Saryu Canal National Project Inauguration: जाने ४३ वर्षो में 10 हजार करोड़ की लागत से बनने वाला सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना के बारे में

सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना सुभारम्भ: इंदिरा गाँधी के कार्यकाल वर्ष 1982 में शुरू हुआ सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना, प्रधानमंत्री मोदी द्वारा वर्ष 2021 में किया गया लोकार्पण 

सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना सुभारम्भ प्रधानमंत्री मोदी द्वारा बलरामपुर से की गई. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 11 दिसंबर को उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले में 9,802 करोड़ रुपये से बनी सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना (Saryu Canal National Project) का उद्घाटन किया. इस राष्ट्रीय नहर परियोजना की शुरुआत इंदिरा गाँधी के कार्यकाल वर्ष 1982 में शुरू हुआ था. यह सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना देश की सबसे बड़ी नहर परियोजना है. यह सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना लगभग 10 हजार करोड़ की लागत से तैयार हुई है. इससे उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल के 9 जिलों के 25 लाख से अधिक किसानों को लाभ होगा. 

आज हम इस लेख के माध्यम से सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना (Saryu Canal प्रोजेक्ट) के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त करेंगे. हम यहाँ सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना क्या है इसके बारे में जानेंगे साथ ही इससे जुड़े सवाल जैसे की नहर की लंबाई, इस परियोजना से कौन कौन से नदिया जुडी हुई है? नहर की लंबाई क्या है?, सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना कौन कौन से जिलों के किसानो को लाभान्वित करेगी. इस लेख में हम सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना के इतिहास को पढ़ेंगे. 
सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना | Saryu Canal National Project
सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना | Saryu Canal National Project

सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना | Saryu Canal National Project


सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना सुभारम्भ प्रधानमंत्री मोदी द्वारा बलरामपुर से की गई. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 11 दिसंबर को उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले में 9,802 करोड़ रुपये से बनी सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना (Saryu Canal National Project) का उद्घाटन किया. इस राष्ट्रीय नहर परियोजना की शुरुआत इंदिरा गाँधी के कार्यकाल वर्ष 1982 में शुरू हुआ था. यह सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना देश की सबसे बड़ी नहर परियोजना है. यह सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना लगभग 10 हजार करोड़ की लागत से तैयार हुई है. इससे उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल के 9 जिलों के 25 लाख से अधिक किसानों को लाभ होगा.  

क्या है सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना? | What is Saryu Canal National Project?


सरयू नहर परियोजना के तहत पांच नदियों घाघरा, सरयू, राप्ती, बाणगंगा और रोहिणी को आपस में जोड़ा गया है. इस पर अभी तक कुल 9800 करोड़ रुपये का खर्च हो चुका है. बड़ी नदी के पानी को छोटी नदियों तक पहुंचाने के लिए बैराज बनाए गए हैं. इनसे पांच नहरें निकाली गयी हैं. इन नहरों से बहराइच, श्रावस्ती, गोण्डा, बलरामपुर, बस्ती, सिद्धार्थनगर, संतकबीरनगर, महराजगंज और गोरखपुर के 25 लाख से अधिक किसानों को सिंचाई पहले से बेहतर मिल सकेगी. इससे तराई और पूर्वांचल के 9 जिलों के किसानों को फायदा होगा. उम्मीद है कि अब इन जिलों के किसानों की फसल पानी के अभाव में नहीं सूखेगी, जिस नदी में पानी कम होगा उसे दूसरे नदी के पानी से आपूर्ति कर दिया जाएगा. 


सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना के मुख्य बिंदु | Saryu Canal National Project Main Point


  • 6 हजार 590 किलोमीटर नहरों का जाल बिछाया गया. ये सभी नहरें गांवों से कनेक्ट कर दी गई हैं.
  • घाघरा से सरयू, सरयू से राप्ती, राप्ती को बाणगंगा और बाणगंगा से रोहिणी नदी को जोड़ा गया. पांचों नदियों से पानी लेकर सिंचाई के लिए नहर में छोड़ा जाएगा.
  • नहर का पहला छोर घाघरा और सरयू नदी पर बने बहराइच के सरयू बैराज पर है.
  • सरयू नहर परियोजना उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल के 9 जिलों की पांच नदियों को जोड़ती हैं. इसमें बहराइच, गोंडा, बस्ती, श्रावस्ती, बलरामपुर, संत कबीर नगर, सिद्धार्थनगर, गोरखपुर और महाराजगंज के 25-30 लाख किसानों को लाभ होगा.
  • इस नहर से 14.04 लाख हेक्टेयर भूमि में सिंचाई की सुविधा होगी, साथ ही क्षेत्र के कई बाढ़ संभावित क्षेत्रों में बाढ़ के खतरे को कम किया जा सकेगा.
  • इस परियोजना के तहत सिंचित क्षेत्र 4.04 लाख हेक्टेयर होगा.

सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना के तहत जुड़ी नदियाँ | Rivers connected under Saryu Canal National Project


सरयू नहर परियोजना के तहत पांच नदियों घाघरा, राप्ती, बाणगंगा, सरयू और रोहिणी को जोड़ा गया है.

सरयू नहर परियोजना की कुल लंबाई | Total Length of Saryu Canal Project


इस नहर परियोजना की कुल लंबाई 6,600 किलोमीटर है और इन्हें 318 किलोमीटर लंबी मुख्य नहर से जोड़ा गया है.

सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना इन जिलों से होकर गुजरती है | Saryu Canal National Project passes through these districts


बहराइच, सिद्धार्थनगर, बस्ती, संतकबीर नगर, गोरखपुर, श्रावस्ती, गोंडा, बलरामपुर, महराजगंज


सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना का इतिहास | History of Saryu Canal National Project


सरयू नहर परियोजना को पूरा होने में 4 दशक से अधिक का समय लग गया. वर्ष 1978 में इंदिरा गांधी के कार्यकाल में इसका काम बहराइच जिले से शुरू हुआ था. वर्ष 1978 में बहराइच और गोंडा जिले में सिंचन क्षमता को विस्तार कर वहां के किसानों के हित में घाघरा कैनाल (लेफ्ट बैंक) के नाम से यह परियोजना शुरू हुई थी. 1982-83 में इस परियोजना का विस्तार पूर्वांचल के ट्रांस घाघरा-राप्ती-रोहिणी क्षेत्र में करते हुए नौ और जिलों को भी इसमें शामिल किया गया. फिर भारत सरकार ने इसका नाम बदलकर सरयू नहर परियोजना रख दिया. वर्ष 2012 में इसे राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया गया. 78.68 करोड़ रुपये की लागत से दो जिलों में सिंचाई सुविधा प्रदान करने के लिए 1978 में इस परियोजना को छोटे पैमाने पर शुरू किया गया था, परन्तु इस परियोजना की लागत 2021 तक बढ़कर 9,802 करोड़ रुपये हो गई. और बलरामपुर सहित 9 जिलों को इस परियोजना से जोड़ा गया. 

सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना से लाभ | Benefit from Saryu Canal National Project


इस परियोजना से 14 लाख हेक्टेयर जमीन पर सिंचाई हो सकेगी. सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना से तराई और पूर्वांचल के 9 जिलों के किसानों की खेती पानी की कमी के कारण नहीं सूखेगी. जिस नदी में पानी कम होगा उसमें बड़ी नदी से पानी बैराज के जरिये पहुंचाया जाएगा. फिर नहरों के जरिये पानी खेत तक पहुंच सकेगा. इससे न सिर्फ खरीफ बल्कि रबी की फसल के समय भी पानी की कमी नहीं होगी. मॉनसून के फेल होने की सूरत में भी सिंचाई का भरपूर इंतजाम रहेगा. परियोजना की लंबाई 318 किलोमीटर है, जबकि 6 हजार 590 किलोमीटर में इसके लिंकेज हैं. नदियों को आपस में जोड़ने से बाढ़ जैसी विभीषिका से बचाया जा सकेगा.

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