछ किस्से हैं जो मूर्ति बदलने वाले पुजारियों से सुनने को मिले हैं. ये ब्रह्म पदार्थ प्रत्येक १२ वर्ष में पुरानी मूर्ति से नई मूर्ति में बदल दिया जाता है, परन्तु मूर्ति बदलने वाले पुजारी को भी नहीं पता होता है कि वो क्या है. माना जाता है कि इस ब्रह्म पदार्थ को अगर किसी ने देख लिया तो उसकी मौत हो जाएगी. 

एक किस्सा ये है कि इस ब्रह्म पदार्थ को हमेशा श्रीकृष्ण से जोड़कर देखा जाता है. मूर्ति बदलने वाले कुछ पुजारियों ने बताया है कि जब ब्रह्म पदार्थ पुरानी मूर्ति से निकालकर नई मूर्ति में डालते हैं तो हाथों से ही ऐसा किया जाता है, उस वक्त ऐसा लगता है कि हाथों में कुछ उछल रहा है, जैसे खरगोश उछल रहा हो, कोई ऐसी चीज है जिसमें जान है. क्योंकि हाथों में दस्ताने होते हैं इसलिए उस पदार्थ के बारे में ज्यादा एहसास नहीं हो पाता है. यानी ब्रह्म पदार्थ के किसी जीवित पदार्थ होने की कहानियां जरूर हैं, लेकिन इसकी हकीकत क्या है, यह कोई नहीं जानता. 

श्री जगन्नाथ पूरी मंदिर | Shree Jagannath Puri Temple
श्री जगन्नाथ पूरी मंदिर | Shree Jagannath Puri Temple

हवा की दिशा - हवा का रुख उल्टा है पूरी में | Wind direction - Wind direction is reversed


सामान्य दिनों के समय हवा समुद्र से जमीन की तरफ आती है और शाम के दौरान इसके विपरीत, लेकिन पुरी में इसका उल्टा होता है. अधिकतर समुद्री तटों पर आमतौर पर हवा समुद्र से जमीन की ओर आती है, लेकिन यहां हवा जमीन से समुद्र की ओर जाती है.

अक्सर समुद्री इलाकों में हवा का रुख दिन के समय समुद्र से धरती की तरफ होता है जब कि शाम को उसका रुख बदल जाता है वह धरती से समुद्र की ओर बहने लगती है, परन्तु यहां भगवान जगन्नाथ की माया इसे उल्टा कर देती है और दिन में धरती से समुद्र की ओर व शाम को हवा समुद्र से मंदिर की ओर बहती है यानि धरती की ओर हवा का बहाव होता है.

शिखर की ध्वजा - हवा के विपरीत लहराती है | Pinnacle flag - Flutters against the wind


मंदिर के शिखर पर स्थित ध्वज हमेशा हवा की विपरीत दिशा में लहराता है. ऐसा क्यों होता है यह आज भी एक रहस्य ही बना हुआ है. एक और अद्भुत बात इस ध्वज से जुड़ी है वह यह कि इसे हर रोज बदला जाता है और बदलने वाला भी उल्टा चढ़कर ध्वजा तक पंहुचता है. मान्यता है कि अगर किसी दिन झंडे को नहीं बदला गया तो शायद मंदिर अगले 18 सालों के लिए बंद हो जाएगा. 

मंदिर का शिखर - नहीं उड़ता है कोई पक्षी और विमान | Temple peak - No bird or plane does fly


आमतौर पर किसी मंदिर, मस्जिद या बड़ी इमारत पर पक्षियों को बैठे हुए देखा जाता है. लेकिन जगन्नाथ मंदिर के ऊपर से कभी किसी पक्षी को उड़ते हुए नहीं देखा गया. आजतक कोई पक्षी मंदिर परिसर में बैठे हुए दिखाई नहीं दिया. यही वजह है कि मंदिर के ऊपर से हवाई जहाज, हेलिकॉप्टर के उड़ने पर भी मनाही है.

सिंहद्वार का रहस्य - नहीं सुनाई देती लहरों की आवाज | The secret of the lion door - The sound of ocean waves cannot be heard


जगन्नाथ पुरी मंदिर समुद्र के किनारे पर स्थित है. मंदिर में एक सिंहद्वार है. कहा जाता है कि जब तक सिंहद्वार में कदम अंदर नहीं जाता तब तक समंदर की लहरों की आवाज सुनाई देती है, लेकिन जैसे ही सिंहद्वार के अंदर कदम जाता है लहरों की आवाज सुनाई देना अचानक बंद हो जाती है. इसी तरह सिंहद्वार से निकलते वक्त वापसी में जैसे ही पहला कदम बाहर निकलता है, समंदर की लहरों की आवाज फिर आने लगती है. विशेषकर शाम के समय आप इस अद्भुत अनुभव को बहुत स्पष्ट रूप से महसूस कर सकते हैं. 

इसी तरह मंदिर के बाहर स्वर्ग द्वार है, जहां पर मोक्ष प्राप्ति के लिए शव जलाए जाते हैं, लेकिन जब आप मंदिर से बाहर निकलेंगे तभी आपको लाशों के जलने की गंध महसूस होगी.

विज्ञान को चुनौती - नहीं पड़ती है शिखर की परछाई | Challenge to science - The shadow of the temple summit does not fall on ground


विज्ञान के अनुसार यदि किसी वस्तु पर भी रोशनी पड़ेगी, तो उसकी छाया बनेगी जरुर, भले ही आकार में छोटी या बड़ी बने. लेकिन भगवान जगन्नाथ पूरी के मंदिर का ऊपरी हिस्सा विज्ञान के इस नियम को चुनौती देता है क्योंकि दिन के किसी भी समय इसकी परछाई नजर नहीं आती.

जगन्नाथ पूरी का मंदिर दुनिया के सबसे भव्य और ऊँचे मंदिरो में से एक है. यह मंदिर 4 लाख वर्गफुट में क्षेत्र में फैला है और इसकी ऊंचाई लगभग 214 फुट है. मंदिर के पास खड़े रहकर इसका गुंबद देख पाना असंभव है. मंदिर की ऊंचाई इतनी होने के बावजूद इसके शिखर की छाया दिन के किसी भी समय अदृश्य ही रहती है.

चमत्कारिक सुदर्शन चक्र - हर जगह से दिखता है सीधा | The wondrous Sudarshan Chakra - visible like front facing from everywhere


जगन्नाथ मंदिर के शिखर पर ही अष्टधातु निर्मित सुदर्शन चक्र है. इस चक्र को नीलचक्र भी कहा जाता है, और मान्यता के अनुसार इसके दर्शन करना बहुत ही शुभ माना जाता है. इसकी खासियत यह है कि यदि आप किसी भी कोने से खड़े होकर किसी भी दिशा से इस चक्र को देखेंगें तो वह हमेशा आपके सामने बिल्कुल सीधा ही नज़र आएगा, वह आपको सदैव अपने सामने ही लगा दिखेगा.

मंदिर की रसोई का रहस्य - भोजन ना तो कम पड़ती है ना ही व्यर्थ होती है | The secret of the temple kitchen - food is neither scarce nor wasted


माना जाता है कि श्री जगन्नाथ पूरी मंदिर में दुनिया की सबसे बड़ी रसोई है. इस रसोई में एक साथ 500 के करीब रसोइये और 300 के आस-पास उनके सहयोगी काम करते हैं. इस रसोई से जुड़ा एक रहस्य यह भी है कि यहां चाहे लाखों भक्त आ जाएं कभी प्रसाद कम नहीं पड़ा. लेकिन जैसे ही मंदिर का गेट बंद होने का वक्त आता है प्रसाद अपने आप खत्म हो जाता है. यानी यहां प्रसाद कभी व्यर्थ नहीं होता है. लगभग 20 लाख भक्त यहां भोजन कर सकते हैं. कहा जाता है कि मंदिर में प्रसाद कुछ हजार लोगों के लिए ही क्यों न बनाया गया हो लेकिन इससे लाखों लोगों का पेट भर सकता है. 

यहाँ प्रसाद पकाने के लिए मिटटी के बर्तनों तथा लकड़ी के चूल्हो का ही उपयोग किया जाता है. प्रसाद सात बर्तनों में बनाया जाता है. सातों बर्तन को एक-के ऊपर एक करके एक-साथ रखा जाता है. यानी सातों बर्तन चूल्हे पर एक सीढ़ी की तरह रखे होते हैं. सबसे हैरानी की बात ये है कि जो बर्तन सबसे ऊपर यानी सातवें नंबर का बर्तन होता है उसमें सबसे पहले प्रसाद बनकर तैयार होता है. इसके बाद छठे, पांचवे, चौथे, तीसरे, दूसरे और पहले यानी सबसे नीचे के बर्तन का प्रसाद तैयार होता है.

श्री जगन्नाथ पूरी मंदिर | Shree Jagannath Puri Temple
श्री जगन्नाथ पूरी मंदिर | Shree Jagannath Puri Temple

जगन्नाथ पूरी मंदिर के बारे में कुछ महत्वपूर्ण रोचक जानकारी | Some interesting information about Jagannath Puri Temple


  • हनुमानजी करते हैं जगन्नाथ की समुद्र से रक्षा करते के लिए नियुक्त किये गए है. माना जाता है कि 3 बार समुद्र ने जगन्नाथजी के मंदिर को तोड़ दिया था. इसलिए भगवान जगन्नाथ ने वीर हनुमानजी को यहां समुद्र को नियंत्रित करने हेतु नियुक्त किया था.
  • माना जाता है की पांच पांडव भी अज्ञातवास के दौरान भगवान जगन्नाथ के दर्शन करने आए थे. श्री जगन्नाथ पूरी मंदिर के अंदर पांडवों का स्थान अब भी मौजूद है. भगवान जगन्नाथ जब चंदन यात्रा करते हैं तो पांच पांडव उनके साथ नरेन्द्र सरोवर जाते हैं.
  • कहते हैं कि ईसा मसीह सिल्क रूट से होते हुए जब कश्मीर आए थे तब पुन: बेथलेहम जाते वक्त उन्होंने भगवान जगन्नाथ के दर्शन किए थे.
  • 9वीं शताब्दी में आदिशंकराचार्य ने यहां की यात्रा की थी और यहां पर उन्होंने चार मठों में से एक गोवर्धन मठ की स्थापना की थी.
  • महान सिख सम्राट महाराजा रणजीत सिंह ने इस मंदिर को प्रचुर मात्रा में स्वर्ण दान किया था, जो कि उनके द्वारा स्वर्ण मंदिर, अमृतसर को दिए गए स्वर्ण से भी कहीं अधिक था. महाराजा रणजीत सिंह ने काशी प्रसिद्द विश्वनाथ मंदिर में भी स्वर्ण दान किया है.
  • जगन्नाथ पुरी मंदिर के प्रभु की मूर्ति मिट्टी या पत्थर की नहीं हैं बल्कि यह चन्दन की लकड़ी से बनी हुई हैं.
  • जगन्नाथ पुरी मंदिर की तीनों मूर्तियां प्रत्येक 12 वर्ष में बदली जाती हैं. परन्तु यह करते वक्त कोई इसे देख नहीं सकता. यहाँ तक की मूर्ति बदलने के लिए आने वाले पुजारी के आँखों पर पट्टी बाँध दी जाती है. हाथों में ग्लव्स पहनाए जाते हैं. जिस वक्त मूर्तियां बदली जाती हैं तो पूरे शहर में बिजली काट दी जाती है. मंदिर के आसपास पूरी तरह अंधेरा कर दिया जाता है. मंदिर के बाहर सीआरपीएफ की सुरक्षा तैनात कर दी जाती है. मंदिर में किसी की भी एंट्री पर पाबंदी होती है. सिर्फ उसी पुजारी को मंदिर के अंदर जाने की इजाजत होती है जिन्हें मूर्तियां बदलनी होती हैं. 
  • विश्‍व की सबसे बड़ी रथयात्रा निकाली जाती है. यह रथयात्रा 5 किलो‍मीटर में फैले पुरुषोत्तम क्षेत्र में ही होती है.
  • जगन्नाथ मंदिर पर 17 बार हमला कर लूटा जा चूका है.
  • जगन्नाथ पूरी मंदिर में गैर-भारतीय धर्म के लोगों का प्रवेश प्रतिबंधित है. माना जाता है कि ये प्रतिबंध कई विदेशियों द्वारा मंदिर और निकटवर्ती क्षेत्रों में घुसपैठ और हमलों के कारण लगाए गए हैं. भूतकाल में मंदिर को क्षति पहुंचाने के लिए बहुत प्रयास किए जाते रहे हैं.

जगन्नाथ पूरी मंदिर से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण सवाल और उनके जवाब | Frequently asked questions about Jagannath Puri Temple in Hindi


जगन्नाथ पूरी मंदिर में किस भगवान की पूजा की जाती है? | Which god is worshiped in Jagannath Puri Temple?
ओडिसा के जगन्नाथ पूरी मंदिर में भगवान जगन्नाथ यानी श्री विष्णु की जाती है. द्वापर युग के पश्चात् यहाँ भगवान श्रीकृष्ण सहित उनके भाई भगवान बालभद्र और बहन देवी सुभद्रा की पूजा की जाती है.

जगन्नाथ मंदिर में किसकी मूर्ति है? | Whose idol is there in Jagannath Temple?
जगन्नाथ मंदिर में भगवान जगन्नाथ, उनके भाई बलभद्र और उनकी बहन सुभद्रा की पूजा की जाती है. मंदिर में भगवान जगन्नाथ की प्रतिमा दाईं तरफ स्थित है. बीच में उनकी बहन सुभद्रा की प्रतिमा है और बIईं तरफ उनके बड़े भाई बलभद्र (बलराम) विराजते हैं.

भगवान जगन्नाथ कौन थे? | Who was Lord Jagannath?
हिंदू धर्म में त्रिदेवों में से एक भगवान विष्णु के अवातार श्री कृष्ण ही भगवान जगन्नाथ है. जगन्नाथ मंदिर ओडिशा राज्य के पुरी शहर में स्थित है, इसलिए इन्हें पुरी के भगवान जगन्नाथ के नाम से जाना जाता है. 

जगन्नाथ मंदिर किसने बनवाया था? | Who built the Jagannath Temple?
जगन्नाथ पूरी मंदिर राजा इंद्रदयुम्न ने बनवाया था. राजा इंद्रदयुम्न मालवा का राजा था जिनके पिता का नाम भारत और माता सुमति था. पुराणों के अनुसार राजा इंद्रदयुम्न को सपने में हुए थे भगवान जगन्नाथ के दर्शन हुए और उनके आशीर्वाद से भक्तिवश राजा इंद्रदयुम्न जगन्नाथ पूरी मंदिर का निर्माण करवाया था.

जगन्नाथ मंदिर किस राज्य में है? | In which state is the Jagannath Temple located?
जगन्नाथ मंदिर ओडिसा राज्य के पूरी में स्थित है.

हर साल जगन्नाथ रथ यात्रा कब निकाली जाती है? | When is Jagannath Rath Yatra taken out every year?
जगन्नाथ रथ यात्रा हर साल के आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथी को निकाली जाती है.

Image Source: Shree Jagannath Temple, Puri, Twitter

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