Dev Deepawali 2021: कब और क्यों मनाई जाती है देव दीपावली? जानिए देव दीपावली पूजा विधि और महत्व...

Dev Deepawali: कार्तिक पूर्णिमा के दिन ही क्यों मनाया जाता है देव दिवाली का त्योहार? जाने देव दीपावली का महत्व | Know Why Dev Deepawali is celebrated in Hindi?

देव दीपावली त्यौहार के नाम से ही जान पड़ता है की यह देवताओ की दिवाली है. देव दीपावली सदैव दीपावली से 15 दिन बाद मनाई जाती है. जैसा की हम जानते है की कार्तिक महीने में 3 दिवाली आती हैं. कार्तिक मास की कृष्ण चतुर्दशी को छोटी दीपावली, जिसे नरक चतुर्दशी भी कहा जाता हैं. इसके बाद कार्तिक महीने के अमावस्या को बड़ी दीपावली मनाते हैं, तथा कार्तिक पूर्णिमा को देव दीपावली मनाते हैं.

कार्तिक अमावस्या के दिन दीपावली का त्योहार मनाया जाता है. दीपावली से ठीक 15 दिन बाद ही कार्तिक पूर्णिमा के दिन देव दीपावली मनाई जाती है. देव दीपावली के दिन भगवान विष्णु और मां गंगा की पूजा की जाती है, साथ ही इस दिन नदी स्नान खासकर गंगा स्नान और दीपदान का भी विशेष महत्व है. इस वर्ष यानी वर्ष 2021 में देव दीपावली शुक्रवार, 19 नवंबर 2021 को है.

आज हम इस लेख में "देव दीपावली क्यों मनाई जाती है?" तथा "देव दीपावली कब मनाई जाती है?" इस विषय पर चर्चा करेंगे. साथ ही देव दीपावली के वैदिक इतिहास तथा देव दीपावली के धार्मिक महत्व के बारे में भी जाएंगे. 

देव दीपावली क्यों मनाया जाता है? | Know Why Dev Deepawali is celebrated in Hindi?
देव दीपावली क्यों मनाया जाता है?
Why Dev Deepawali is celebrated?


देव दीपावली 2021 | Dev Deepawali 2021

हमारा प्यारा भारत देश त्योहारों से भरा हुआ है. इसमें कई छोटे तो कई बड़े त्यौहार शामिल है. इन्ही में दीपावली का अपना अलग ही महत्व है. दीपावली का त्यौहार कार्तिक महीने के अमावस्या को मनाया जाता है, और इसके 15 दिन बाद कार्तिक पूर्णिमा के दिन देव दीपावली का त्योहार मानाया जाता है. देव दीपावली एक आध्यात्मिक रूप से एक महत्वपूर्ण त्योहार है जो उत्तर भारत के साथ देश के कई राज्यों में मनाया जाता है. मान्यता है कि इस दिन देवता दिवाली मनाते हैं, इसलिए इसे देव दीपावली कहा जाता है. इस वर्ष यानी वर्ष 2021 में देव दीपावली शुक्रवार, 19 नवंबर 2021 को है.

कहा जाता है की इस दिन देवता दिवाली मनाते हैं इसलिए इसे देव दीपावली कहा जाता है. कहते हैं कि देवता कार्तिक पूर्णिमा के दिन पृथ्वी पर आते हैं और दिवाली मनाते हैं. देव दीपावली दिन भगवान विष्णु और मां गंगा की पूजा की जाती है, साथ ही इस दिन नदी स्नान खासकर गंगा स्नान और दीपदान का भी विशेष महत्व है. इसी दिन तुलसी विवाह के उत्सव का भी समापन होता है. मान्यता है कि इस दिन देवता जागृत होते हैं, ऐसे में यदि नदी में दीपदान किया जाए तो व्यक्ति को लंबी आयु की प्राप्ति होती है. वहीं तुलसी पूजन करने से उसके कष्ट दूर होते हैं और सौभाग्य व समृद्धि आती है. 

देव दीपावली आध्यात्मिक रूप से एक महत्वपूर्ण त्योहार है जो उत्तर भारत के साथ देश के कई राज्यों में मनाया जाता है. देव दीपावली का त्यौहार मुख्य रूप से वाराणसी शहर में मनाया जाता है. वाराणसी में इस त्यौहार का सबसे ज्यादा उत्साह देखने को मिलता है. इस दिन मां गंगा की पूजा की जाती है, तथा गंगा नदी के घाटों को दीए जलाकर रोशन किया जाता है. इस दिन गंगा के घाटों पर हजारो दीपक प्रज्जवलित किये जाते है, इसके वजह से यहाँ का नजारा बहुत ही अद्भुत होता है. जब गंगा नदी में दीपक प्रज्ज्वलित करके छोड़े जाते है, तो वह दृश्य बहुत ही दिव्य, बहुत अलौकिक होता है. साथ ही इस दिन गंगा नदी के मुख्य घात पर महा गंगा आरती और आतिशबाजी का आयोजन किया जाता है. इस दिन देव दीपावली का आनंद लेने व इस महापर्व का हिस्सा बनने के लिए देश विदेश से हज़ारो भक्त वाराणसी की धरती पर आते है.


देव दीपावली क्यों मनाया जाता है? | Know Why Dev Deepawali is celebrated in Hindi?

  1. पौराणिक कथाओ के अनुसार प्राचीन काल में जब एक बार त्रिपुरासुर नामक राक्षस के आतंक द्वारा धरतीलोक तथा स्वर्गलोक में सभी को त्रस्त हो गए थे. एक दिन सभी देवतागड तथा मुनिगड परेशान होकर शिवशंकर से सहायता मांगने गए और उनसे राक्षस का अंत करने की प्रार्थना की. भगवान शिव उनके प्रार्थना को स्वीकार करते हुए त्रिपुरासुर राक्षस का वध किया. राक्षस के अंत की खुशी में सभी देवता प्रसन्न होकर भोलेनाथ की नगरी काशी में पधारे. यहाँ उन्होंने खुशियां मनाई, दीप जलाई. जिस दिन ये हुआ, उस दिन कार्तिक मास की पूर्णिमा तिथि थी. तब से आज तक कार्तिक मास की पूर्णिमा पर पुरे देश और खासकर काशी में बड़े रूप में देव दीपावली मनाई जाती है.
  2. कहा जाता है कि इस दिन देवता पृथ्वी पर आते हैं. इसी माह में ब्रह्मा, विष्णु, शिव, अंगिरा और आदित्य आदि ने महापुनीत पर्वों को प्रमाणित किया है. जिस वजह से कार्तिक पूर्णिमा के पूरे महीने को काफी पवित्र माना जाता है.
  3. साथ ही, देव दीपावली के दिन ही तुलसी विवाह समारोह का समापन होता है.
  4. पुराणों के अनुसार इसी दिन भगवान विष्णु ने मत्स्य अवतार धारण किया था.
  5. माना जाता हैं कि कार्तिक पूर्णिमा को ही भगवान श्रीकृष्ण को आत्मबोध हुआ था.
  6. देव दीपावली के दिन गुरुनानक देवजी महाराज का जन्म हुआ था.


देव दीपावली पूजा विधि | Dev Deepawali Puja Vidhi

देव दीपावली के दिन गंगा नदी में स्नान का विशेष महत्व है. मान्यता है कि देव दीपावली के दिन सूर्योदय से पहले ही गंगा स्नान कर साफ वस्त्र पहने जाते हैं. यदि आप गंगा स्नान नहीं कर सकते तो एक बाल्टी या टब में सामान्य पानी थोड़ा गंगाजल डालकर स्नान कर सकते हैं. सुबह ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करें. कहते हैं कि गंगा स्नान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है. इसके बाद गणपति, महादेव और नारायण का ध्यान करें. उन्हें रोली, चंदन, हल्दी, पुष्प, अक्षत, नैवेद्य, धूप और दीप आदि अर्पित करें. शिव मंत्र और विष्णु भगवान के मंत्रों का जाप करें. शिव चालीसा पढ़ें, गीता का पाठ करें या विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें. शाम के समय किसी नदी में दीप को प्रवाहित करें. अगर ऐसा नहीं कर सकते तो किसी मंदिर में दीपक जलाकर रखें. इसके अलावा अपने घर में और पूजा के स्थान पर भी 5, 7, 11, 21 या 51 दीपक जलाएं. शाम के समय फिर से भगवान शिव की पूजा की जाती है. भोलेशंकर को फूल, घी, नैवेद्य और बेलपत्र अर्पित करें. 


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