रक्षा बंधन क्यों मनाया जाता है?, क्या है इसके पीछे का कहानी? | जानिए रक्षाबंधन मनाने का वजह, कहानी और इतिहास ...

The Reason Behind RakshaBandhan: रक्षाबंधन कब, क्यों और कैसे मनाया जाता है? ..., क्या है रक्षाबंधन के पीछे का इतिहास, कहानियां, पौराणिक कथायें तथा रक्षाबंधन ( राखी ) का महत्व?  | Raksha Bandhan Kab, Kyu Aur Kaise Manaya Jata hai In Hindi ...


सबसे पहले तो आप सभी को रक्षा बंधन की सारी शुभकामनाये. रक्षा बंधन का खाली नाम सुनते ही हमारे चेहरों पे ख़ुशी की झलक दिखाई देने लगती है. खासकर भाई और बहनो के चेहरों पर. रक्षाबंधन ना सिर्फ ख़ुशी, उल्लास और प्रसन्नता का त्यौहार है, बल्कि रक्षाबंधन बंधन, अटूट रिश्ता, रक्षा, जिम्मेदारी का भी प्रतिक है.

रक्षाबंधन हर साल श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन धूम-धाम से मनाया जाता है. रक्षाबंधन के दिन बहन अपने भाई की कलाई में रक्षा का सूत्र बाँधती है जो पवित्रता, शुद्धता और अटूट बंधन का प्रतिक है. बहनें अपने भाई की रक्षा के लिए उनके कलाई पर रक्षा सूत्र बांधती हैं और भाई भी बहनों को जीवन भर उनकी रक्षा का वचन देते हैं. रक्षा करने और करवाने के लिए बांधा जाने वाला पवित्र धागा रक्षा बंधन कहलाता है. यह परंपरा हमारे भारत में काफी प्रचलित है और इसे श्रावण पूर्णिमा का बहुत बड़ा त्यौहार माना जाता है.

आगे हम इस लेख में "रक्षाबंधन क्यों मनाया जाता है?" इस बारे में जानेंगे. रक्षा बंधन मानाने के वजह के बारे में बात करेंगे. साथ ही हम रक्षाबंधन के पीछे का इतिहास, इसके पीछे का कहानी, उपलब्ध पौराणिक कथाओं के बारे में भी जानेंगे, तथा रक्षाबंधन ( राखी ) के महत्व को भी समझेंगे जिसे हम प्रत्येक वर्ष मानते है.

रक्षा बंधन क्यों मनाया जाता है?, Know Why Rakshabandhan Is Celebrated?
रक्षा बंधन क्यों मनाया जाता है?
Know Why Rakshabandhan Is Celebrated?


आप सभी को रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाये | Happy Rakshabandhan To Everyone

रक्षा बंधन भारत के सबसे प्रसिद्ध पर्वों में से एक है, तथा हिन्दुओं का महत्वपूर्ण पर्व है. रक्षा बंधन का ये त्यौहार भाई बहन के प्रेम और कर्तव्य के सम्बन्ध को समर्पित है, जो भारत के कई हिस्सों में मनाया जाता है. रक्षाबंधन का यह त्यौहार सदियों से चला आ रहा है. यह त्यौहार भारत के अलावा भी विश्व भर में जहाँ पर हिन्दू धर्मं के लोग रहते हैं, वहाँ इस त्यौहार को भाई बहनों के बीच मनाया जाता है. इस त्यौहार का आध्यात्मिक महत्व के साथ साथ ऐतिहासिक महत्त्व भी है.

रक्षाबंधन को खुशियों का त्यौहार कहा जाता है. रक्षाबंधन का त्योहार बहन-भाई के बीच प्रेम का प्रतीक है. इसमें हर बहन अपने भाई को तिलक लगाकर उसके दीर्घायु की कामना करती है, भाई के हाथ पर राखी ( रक्षा सूत्र ) बांधती है जो पवित्रता, शुद्धता और अटूट बंधन का प्रतिक है. बहनें भाई की लंबी आयु, सफलता और समृद्धि की कामना करती हैं. भाई भी अपनी बहन के रक्षा का वचन देता है और साथ ही सुख-दुख में साथ निभाने का वादा करता है, और स्नेह स्वरूप बहन को उपहार स्वरुप कुछ देता है.


रक्षा बंधन ( रक्षा सूत्र ) क्या है?, रक्षाबंधन/ राखी का अर्थ क्या है? | What is Raksha Bandhan In Hindi?, What Is Rakshabandhan?

रक्षा बंधन का पर्व दो शब्दों से जुड़ा हुआ है, "रक्षा" और "बंधन". रक्षा का अर्थ है सुरक्षा यानी किसी संकट से किसी की रक्षा करना. बंधन का अर्थ है बांधना यानी कोई चीज़ किसी को बांधना. रक्षा - बंधन का संयुक्त रूप से अर्थ होता है की किसी को सुरक्षा प्रदान करना या सुरक्षा से बांधना. रक्षा करने और करवाने के लिए बांधा जाने वाला पवित्र धागा रक्षा बंधन कहलाता है. संस्कृत भाषा में, इस पर्व का मतलब होता है की "एक ऐसा बंधन जो की रक्षा प्रदान करता हो". यहाँ पर "रक्षा" का मतलब रक्षा प्रदान करना होता है और “बंधन” का मतलब होता है एक गांठ, एक डोर जो की रक्षा प्रदान करे. रक्षाबंधन एक रक्षा सूत्रीय बंधन (धागा) है, जो बहन अपने भाई की कलाई पर बांधती है. ये रक्षाबंधन हमेशा भाइयों को ये याद दिलाता है की उन्हें अपने बहनों की हमेशा रक्षा करनी है.


रक्षाबंधन का पर्व कब मनाया जाता है?, रक्षाबंधन वर्ष के किस महीने में मनाया जाता है? | When is Rakshabandhan celebrated?, In which month of the year Rakshabandhan is celebrated?

हमारा देश भारत त्योहारों और खुशियों की भूमि है जहाँ हर एक त्यौहार बड़े ही उत्साह और हर्षोउल्लास के साथ मनाया जाता है. प्रत्येक मौसम के साथ साथ अनेक त्यौहार की सूची एक के बाद एक तैयार हो जाती है. हिंदू धर्म के सबसे बड़े पर्वों की बात हो रही हो तो रक्षाबंधन को भुलाया नहीं जा सकता. रक्षा बंधन (Raksha बंधन) हिन्दू धर्म के सबसे बड़े त्योहारों में से एक है जो की श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को मनाया जाता है. हर साल श्रावण मास के श्रावण पूर्णिमा के दिन रक्षा बंधन का त्यौहार बड़ी धूम धाम से मनाया जाता है.


रक्षाबंधन का त्योहार किस प्रकार मनाया जाता है?, रक्षाबंधन कैसे मनाया जाता है? | How is the festival of Rakshabandhan celebrated?, How is Rakshabandhan celebrated?

रक्षाबंधन के दिन बहनें थाली सजाती है. राखी की थाली सजाते समय रेशमी वस्त्र में केसर, सरसों, चंदन, चावल व दुर्वा रखकर भगवान की पूजा करनी चाहिए. राखी की थाली सजाएं, इसमें रोली, कुमकुम, अक्षत, दीपक, मिठाई और राखी रखें. राखी (रक्षा सूत्र) को भगवान शिव की प्रतिमा, तस्वीर या शिवलिंग पर अर्पित करें. फिर, महामृत्युंजय मंत्र का एक माला (108 बार) जप करें. इसके बाद भाई को तिलक लगाकर देवाधिदेव शिव को अर्पित किया हुआ रक्षा-सूत्र भाइयों की कलाई पर बांधें. भाई को मिठाई खिलाएं. भाई भी बहन को मिठाई खिलता है. राखी बांधने के बाद भाइयों को इच्‍छा और सामर्थ्‍य के अनुसार बहनों को भेंट देनी चाहिए. राखी पहनते समय भाई का मुख पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए. महाकाल भगवान शिव की कृपा, महामृत्युंजय मंत्र और श्रावण सोमवार के प्रभाव से सब शुभ होगा.

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जानिए क्यों मनाया जाता है रक्षाबंधन?, रक्षाबंधन मनाने का वजह?, रक्षाबंधन के पीछे की कहानी ... |Know why Rakshabandhan is celebrated?, Reason for celebrating Rakshabandhan?, Story behind Rakshabandhan ...

रक्षाबंधन वास्तव में भाई बहन के अटूट प्रेम को समर्पित त्योहार है. रक्षाबंधन भाई बहनो के बीच मनाया जाने वाला पर्व है. इस दिन बहन अपने भाइयों को रक्षाधागा बंधती हैं और भाई अपनी बहनों को जीवन भर उनकी रक्षा करने का वचन देते हैं. जिन भाइयों की जिनकी अपनी सगी बहन नहीं होती या फिर किसी कारण साथ में नहीं होती, वे भी किसी दूसरे बहन से राखी बंधवा लेते है, क्योंकि मुँहबोली बहनों से राखी बंधवाने की परंपरा भी काफी पुरानी है. रक्षाबंधन का त्यौहार सदियों से चला आ रहा है. परन्तु हमारे मन में भी यह प्रश्न उठा रहेगा की आखिर "रक्षाबंधन क्यों मनाया जाता है?", "रक्षाबंधन मानाने के पीछे का कारण क्या है?", या फिर "रक्षाबंधन मानाने का वजह क्या है?"... 

रक्षा बंधन का त्यौहार भाई और बहन के बीच कर्तव्य का प्रतीक माना जाता है. यह त्यौहार प्यार और सुरक्षा के भावना से ओत - प्रोत है. रक्षाबंधन ना ही सिर्फ सगी बहनो के रक्षा के लिए प्रेरित करता है बल्कि दुसरो के बहनो के लिए भी अपनत्व का भाव प्रकट करता है. रक्षाबंधन समाज में ना सिर्फ ख़ुशी, उल्लास और प्रसन्नता लाता है, बल्कि रक्षाबंधन बंधन, अटूट रिश्ता, सुरक्षा, जिम्मेदारी का भी अहसास दिलाता है. रक्षाबंधन या राखी ना ही केवल बहन, भाई को बांधता है बल्कि भाई भी बहन को बांधते है. कहीं - कहीं तो यह भी देखा जा सकता है की बहन बहन को, भाई भाई को, किसी रिश्तेदारों के बीच या अजनबियों को भी बाँधा जाता है. असल में रक्षाबंधन की परंपरा सदियों पहले उन बहनों ने डाली थी जो सगी ही नहीं थीं. भले ही उन बहनों ने अपने संरक्षण के लिए ही इस पर्व की शुरुआत क्यों न की हो लेकिन उसी बदौलत आज भी इस त्योहार की मान्यता बरकरार है.   


रक्षाबंधन की शुरुआत कैसे हुई?, रक्षा बंधन के पीछे की कहानियां ... | How did Rakshabandhan start?, Stories behind Raksha Bandhan

रक्षा बंधन एक सामाजिक, पौराणिक, धार्मिक और एतिहासिक त्यौहार होने के वजह से न केवल भारत में बल्कि पुरे विश्व में प्रचलित है. रक्षाबंधन मानाने का मुख्य कारण हमें अपने इतिहास में मिलती है. रक्षाबंधन बांधने का शुरुआत सदियों पहले हो गयी थी, जिसका जिक्र हमें अपने पुराण, ग्रंथों आदि में मिलती है. इतिहास के पन्नों को देखें तो इस त्योहार की शुरुआत की उत्पत्ति लगभग 6 हजार साल पहले बताई गई है. इसके कई साक्ष्य भी इतिहास के पन्नों में दर्ज हैं. रक्षाबंधन का इतिहास सिंधु घाटी की सभ्यता से भी जुड़ा हुआ है. वह भी तब जब आर्य समाज में सभ्यता की रचना की शुरुआत मात्र हुई थी. ग्रंथों के अनुसार रक्षा बंधन मनाने के पीछे बहुत सी पौराणिक कथाएँ हैं, जो रक्षा बंधन का इतिहास बयाँ करता है. चलिए जानते है की इस विशेष त्यौहार, रक्षाबंधन की शुरूआती कैसे हुई और रक्षा बंधन मनाने के पीछे की कहानियां ...


माता लक्ष्मी और राजा बलि की कहानी, लक्ष्मीजी ने बांधी थी राजा बलि को राखी | The story of Mother Lakshmi and King Bali, Lakshmi had tied Rakhi to King Bali

भगवत पुराण और विष्णु पुराण के अनुसार जब राजा बलि तीनो लोको पर जीत हासिल कर लिए तो उसने यज्ञ संपन्न कर स्वर्ग पर अधिकार जमाने की कोशिश की थी. बलि की तपस्या से घबराए देवराज इंद्र ने भगवान विष्णु से प्रार्थना की. विष्णुजी वामन ब्राम्हण का रूप रखकर राजा बलि से भिक्षा अर्चन के लिए पहुंचे. यद्यपि गुरु शुक्राचार्य ने नन्हे वामन को देखकर पहचान गए थे की ये स्वयं विष्णु है, उन्होंने राजा बलि को नन्हे वामन ब्राम्हण को कोई वचन ना देने को कहा. परन्तु मना करने पर भी बलि ने वामन को वचन स्वरुप तीन पग स्थान दिया और अपने संकल्प को नहीं छोड़ा और तीन पग भूमि दान कर दी.

वामन रुपी विष्णु भगवान ने दो पग में ही आकाश और धरती को नाप दिया, फिर वचन पूर्ती हेतु तीसरे पग के लिए राजा बलि ने अपना सर झुकाया. परन्तु राजा बलि के उदार समर्पण और भक्ति को देखते हुए राजा बलि को रसातल में भेज दिया. राजा बलि ने भक्ति के बल पर विष्णुजी से हर समय अपने सामने रहने का वचन ले लिया. इससे लक्ष्मीजी चिंतित हो गईं.

नारद के कहने पर लक्ष्मी जी ने एक ब्राह्मण औरत का रूप लेकर बलि के महल में रहने लगी. वहीँ बाद में लक्ष्मीजी बलि के पास गई और रक्षासूत्र बांधकर उसे अपना भाई बनाया और बदले में उनसे कुछ देने को कहा. अब बलि को ये नहीं पता था की वो औरत और कोई नहीं माता लक्ष्मी है इसलिए उन्होंने उसे कुछ भी मांगने का अवसर दिया. इसपर माता ने बलि से विष्णु जी को उनके साथ वापस वैकुंठ लौट जाने का आग्रह किया. वचन बद्ध होने के कारण बलि को भगवान विष्णु को वापस लौटना पड़ा. उसी समय से राखी बांधने का क्रम शुरु हुआ जो आज भी अनवरत जारी है. इसी कारण राखी को बहुत से जगहों में बलेव्हा भी कहा जाता है. 


इन्द्रदेव की कहानी, इन्द्रदेव को उनकी पत्नी ने रक्षा सूत्र बंधा | Story of Indradev, Indradev was tied with a protective thread by his wife

भविस्य पुराण के अनुसार जब राजा बाली के नेतृत्व में असुरों और देवताओं के बिच युद्ध हुआ तो राजा बलि ने भगवान इंद्र को हरा दिया और अमरावती पर अपना आधिपत्य स्थापित किया. इस अवस्था को देखकर इंद्र की पत्नी सची मदद का आग्रह लेकर भगवान विष्णु के पास पहुंची. भगवान विष्णु ने सची को सूती धागे से एक हाथ में पहने जाने वाला वयल बना कर दिया और कहा की वो इस धागे को जाकर अपने पति इंद्र के कलाई पर बांध दें. और जब उन्होंने ऐसा किया तब इंद्र के हाथों राजा बलि की पराजय हुई, और अमरावती को वापस अपने अधिकार में लिया.

यहाँ से इस पवित्र धागे का प्रचलन आरम्भ हुआ. पुराने समय में युद्ध में जाने से पूर्व राजा और उनके सैनिकों के हाथों में उनकी पत्नी और बहनें राखी बांधा करती थी, जिससे वे सकुशल घर लौट सकें.


कृष्ण और द्रौपधी की कहानी, द्रौपदी ने कृष्ण को बांधी थी राखी | Story of Krishna and Draupadi Draupadi tied Rakhi to Krishna

मान्यता है की महाभारत की लड़ाई से पहले श्री कृष्ण ने राजा शिशुपाल के खिलाफ सुदर्शन चक्र उठाया था, उसी दौरान उनके हाथ में चोट लग गई और खून बहने लगा तभी द्रोपदी ने अपनी साड़ी में से टुकड़ा फाड़कर श्री कृष्ण के हाथ पर बांध दिया. भगवान कृष्ण को द्रौपधी की इस कार्य से काफी प्रसन्नता हुई और उन्होंने उनके साथ एक भाई बहन का रिश्ता निभाया. श्री कृष्ण ने द्रोपदी को भविष्य में आने वाली हर मुसीबत में रक्षा करने की कसम दी. बहुत वर्षों बाद जब द्रौपधी को कुरु सभा में जुए के खेल में हारना पड़ा तब कौरवों के राजकुमार दुहसासन ने द्रौपधी का चिर हरण करने लगा. इसपर कृष्ण ने द्रौपधी की रक्षा करी थी और उनकी लाज बचायी थी.


संतोषी माँ की कहानी | Story of Santoshi Maa

भगवान गणेश के दो पुत्र हुए शुभ और लाभ. इन दोनों को एक बहन की कमी बहुत खलती थी, क्यों की बहन के बिना वे लोग रक्षाबंधन नहीं मना सकते थे. इसलिए उन्होंने अपने पिता भगवन गणेश से बहन के लिए जिद की. कुछ समय के बाद भगवान नारद ने भी गणेश को पुत्री के विषय में कहा. फिर भगवान गणेश ने एक पुत्री की कामना की और भगवान गणेश की दो पत्नियों रिद्धि और सिद्धि, की दिव्य ज्योति से माँ संतोषी का अविर्भाव हुआ. इसके बाद माँ संतोषी के साथ शुभ लाभ रक्षाबंधन मना सके. 


यम और यमुना की कहानी | Story of Yama and Yamuna

एक अन्य पौराणिक कहानी के अनुसार, मृत्यु के देवता यम जब अपनी बहन यमुना से 12 वर्ष तक मिलने नहीं गये, तो यमुना दुखी हुई और माँ गंगा से इस बारे में बात की. बाद में गंगा माता के परामर्श पर यम जी ने अपने बहन के पास जाने का निश्चय किया. अपने भाई के आने से यमुना को काफी खुशी प्राप्त हुई और उनके लिए विभिन्न तरह के व्यंजन भी बनायीं. यम को इससे बेहद ख़ुशी हुई और उन्होंने यमुना से कहा कि वे मनचाहा वरदान मांग सकती हैं. जिस पर उन्होंने कहा की मुझे आपसे बार बार मिलना है. यम अपनी बहन के प्रेम और स्नेह से गद गद हो गए और यमुना को अमरत्व का वरदान दिया. 


सम्राट Alexander और सम्राट पुरु ( पोरस )  | Emperor Alexander and Emperor Puru (Porus)

राखी त्यौहार के सबसे पुरानी कहानी सन 300 BC में हुई थी. हमेशा विजयी रहने वाला अलेक्जेंडर जब भारत जितने के लिए अपनी पूरी सेना के साथ यहाँ आया था. उस समय भारत में सम्राट पुरु ( पोरस ) का काफी शक्तिशाली राजा थे. वह भारतीय राजा पोरस की प्रखरता से काफी विचलित हुआ. इससे अलेक्जेंडर की पत्नी रोशानक काफी तनाव में आ गईं थीं. जब Alexander की पत्नी को रक्षा बंधन के बारे में पता चला तब उन्होंने सम्राट पुरु के लिए एक राखी भेजी, जिसमे उनसे सिंकंदर पर जानलेवा हमला न करने का वचन लिया. जिसका सम्मान करते हुए राजा पोरस ने Alexander पर व्यक्तिगत जानलेवा हमला नहीं किया था.


रानी कर्णावती और सम्राट हुमायूँ | Queen Karnavati and Emperor Humayun

रक्षाबंधन की साक्ष्य रानी कर्णावती व सम्राट हुमायूँ के बीच भी दिखाई देती हैं. मध्यकालीन युग में राजपूत व मुस्लिमों के बीच संघर्ष चल रहा था. रानी कर्णावती चितौड़ के राजा की विधवा थीं. सन 1535 के आस पास की इस घटना में जब चित्तोड़ की रानी को यह लगने लगा कि उनका साम्राज्य गुजरात के सुलतान बहादुर शाह से नहीं बचाया जा सकता तो उन्होंने हुमायूँ, जो कि पहले चित्तोड़ का दुश्मन था, को राखी भेजी और एक बहन के नाते मदद माँगी. तब हुमायूँ ने भी रानी कर्णावती को अपनी बहन का दर्जा दिया. हुमायूँ ने अपनी बहन की रक्षा के हेतु अपनी एक सेना की टुकड़ी चितौड़ भेजा. जिससे बाद में बहादुर साह के सेना को पीछे हटना पड़ा था.


1905 का बंग भंग और रविन्द्रनाथ टैगोर | Bang Bhang of 1905 and Rabindranath Tagore

भारत में जिस समय अंग्रेज अपनी सत्ता को बनाये रखने के लिए ‘डिवाइड एंड रूल’ की पालिसी अपना रहे थे, उस समय रविंद्रनाथ टैगोर ने लोगों में एकता के लिए रक्षाबंधन का पर्व मनाया. वर्ष 1905 में बंगाल की एकता को देखते हुए ब्रिटिश सरकार बंगाल को विभाजित तथा हिन्दू और मुस्लिमों में सांप्रदायिक फूट डालने की कोशिश करती रही. इस समय बंगाल में और हिन्दू मुस्लिम एकता बनाए रखने के लिए और देश भर में एकता का सन्देश देने के लिए रविंद्रनाथ टैगोर ने रक्षा बंधन का पर्व मनाना शुरू किया.


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