क्या है टॉयकैथॉन (Toycathon) ? कैसे टॉयकैथॉन भारत का करोडो रुपये बाहर जाने से रोक सकता है?

Toycathon 2021 : जाने कैसे टॉयकैथॉन भारत में खिलौने के व्यापर को बढ़ने में मदद करेगा और कैसे यह भारत के करोडो रुपये को बचाने में मदद करेगा. 


टॉयकेथॉन ( Toycathon ) एक प्रकार का प्रतियोगिता है, जो राष्ट्रीय स्तर पर आयोजन किया जाता है. टॉयकेथॉन प्रतियोगिता की शुरुआत इस साल यानी 2021 से की गयी है. टॉयकेथॉन का मुख्य उद्देश्य ऐसे खिलौने और गेम्स बनाना है, जो भारतीय सभ्यता, संस्कृति, कला, इतिहास, मूल्यों और पौराणिक कथाओं पर आधारित हों. जिसे खेलते हुए बच्चे या किसी भी उम्र के लोगो का विकास हो, प्रेणना मिले या उन्हें कुछ जानकारी प्राप्त हो. टॉयकेथॉन  'आत्मनिर्भर भारत अभियान'  को भी मजबूती प्रदान करेगा.

कैसे टॉयकैथॉन भारत के करोडो रुपये को बचाने में मदद करेगा और रोजगार को बढ़ावा देगा?
टॉयकेथॉन ( Toycathon ) 2021


टॉयकेथॉन ( Toycathon ) 2021


जैसा ऊपर बताया गया है की टॉयकेथॉन ( Toycathon ) एक प्रकार का राष्ट्रीय प्रतियोगिता है, जिसमे कई लोग भाग लेंगे और नए नए खिलौने और गेम्स का अविष्कार होगा, जिससे भारत खिलौने जगत में आत्मनिर्भर बनेगा.

टॉयकेथॉन के चालू होने से भारत खिलौना बाजार में आत्मनिर्भर बन सकेगा. भारत में खिलौना उद्योग स्तापित होंगे जिससे ना ही सिर्फ लोगो को रोजगार प्राप्त होगा बल्कि छोटे छोटे खिलौना बनाने वालो को भी आर्थिक लाभ होगा. टॉयकेथॉन, भारत के घरेलू बाजार के साथ-साथ वैश्विक खिलौना बाजार में हमारे विनिर्माण क्षेत्र के लिए एक बड़ा अवसर प्रदान करता है. 

टॉयकेथॉन एक राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता है, जिसका उद्देश्य है ऐसे खिलौने और गेम्स बनाना जो भारतीय सभ्यता, कला, संस्कृति, इतिहास, मूल्यों और पौराणिक कथाओं पर आधारित हों. 'आत्मनिर्भर भारत अभियान' के तहत देश को टॉय व गेम इंडस्ट्री में भी आत्मनिर्भर बनाने के लिए इसकी शुरुआत की गई है. टॉयकेथॉन 'आत्मनिर्भर भारत अभियान' को मजबूती प्रदान करेगा.

सरकार ने घरेलू खिलौना उद्योग को बढ़ाने, मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत को प्रोत्‍साहित करने और खेल व खिलौनों के विकास में बच्‍चों की सहभागिता बढ़ाने के लिए इस साल २०२१ से 'टॉयकैथौन २०२१' की शुरुआत की थी. इसके तहत प्रतियोगियों को नए खिलौने और गेम का कॉन्सेप्ट तैयार करना होगा जो गेम भारतीय सभ्यता, इतिहास, संस्कृति, पौराणिक कथाओं आदि को दर्शाता हों.  


कैसे टॉयकैथॉन भारत के करोडो रुपये को बचाने में मदद करेगा और रोजगार को बढ़ावा देगा? 


खिलौना उद्योग एक लघु-स्तरीय उद्योग है, जिसमें ग्रामीण आबादी, दलित, गरीब लोग तथा आदिवासी आबादी के कारीगर शामिल हैं. इन क्षेत्रों में लाभ प्राप्त करने के लिये, हमें स्थानीय खिलौनों की तरफ रूख करना होगा अर्थात् वोकल फॉर लोकल की रणनीति अपनानी होगी. ऐसा करने से हम अपने क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करेंगे और इससे रोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा.

माना जाता है की खिलौना उद्योग का बाजार एक अरब डॉलर का है, जिसमे भारत की हिस्सेदारी केवल नाम की है. भारत में ना ही खिलौना उद्योग की कमी है, बल्कि इसे पूरा करने के लिए विदेशो से खिलौना आयात किया जाता है. भारत का कुल ८०% खिलौना विदेशों से मंगाया जाता है. 

टॉयकैथॉन 2021 में स्‍टूडेंट्स के अलावा टीचर्स, टॉय एंड डिजाइन एक्‍सपर्ट्स और स्‍टार्टअप्‍स से भारतीय संस्‍कृति, मूल्‍यों, महान लोगों से जुड़े हुए खेलों व खिलौनों के आइडियाज लिए जायेंगे. टॉयकैथॉन का उद्देश्य भारतीय मूल्यों पर आधारित अभिनव खिलौनों की अवधारणा को बढ़ावा देना है, जो बच्चों में सकारात्मक व्यवहार और अच्छे मूल्यों को विकसित कर सकें. इसके अलावा बेहतरीन टॉय कॉन्सेप्ट को कारोबार में शामिल करने के लिए उद्योग और निवेशकों से समर्थन लिया जाएगा.


टॉयकैथॉन का उद्देश्य


  • भारत में खिलौना उद्योग को बढ़ावा देना है, ताकि खिलौना बाजार के व्यापक हिस्से पर भारत अग्रणी हो सके.
  • भारत को एक वैश्विक खिलौना निर्माण केंद्र के रूप में बढ़ावा देना, जिससे भारत के ग्रामीण क्षेत्रो के अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा.
  • भारतीय मूल्य, संस्कृति, कला आदि के आधार पर नवीन खिलौनों की अवधारणा का विकास करना जो बच्चों में सकारात्मक व्यवहार और अच्छे मूल्यों को बढ़ाएगा. इससे बच्चो के मानसिक सोच को और ताकत मिलेगा और अपनी संस्कृति की जानकारी बढ़ेगी.


टॉयकैथॉन २०२१ का फोकस 


  • भारतीय सभ्यता, विरासत, संस्कृति, पौराणिक कथाओं, इतिहास, लोकाचार, प्रौद्योगिकी, जातीयता, राष्ट्रीय नायकों और महत्वपूर्ण घटनाओं पर आधारित खिलौना/खेल अवधारणाएं 
  • सकारात्मक व्यवहार और अच्छे मूल्यों को विकसित करें ('संस्कार')
  • विकलांग/दिव्यांग बच्चों के लिए खिलौने
  • शारीरिक और मानसिक फिटनेस को बढ़ावा देना 
  • पर्यावरण के अनुकूल, स्वदेशी, गैर-खतरनाक या पुनर्नवीनीकरण सामग्री का उपयोग करना
  • वैदिक गणित को बढ़ावा देने पर ध्यान दें
  • राष्ट्रीय एकता को प्रोत्साहित करना और सांस्कृतिक विविधता का सम्मान करना.
  • स्वच्छ भारत, बेटी बचाओ बेटी पढाओ, पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन, डिजिटल इंडिया, स्किल इंडिया, एक भारत श्रेष्ठ भारत जैसे सहायक मिशन
  • पारंपरिक भारतीय खिलौनों को फिर से खोजना/फिर से डिजाइन करना
  • अध्यापन के लिए खिलौने (गणित, विज्ञान, भाषा, सामाजिक विज्ञान आदि में छात्रों की कठिन अवधारणाओं को पढ़ाने के लिए)
  • खिलौनों का डिजाइन सरकार द्वारा जारी बुनियादी खिलौना दिशानिर्देशों को पूरा करना चाहिए



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