Adi Guru Shankaracharya: जानिए आदि शंकराचार्य के बारे में, जिनके प्रतिमा का पीएम मोदी ने किया लोकार्पण

आदि शंकराचार्य: जानिए भगवान आद‍ि शंकराचार्य कौन थे, क्या है उनका केदारनाथ से संबंध?

श्री आदि शंकराचार्य का जन्म केरल में कालपी 'काषल' नाम के गांव में हुआ था. श्री आदि शंकराचार्य ने सनातन धर्म के वैभव को पुनः उचाई पर ले जाने के लिए और सम्पूर्ण भारत को एकता के धागे में पिरोने में महत्वपूर्ण योगदान दिया था. आदि शंकराचार्य ने ही सनातन धर्म के प्रसिद्ध चारों धाम और मठों की स्थापना करके सनातन धर्म को प्रचारित किया. 

अंतिम समय में भगवान शंकराचार्य अपने शिष्यों के साथ केदरनाथ के दर्शन करने पहुंचे थे. उनका समाधि स्थल केदारनाथ मन्दिर के पास ही स्थित है. वर्ष 2013 में आये प्राकृतिक आपदा के कारण उनका समाधी स्थल तथा प्रतिमा बहुत क्षतिग्रस्त हो गया था. अतः पीएम नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में 400 करोड़ रुपये से अधिक के पुनर्निमाण कार्यों का लोकार्पण और भगवान आदि शंकराचार्य के प्रतिमा का शिलान्यास हुआ. 

इस लेख में हम भगवान श्री आदि शंकराचार्य से जुड़े तमाम तथ्यों को जानेंगे. जैसे की आदि शंकराचार्य का सम्पूर्ण जीवन गाथा, आदि शंकराचार्य कौन थे?, आदि शंकराचार्य का केदरनाथ से क्या संबंध हैं?, आदि शंकराचार्य का जन्मभूमि क्या है?, आदि शंकराचार्य बचपन में ही कैसे सन्‍यासी बन गए?, उन्हें शंकराचार्य क्यों कहा जाता है?, आदि शंकराचार्य ने किन मठों की स्थापना की थी?, आदि शंकराचार्य कब केदारनाथ आये थे?, आदि शंकराचार्य की मृत्यु कब और कैसे हुई? इत्यादि. आदि शंकराचार्य की प्रतिमा के बारे में भी जानेंगे. 

श्री आदि शंकरचार्य की जीवनगाथा, The Biography of Aadi Shankaracharya
श्री आदि शंकरचार्य की जीवनगाथा
The Biography of Aadi Shankaracharya


श्री आदि शंकरचार्य की जीवनगाथा | The Biography of Aadi Shankaracharya

भारतवर्ष में ऐसे अनेक ऋषि-मुनियो और महात्माओं ने जन्म लिया, जिनका संपूर्ण जीवन एक आदर्श के रूप में देखा जाता है और आज भी लोगों को धर्म की राह पर चलने तथा जीवन में अध्यात्म की प्रेरणा देते है. उन्ही संतो में श्री आदि शंकराचार्य का नाम आता है, जिन्होंने सनातन हिन्दू धर्म को वैश्विक पटल पर पहचान दिलाया. उनका सम्पूर्ण जीवन लोगो को जीवन पथ का मार्ग प्रदर्शित करता है. उनके कार्यो को सदैव इतिहास में सुनहरे अक्षरों से लिखा जायेगा, और सदैव उन्हें नतमस्तक किया जायेगा. 

कब हुआ आदि शंकराचार्य का जन्‍म? | When was Adi Shankaracharya born?

हिंदू मान्यताओं के अनुसार आदि शंकराचार्य का जन्म सन 788 में दक्षिण भारत के केरल में स्थित कालड़ी ग्राम में हुआ था. वहीं आदि शंकराचार्य मृत्यु 820 ईसवीं में हुई थी.


कहां पर हुआ था आदि शंकरचार्य जन्‍म? | Where was Adi Shankaracharya born?

आदि शंकराचार्य का जन्म केरल के कालपी 'काषल' नामक गांव में हुआ था. उनके पिता का नाम शिवगुरु भट्ट और माता का नाम सुभद्रा था. बताया जाता है कि उनके पिता ने शिव की दिनरात उपासना की, तब वह पैदा हुए थे. इसलिए उनका नाम शंकर रखा गया. जब वह तीन साल के थे उनके पिता का निधन हो गया.


बचपन में ही आदि शंकराचार्य कैसे बने सन्‍यासी? | How did Adi Shankaracharya become a sanyasi in his childhood?

इकलौता संतान होने के कारण उनकी माता नहीं चाहती थी की वह सन्यासी बनें. कहा जाता है की एक दिन नदी में एक मगरमच्छ ने उनका पांव पकड़ लिया. शंकर ने मां से कहा कि अगर वह उन्हें सन्यास लेने की अनुमति नहीं देंगी तो मगरमच्छ उन्हें खा जाएगा. जैसे ही उनकी मां ने उन्हें अनुमति दी मगरमच्छ ने उनका पांव छोड़ दिया. 

आदि शंकराचार्य ने मात्र 2 वर्ष की आयु में सारे वेदों, उपनिषद, रामायण, महाभारत को कंठस्थ कर लिया था. शंकराचार्य महज 6 साल की उम्र में ही ये प्रकांड पंडित हो गए थे, और आठ साल की अवस्था में इन्होंने संन्यास ग्रहण कर लिया था. 16 वर्ष की आयु तक उन्होंने 100 से भी ज्यादा ग्रंथों की रचना की. आदि शंकराचार्य ने छोटे उम्र में ही अपने गुरू से ना सिर्फ शास्त्रों का ज्ञान प्राप्त किया, बल्कि कम उम्र में ही उन्होंने ब्रह्मत्व का भी अनुभव कर लिया था.


उन्हें शंकराचार्य क्यों कहा जाने लगा? | How did he come to be called Shankaracharya?

शंकर छोटे उम्र में अपनी माता से आज्ञा प्राप्त कर सन्यासी बन गए थे. परन्तु संन्यासी बनने के पश्चात् भी शंकराचार्य ने अपनी मां का दाह संस्कार किया. समय के साथ शंकर नाम का यह बालक जगद्गगुरु शंकराचार्य कहलाया जाने लगा.


किन कार्यो के लिए याद किये जाते है आदि शंकराचार्य? | For what works Adi Shankaracharya is remembered?

केरल में जन्मे आदि शंकराचार्य 8वीं शताब्दी के भारतीय आध्यात्मिक धर्म गुरू थे. उन्होंने सनातन धर्म के वैभव को पुनः उचाई पर ले जाने के लिए और सम्पूर्ण भारत को एकता के धागे में पिरोने में महत्वपूर्ण योगदान दिया था. उस दौरान उन्होंने भिन्न-भिन्न मतों में बंटे हिंदू धर्मों को जोड़ने का काम उन्होंने किया. श्री आदि शंकराचार्य एक प्रसिद्ध हिन्दू सन्त थे जिन्होंने अद्वैत वेदान्त के ज्ञान के प्रसार के लिये दूर-दूर तक यात्राये कीं. इन्होंने अनेक विधर्मियों को भी अपने धर्म में दीक्षित किया था. आदि शंकराचार्य ने कई ग्रंथो की रचना की. इन्होंने ब्रह्मसूत्रों की बड़ी ही विशद और रोचक व्याख्या की है. आदि शंकराचार्य ने ही सनातन धर्म के प्रसिद्ध चारों धाम और भारतवर्ष में चार कोनों में चार मठों की स्थापना करके सनातन धर्म को प्रचारित किया. वैशाख मास के शुक्लपक्ष की पंचमी तिथि को आदि शंकराचार्य जयंती मनायी जाती है.


आदि शंकराचार्य ने किन मठों की स्थापना की? | Which mathas was founded by Adi Shankaracharya?

आदि शंकराचार्य ने चार मठों की स्थापना की 

थी. इन मठों की स्थापना करने के पीछे आदि शंकराचार्य का उद्देश्य समस्त भारत के एक धागे में पिरोना था. चारों मठ भारत की चार दिशाओं में स्थित है. उत्तर दिशा में उत्तराखंड में उन्होंने बद्रिकाश्रम में ज्योर्तिमठ ( ज्योतिष्पीठ ) की स्थापना की. पश्‍चिम दिशा में गुजरात के द्वारिका में शारदामठ की स्थापना की. दक्षिण में रामेश्वरम में उन्होंने श्रंगेरी मठ की स्थापना की. पूर्व दिशा में उड़ीसा के जगन्नाथ पुरी में गोवर्धन मठ की स्थापना की.


कैसे हुए आदि शंकराचार्य अंतर्ध्यान? | How did Adi Shankaracharya become introspective?

कहा जाता है की जब आदि शंकराचार्य लगा की उनके कार्य पूरे हो गए जिस उद्देश्य से उनका जन्म हुआ था. वे अपने शिष्यों के साथ केदारनाथ में दर्शन करने पहुंचे. यहां उन्होंने शिष्यों के साथ भगवान के दर्शन किए. उन्होंने भगवन शंकर से प्रणाम किया और जीवन चक्र ख़तम करने की अनुमति ली. आदि शंकराचार्य मंदिर से बाहर आए, शिष्यों को रोका और कहा कि पीछे मुड़कर मत देखना. आदि शंकराचार्य यहां विलुप्त हो गए. 

 

शंकराचार्य के समाधि स्थल का लोकार्पण | Shankaracharya's Samadhi Sthal inaugurated

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार, ५ नवंबर २०२१ को भगवान शिव के धाम केदारनाथ में आदि गुरु शंकराचार्य की प्रतिमा का अनावरण किया, जो 2013 की प्राकृतिक आपदा में क्षतिग्रस्त हो गया था. आदि गुरु शंकराचार्य की प्रतिमा 13 फीट लंबी है और इसका वजन 35 टन है. साथ ही उन्होंने अन्य विकास कार्यो शिलान्यास भी किया. 


यह भी पढ़े 

National Unity Day: राष्ट्रीय एकता दिवस कब और क्यों मनाया जाता हैं? 

Diwali: दिवाली क्यों मनाई जाती है?

Navratri: जानिए वर्ष में 2 बार नवरात्री क्यों मनाया जाता है?

Ganesh Utsav: जानिए गणपति क्यों बिठाया जाता है?, जाने गणेश चतुर्थी क्यों मनाया जाता है?

Dahi Handi: दही हांडी क्यों मनाया जाता है? 

Krishna Janmashtami: श्रीकृष्‍ण जन्‍माष्‍टमी पर्व क्यों मनाया जाता है? 

एक टिप्पणी भेजें

और नया पुराने