Navratri celebrations reason: जानिए वर्ष में 2 बार नवरात्री क्यों मनाया जाता है? | Why navratri is celebrated twice in a year?

Reason behind 2 time navratri celebrations in a year: जानिए आखिर क्यों साल में 2 बार नवरात्री का त्यौहार मनाया जाता है? | Know why Navratri is celebrated twice in year in Hindi?

भारतवर्ष में कई त्यौहार मनाये जाते है, जिसका कोई न कोई रहस्य अथवा कारण अवश्य रहता है. कोई त्यौहार ऐतिहासिक होती है तो कोई त्यौहार धार्मिक परंपरागत होती है, कई मानव प्रकृति से जुड़े है तो कई शरीर विज्ञान से. परन्तु हर एक त्यौहार का अपना एक महत्व होता है और कोई न कोई वैज्ञानिक कारण जरूर होता है. क्योकि प्राचीन भारत के सभ्यता के लोग, ऋषि मुनि हमसे अधिक प्रकृति से जुड़े हुए थे, इसलिए हर त्यौहार के पीछे अपना एक अलग ही कारण होता है.
नवरात्री त्यौहार हिन्दू धर्म में विशेष महत्व रखता है. नवरात्री का त्यौहार बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतिक है. यह त्यौहार हमें माँ दुर्गा के सभी नौ रूपों का दर्शन करने का सौभाग्य देता है और समाज में स्त्रियों के महत्व और उनके सामर्थ्य को प्रतिबिंबित करता है. नवरात्रि में नौ दिनों तक भक्त मां के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा-अर्चना करते हैं और मां को प्रसन्न करने के लिए व्रत आदि भी किया जाता है. 

प्रमुख रूप से ज्यादातर लोग वर्ष में दो नवरात्री मनाते है. एक नवरात्रि गर्मी की शुरुआत पर चैत्र में और दूसरा सर्दी की शुरुआत पर आश्विन माह में. अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार एक बार मार्च-अप्रैल महीने में, दूसरी बार सितंबर-अक्टूबर महीने में. लेकिन बोहोत से ऐसे लोग है जिन्हे शायद नहीं पता होगा की आखिर क्यों वर्ष में 2 बार नवरात्री मनाई जाती है. साल में 2 बार नवरात्री मनाने के पीछे क्या कारण है. इस लेख में हम वर्ष में 2 बार नवरात्री क्यों मनाई जाती है उसपर चर्चा करेंगे और नवरात्र का उत्सव साल में दो बार मनाने के पीछे आध्यात्मिक, प्राकृतिक और पौराणिक कारणों के बारे में भी जानेंगे. 
एक साल में 2 बार क्यों मनाते हैं नवरात्रि?, Why navratri is celebrated twice in a year?
Why navratri is celebrated twice in a year?

हिन्दू धर्म में 4 नवरात्री मनाई जाती है! | 4 Navratri is celebrated in Hinduism!

हिंदू धर्म में एक साल में चार बार नवरात्री आता हैं. साल के प्रथम मास चैत्र में पहली नवरात्र होती है, चौथे माह आषाढ़ में दूसरी नवरात्र पड़ती है, अश्विन माह में प्रमुख शारदीय नवरात्र होती है, फिर साल के अंत में माघ माह में गुप्त नवरात्र होते हैं. इन सभी नवरात्रों का जिक्र देवी भागवत तथा अन्य धार्मिक ग्रंथों में भी मिलता है. इन सभी में चैत्र और शारदीय नवरात्रि का विशेष महत्व तथा अधिक प्रसिद्ध है. प्रमुख रूप से चैत्र नवरात्री तथा शारदीय नवरात्रि को मनाया जाता है. ​हिंदू नववर्षक की शुरुआत ही चैत्र नवरात्रि से मानी जाती है. वहीं शारदीय नवरात्रि का भी अपना अलग महत्व है. 


शारदीय नवरात्री | Shardiya Navratri

हिंदू कैलेंडर के मुताबिक शारदीय नवरात्री प्रत्येक वर्ष शरद ऋतु में अश्विन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से शुरू होते हैं. इस साल यानी वर्ष 2021 में शारदीय नवरात्रि 7 अक्टूबर से हैं. नवरात्रि में नौ दिनों तक भक्त मां के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा-अर्चना करते हैं और मां को प्रसन्न करने के लिए व्रत भी किया जाता है. मान्यता है कि नौ दिनों तक भक्तिभाव से मां दुर्गा की पूजा करने से वह प्रसन्न होकर भक्तों के सभी कष्ट हर लेती हैं और उन्हें मनचाहा वरदान प्रदान करती है. 


चैत्र नवरात्री | Chaitra Navratri

चैत्र नवरात्री की शुरुआत गर्मी के मौसम में होती है. साल के प्रथम मास चैत्र में चैत्र नवरात्र होती है. अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार मार्च-अप्रैल के महीने में. चैत्र नवरात्री मनाने का कारण भी कुछ शारदिय नवरात्री की तरह है. चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से 9 दिनों तक देवी के आह्वान पर असुरों के संहार के लिए माता पार्वती ने अपने अंश से 9 रूप उत्पन्न किए. फिर सभी देवताओं ने उन्हें अपने शस्त्र देकर शक्ति संपन्न किया. इसके बाद देवी ने असुरों का अंत किया. यह संपूर्ण घटनाक्रम चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से 9 दिनों तक घटित हुआ, इसलिए चैत्र महीने में मनाये जाने के कारण इसे चैत्र नवरात्री भी कहते हैं.

Also see -> 

नवरात्री क्यों मनाई जाती है? | Know Why Navratri is celebrated in Hindi?

ग्रंथो के अनुसार दैत्य गुरु शुक्राचार्य के कहे जाने पर महिषासुर नामक दैत्य ने घोर तपस्या करके ब्रह्माजी को प्रसन्न किया और उनसे वर मांगा कि उसे कोई देव अथवा दानव, पुरुष अथवा जानवर और न ही कोई शस्त्र मार सकें. वरदान प्राप्त होते ही महिषासुर ने पृथ्वी पर अपना आतंक मचाना शुरू कर दिया, लोगो पर अत्याचार करने लगा, देवताओ को बंदी बनाने लगा. तब देवताओं की रक्षा के लिए ब्रह्माजी ने वरदान का भेद बताते हुए बताया कि असुरों का नाश अब स्त्री शक्ति ही कर सकती है. अतः ब्रह्माजी के निर्देश पर देवों ने 9 दिनों तक मां पार्वती को प्रसन्न किया और उनसे असुरों के संहार का वचन लिया. महिषासुर के वध के लिए देवी दुर्गा का जन्म हुआ था. मां दुर्गा और महिषासुर के बीच नौ दिनों तक घमासान युद्ध चला और दसवे दिन मां दुर्गा ने महिषासुर का वध किया था. इसीलिए शारदीय नवरात्र शक्ति-पर्व के रूप में मनाया जाता है.
दूसरी कथा के अनुसार, जब भगवान राम लंका पर आक्रमण करने जा रहे थे तो उससे पहले उन्होंने मां भगवती की अराधनी की. भगवान राम ने नौ दिनों तक रामेश्वर में माता का पूजन किया और उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर मां ने उन्हें जीत का आर्शीवाद दिया. दसवें दिन राम जी ने रावण को हराकर लंक पर विजय प्राप्त की थी. तभी तक विजयदशमी का त्योहार मनाया जाता है.

एक साल में 2 बार क्यों मनाते हैं नवरात्रि? | Why navratri is celebrated twice in a year?

जब भगवान राम लंका पर आक्रमण करने जा रहे थे, तब वे माता भगवती के अराधना करना चाहते थे, उनसे अपने विजय का आशीर्वाद लेना चाहते थे. परन्तु इसके लिए वो चैत्र नवरात्री तक रुक नहीं सकते थे. अतः भगवान राम ने रामेश्वर में ही नौ दिनों तक माता का पूजन किया और उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर मां ने उन्हें जीत का आर्शीवाद दिया. दसवें दिन राम जी ने रावण को हराकर लंक पर विजय प्राप्त की थी. तभी तक विजयदशमी का त्योहार मनाया जाता है. कहा जाता है तभी से वर्ष में 2 बार नवरात्री मनाने का चलन शुरू हुआ.

नवरात्रि का महत्व | Know Importance of Navratri in Hindi

नवरात्रि धर्म की अधर्म पर और सत्य की असत्य पर जीत का प्रतीक है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन्हीं नौ दिनों में मां दुर्गा धरती पर आती है, और धरती को उनका मायका कहा जाता है. उनके आने की खुशी में इन दिनों को दुर्गा उत्सव के तौर पर देशभर में धूमधाम से सेलिब्रेट किया जाता है. श्रध्दालु पहले दिन कलश स्थापना कर इन नौ दिनों तक व्रत-उपवास करते हैं. माँ दुर्गा की पूजा - अर्चना करते है. माँ भगवती देवी भी अपने भक्तो को मनचाहा वरदान प्रदान करती है, भक्तो की मनोकामना पूरी करती है.


यह भी पढ़े


एक टिप्पणी भेजें

और नया पुराने