Dahi Handi Festival 2021: दही हांडी पर्व क्या है?, क्यों मनाया जाता है? | क्या है दही हांडी मनाने का वजह?

Dahi Handi 2021: जानिए कृष्ण जन्माष्टमी पर दही हांडी क्यों फोड़ी जाती है?, कैसे हुई इसकी शुरुआत?, पौराणिक कथा तथा महत्व...

भारत को त्योहारों की भूमि कहा जाता है और यह सिर्फ प्राचीन रीति-रिवाजों की वजह से नहीं बल्कि हर त्योहार अपने साथ खुशियां लेकर आता है. जब भी भारत में भक्ति और प्रेम सद्भावना से परिपूर्ण त्योहारों की बात होती है, तब श्री कृष्ण जन्माष्टमी की बात अवश्य होती है. जैसा की हम सब जानते है की जन्माष्टमी पर्व भगवान श्री कृष्णा के जन्म दिन के रूप में मनाया जाता है, ठीक उसी प्रकार दही हांडी भी श्री कृष्ण के नटखट बालक रूप और प्रेम के प्रतिक के रूप में मनाया जाता है. तमिलनाडु में दही हांडी को 'उरीदी' कहा जाता है.

जन्माष्टमी एक ऐसा ही त्योहार है जिसे लोग पूरे उत्साह के साथ मनाते हैं तथा दही हांडी हमेशा कृष्ण जन्माष्टमी के दूसरे दिन ही मनाया जाता है. दही हांडी श्री कृष्ण के बालक स्वरूप के चंचल और मनमोहक क्रिया कलापो हमारे आँखों के सामने दिखाने का एक अच्छा और काफी मजेदार उत्सव है. दही हांडी भारत के लगभग हर हिस्से में मनाया जाता है. लेकिन यह उत्सव महाराष्ट्र, गुजरात तथा दक्षिण भारत में ज्यादा प्रचलित है. यहाँ लगभग हर वर्ष दही हांडी का उत्सव मनाया जाता है. हर वर्ष यह उत्सव होने के बावजूद बहुत से लोग यह नहीं जानते आखिर दही हांडी क्यों मनाया जाता है?, दही हांडी में क्या होता है?, क्यों कृष्ण जन्माष्टमी के दूसरे दिन ही दही हांडी फोडते है?, आखिर दही हांडी मानाने के पीछे क्या कारण है? तो आइये जानते है इन्ही सब सवालों के जवाब.
क्यों मनाया जाता है? | क्या है दही हांडी मनाने का वजह?, Why Dahi Handi Festival is celebrated?
दही हांडी 2021 | Dahi Handi 2021

दही हांडी उत्सव क्या होता है? | Know What Is Dahi Handi Festival In Hindi?

दही हांडी भगवन श्री कृष्ण के जन्माष्टमी के साथ मनाया जाने वाला एक प्रसिद्ध उत्सव है. जिस प्रकार श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का त्यौहार भगवान कृष्ण के जन्म के उपलक्ष्य में मनाया जाता है, उसी प्रकार दही हांडी कृष्ण के बाल स्वरुप के नटखट रूप को दर्शाता है. अतः पहले श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाती है और फिर उसके बाद दही हांडी का उत्सव मनाया जाता है. देश तथा विदेशो में भगवान कृष्ण में श्रद्धा रखने वाले कृष्ण जन्माष्टमी आने के पहले इसके तैयारियों में लग जाते है. इस मौके पर लोग अपने अपने घरों के साथ मंदिरों को भी सजाते है. लोग व्रत रखते है, दान दक्षिणा करते है, भजन कीर्तन करते है. फिर दूसरे दिन दही हांडी उत्सव के लिए टोलिया इकठ्ठा होने लगती है.

हालाँकि जन्माष्टमी और दही हांडी का उमंग पुरे देश पर छाया रहता है. जगह जगह विभिन्न कार्यक्रमों तथा प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है. लेकिन गुजरात, महाराष्ट्र और दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में दही-हांडी का विशेष महत्व है. इस दिन बच्चे तथा नौजवान गोविंदा बनकर दही हांडी का आयोजन करते हैं. युवा अपना अपना दल बना कर इसमें हिस्सा लेते हैं. जगह-जगह चौराहों, गलियों में दही और मक्‍खन से भरी मटकियां लटकाई जाती हैं और इन गोविंदाओं द्वारा तोड़ने का प्रयास किया जाता है. यह एक खेल के रूप में होता है, जिसके लिए इनाम भी दिए जाते हैं. इसमें कुछ लोग पानी, रंग फेकते है इनपर. कई तरह के भक्ति तथा लोग गीत गाये जाते है. कई जगह बड़े बड़े स्पीकर से गाने बजाये जाते है.  

दही हांडी क्यों मनाया जाता है?, जन्‍माष्‍टमी पर कैसे हुई दही हांडी परंपरा की शुरुआत? | Know Why Dahi Handi Is Celebrated In Hindi?

भगवान कृष्ण को बचपन में दूध, दही, माखन का बहुत शौक था. माखन तो उन्हें अतिप्रिय था. जब श्री कृष्ण नन्हे बालक थे, वे अपने मित्रो के साथ नगर में भ्रमण करते थे साथ ही लोगो के घरों में से माखन भी चुरा लेते थे. माखन चुराकर खुद खाते और अपने सखाओ को भी खिलाते. माखन तो चुराते ही थे साथ में घर में सरे सामान को अस्त व्यस्त कर देते. कई बार तो माखन से भरी मटकियो को भी तोड़ देते थे. हालाँकि लोगो को उनकी ये नटखट हरकते अच्छी भी लगती थी, लेकिन कभी कभी ज्यादा नुकसान हो जाने पर वे अक्सर उनकी शिकायत उनके माता यशोदा मैय्या से करती. माता भी कृष्ण को समझाती, परन्तु पुरे नगर का दुलारे लाडले कहा मानने वाले. लोग कृष्ण से दही मख्खन से भरी हांडियों और मटकियों को बचाने के ऊंचे स्थान पे रखने लगे. जब कृष्ण अपने हाथो से नहीं पाते, तो उनके बाल सखाये झुण्ड बनाकर नन्हे कृष्ण को अपने कंधो पर उठा लेते थे. भगवान कृष्ण के इसी रूप के याद में उनके भक्त प्रति वर्ष दही हांडी का उत्सव आयोजन करते है. बालक कृष्‍ण की इन नटखट शरारत से भरी बाल लीलाओं को याद में ही दही हांडी का उत्‍सव मनाया जाता है.

दही हांड़ी कैसे मनाते है?, दही हांडी कैसे फोडते है? | How Dahi Handi Is Celebrated in Hindi?

दही हांडी फोड़ने के लिए लोगो का अपना समूह होता है. एक समूह में कितने लोग है ये उनपर निर्भर करता है. परन्तु किसी किसी प्रतियोगिता में इसपर निर्धारित संख्या बल होती है. दही हांडी फोड़ने के लिए ये समूह पहले से ही प्रैक्टिस करते है, उसकी तैयारियों में जूट जाते है. जन्माष्टमी के दूसरे दिन दही हांडी के उत्सव का आयोजन होने पर कई समूह प्रतियोगिता में भाग लेते है. जिस सार्वजनिक स्थान पर दही हांडी का आयोजन करना है, उसे सजाया जाता है.

फिर मिट्टी की हांडी में दही, घी, मक्खन, मिठाई, फल, मेवा आदि भर के एक बहुत ऊंचे स्थान पर लटकाया जाता है. इसके बाद प्रत्येक दाल एक एक करके मटकी को फोड़ने का प्रयास करते है. दही हांडी तोड़ने के लिए दल के लोग एक दुसरे के पीठ पर चढ़ कर पिरामिड बनाते हैं. इस पिरामिड के सबसे ऊपर सिर्फ एक ही व्यक्ति चढ़ता है तथा उसे गोविंदा कहा जाता है, और हांडी तोड़कर उत्सव को सफ़ल बनाता है. आसपास बहुत से लोग जुटे रहते है. भक्ति तथा लोक गीत बजते रहते है. कुछ लोग उनपर पानी तथा रंग डालते है. लोग नाचते रहते है. संक्षिप्त में कहा जाये तो पूरा परिसर झूमता है. इस दही हांडी प्रतियोगिता में जितने वाले दल को इनाम राशि तथा उपहार दिए जाते है.

दही हांडी कब मनाया जाता है? | Know When Dahi Handi Is Celebrated In Hindi?

दही हांडी सदैव कृष्ण जन्माष्टमी के बाद ही मनाया जाता है, जन्माष्टमी के दूसरे दिन ही. वर्ष 2021 में जन्माष्टमी का त्यौहार 30 अगस्त, सोमवार को है तथा दही हांडी का उत्सव 31 अगस्त, मंगलवार को है.

दही हांडी का महत्व | Dahi Handi Importance In Hindi

जन्माष्टमी तथा दही हांड़ी का अपना एक विशेष महत्व है. एक और जन्माष्टमी हमें भक्ति और प्रेम का सन्देश देता है, तो दूसरी और दही हांडी हमें समाज में एक जुटता का सन्देश देता है. जन्माष्टमी का पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतिक है. भगवान श्री कृष्ण के नाम मात्र से ही हमारे पाप धुल जाते है. श्री कृष्ण भक्ति का सागर है. लोग जन्माष्टमी के दिन व्रत रखते है. जन्माष्टमी के दिन सभी लोग एक साथ आते है भजन कीर्तन करते है. फिर दही हांडी के दिन भी लोग समूह में आकर मटकी फोड़ते है.

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