Rabindranath Tagore Jayanti 2022 | गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती 2021

भारत के  पहले नोबेल पुरस्कार विजेता गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर 161 वीं जयंती 2022: तिथि, महत्व और कम-ज्ञात तथ्य...


भारतीय राष्ट्रगान के रचयिता, मानवतावादी विचारक, विश्वविख्यात कवि, साहित्यकार, दार्शनिक और नोबेल पुरस्कार से सम्मानित गुरुदेव रबीन्द्रनाथ टैगोर जी की जयंती पर उन्हें कोटि कोटि नमन...

हर साल 7 मई को रविंद्रनाथ टैगोर जयंती के रूप में मनाया जाता है. आज, 7 मई को, भारत के पहले नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर की 161 वीं जयंती है. उनका जन्म 7 मई, 1861 को कोलकाता के जोरसंको हवेली में हुआ था. रवींद्रनाथ टैगोर जयंती बंगाली महीने के 25 वें दिन बोइशाख में पड़ती है, बंगाली कैलेंडर के अनुसार, टैगोर का जन्म वर्ष 1268 में हुआ था. रवीन्द्रनाथ टैगोर जयंती या रवीन्द्र जयंती दुनिया भर में बंगाली समुदाय के लिए एक सांस्कृतिक उत्सव है. रविंद्रनाथ टैगोर कवि होने के साथ संगीतकार, चित्रकार और लेखक भी थे. बहुमुखी प्रतिभा के धनी टैगोर ने गीतांजलि की रचना की जिसके लिए 1913 में इन्हें साहित्य का नोबेल पुरस्कार दिया गया. भारत के राष्ट्रगान, टैगोर के लेखक को गुरुदेव, कबीगुरु, और बिस्वाकाबी के नाम से भी जाना जाता है. रवींद्रनाथ टैगोर न केवल साहित्य में, बल्कि कई लोगों के जीवन में एक प्रेरणादायक व्यक्ति रहे हैं.


Rabindranath Tagore Jayanti 2021 | गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती 2021

गुरुदेव रविंद्रनाथ टैगोर का जीवन परिचय | Rabindranath Tagore Biography Jeevan Parichay in hindi

(7 मई 1861–7 अगस्त 1941)

गुरुदेव रविन्द्रनाथ टैगोर का जन्म 7 मई को 1861 को पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के मशहूर जोर सांको भवन में हुआ था. इनके पिता का नाम देवेन्द्रनाथ टैगोर था, जो कि ब्रह्म समाज के नेता थे और माता का नाम शारदा देवी था. रवींद्रनाथ अपने माता-पिता की तेरहवीं संतान थे, वे अपने भाई-बहन में सबसे छोटे थे. बचपन में उन्‍हें प्‍यार से ‘रबी’ बुलाया जाता था. उन्होंने अपनी माँ को खो दिया जब वह बहुत छोटे थे, उनके पिता एक यात्री थे और इसलिए उन्हें ज्यादातर उनके नौकरों और नौकरानियों ने पाला. 1883 में उनका विवाह मृणालिनी देवी के साथ हुआ. सन् 1901 में शांति निकेतन की स्‍थापना कर गुरु-शिष्य परंपरा को नया आयाम दिया.

इन्हें बचपन से ही गायन, कविता और चित्रकारी में रुचि थी. साथ ही अध्यात्म में भी अगाध स्नेह था. आठ वर्ष की उम्र में उन्‍होंने अपनी पहली कविता लिखी, सोलह साल की उम्र में उन्‍होंने कहानियां और नाटक लिखना प्रारंभ कर दिया था. इन्होंने अपने जीवन काल में कई ऐसी रचनाएं कीं, जिनसे इनकी पहचान न केवल देश में, बल्कि विदेशों में भी बनी. इन्हें असाधारण सृजनशील कलाकार माना जाता है. उन्हें आमतौर पर 20वीं शताब्दी के शुरुआती भारत के उत्कृष्ट रचनात्मक कलाकार के रूप में भी माना जाता है. 


गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर की शिक्षा | Ravindranath Tagore Education in hindi


इन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा कोलकाता के सेंट जेवियर स्कूल से पूरी की. इसके बाद पिता देवेन्द्रनाथ टैगोर की इच्छा को पूरा करने के लिए बैरिस्टर बनने के लिए, 1878 में उच्च शिक्षा के लिए लंदन गए. उन्हें स्कूल लर्निंग में ज्यादा दिलचस्पी नहीं थी और बाद में उन्होंने कानून सीखने के लिए लंदन के यूनिवर्सिटी कॉलेज में दाखिला लिया लेकिन उन्होंने इसे छोड़ दिया और शेक्सपियर के विभिन्न कार्यों को खुद ही सीखा. उन्होंने अंग्रेजी, आयरिश और स्कॉटिश साहित्य और संगीत का सार भी सीखा. प्रकृति से अगाध स्नेह रखने वाले गुरुदेव को लंदन में जरा भी मन नहीं लगा और किसी तरह बैरिस्टर की पढ़ाई अधूरी छोड़कर स्वदेश लौट आए.


जानिये गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर की रचनाएं | Compositions of Gurudev Rabindranath  Tagore in Hindi


गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर भारतीय साहित्य के उज्जवल नक्षत्र हैं। उनका शांत अप्रतिम व्यक्तित्व भारतवासियों के लिए सदैव ही सम्माननीय रहा है. वे न सिर्फ महानतम कवि थे बल्कि चित्रकार, दार्शनिक, संगीतकार एवं नाटककार के विलक्षण गुण भी उनमें मौजूद थे. उनकी रचनाओं से बंगाल संस्कृति पर विशेष प्रभाव पड़ा.

रबींद्रनाथ टैगोर की विरासत और बंगाली और अंग्रेजी साहित्य के क्षेत्र में योगदान को उनके सम्मान के नाम पर देखा जा सकता है. टैगोर को लोकप्रिय रूप से बंगाल के बार्ड के रूप में जाना जाता था और उन्हें उनके संवेदनशील और सुंदर कविता के लिए सबसे ज्यादा याद किया जाता था, जिसका जादुई स्पर्श होता है. वे बंगाली पुनर्जागरण के प्रतिपादक थे जिन्होंने बंगाली कला का आधुनिकीकरण किया और आज तक उनकी सभी कविताएँ, उपन्यास, लघु कथाएँ और निबंध दुनिया भर में व्यापक रूप से पढ़े जाते हैं. 

8 साल की उम्र में, उन्होंने कविताएं लिखना शुरू कर दिया और सोलह साल की उम्र तक उन्होंने कला कृतियों की रचना भी शुरू कर दी और छद्म नाम भानुसिम्हा के तहत अपनी कविताओं को प्रकाशित करना शुरू कर दिया। 1877 में उन्होंने ‘भिखारिनी’ और 1882 में कविताओं का संग्रह ‘संध्या संगत’ लिखा.

टैगोर कविता, गीत, कहानी, और नाटक कलम लिखते थे. टैगोर के लेखन में आम लोगों के जीवन, साहित्यिक आलोचना, दर्शन और सामाजिक मुद्दों के चित्रण शामिल हैं. उन्होंने महाकाव्य को छोड़कर तकरीबन सभी विधाओं में साहित्य रचना की. रवीन्द्रनाथ ने करीब ढाई हजार गीत लिखे और संगीतबद्ध किए. जीवन के अंतिम वर्षों में उनका झुकाव पेंटिंग की ओर हुआ और उन्होंने करीब 3 हजार पेंटिंग्स बनाई.  

उनकी प्रमुख रचनाएं गीतांजलि, गोरा एवं घरे बाईरे है. उनकी काव्य रचनाओं में अनूठी ताल और लय ध्वनित होती है. वर्ष 1877 में उनकी रचना 'भिखारिन' खासी चर्चित रही. बहुमुखी प्रतिभा के धनी टैगोर ने 'गीतांजलि' की रचना की, जिसके लिए 1913 में इन्हें साहित्य का नोबेल पुरस्कार दिया गया. 'गीतांजलि' दुनिया की कई भाषाओं में प्रकाशित किया गया. इसके साथ ही इन्होंने लोकप्रिय कहानियां काबुलीवाला, मास्टर साहब और पोस्ट मास्टर लिखीं, जिन्हें खूब पसंद किया गया. जबकि उपन्यास में इनकी रचनाएं गोरा, मुन्ने की वापसी, अंतिम प्यार और अनाथ आदि प्रमुख हैं, जिन्हें आज भी दुनियाभर में पढ़ा जाता है. अन्य प्रमुख रचनाये इस प्रकार है पूरबी प्रवाहिनी, शिशु भोलानाथ, महुआ, वनवाणी, परिशेष, पुनश्च, वीथिका शेषलेखा, चोखेरबाली, कणिका, नैवेद्य मायेर खेला, क्षणिका, गीतिमाल्य, कथा ओ कहानी इत्यादि.

बंगाल की आर्थिक दरिद्रता से दुखी होकर उन्होंने 100 पंक्तियों की कविता रच डाली. गुरुदेव ने 2,230 गाने लिखे थे. इनका संगीत संयोजन इतना अद्‍भुत है कि इन्हें रवींद्र संगीत के नाम से पहचाना जाता है. गुरुदेव का लिखा 'एकला चालो रे' गाना गांधीजी के जीवन का आदर्श बन गया.

बता दें कि उनकी बेटी रेणुका का निधन 12 वर्ष की आयु में हो गया था. वह टीबी की बीमारी से ग्रस्त थी. बेटी के आकस्मिक निधन से वह दुखी हुए. इस दौरान उन्होंने शिशु नामक कविता की रचना भी की.  

उनके लिखे 'जनगणमन' और 'आमार शोनार बांग्ला' जन-जन की धड़कन बने हुए हैं. गुरुदेव का संदेश था 'शिक्षा से ही देश स्वाधीन होगा संग्राम से नहीं'. कहना न होगा कि आज भी यह संदेश कितना प्रासंगिक है. उन्हें साहित्य के नोबल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था किंतु इससे पूर्व सन 1915 में अंग्रेज शासन ने उन्हें नाइटहुड की उपाधि से अलंकृत किया. उन्हें बंगाल का सांस्कृतिक उपदेशक भी कहा जाता है. उनके व्यक्तित्व की छाप बांग्ला लेखन पर ऐसी पड़ी कि तत्कालीन लेखन का स्वरूप ही बदल गया.

Rabindranath Tagore Jayanti 2021 | गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती 2021
गुरुदेव रबीन्द्रनाथ टैगोर द्वारा लिखित गीतांजलि


गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर को सम्मान | Awards given to Gurudev Rabindranath Tagore in hindi


1913 ई. में रविंद्र्नाथ ठाकुर को उनकी काव्यरचना गीतांजलि के लिये साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिला.

1915 ई. में उन्हें राजा जॉर्ज पंचम ने नाइटहुड की पदवी से सम्मानित किया था. 1919 ई. में जलियाँवाला बाग हत्याकांड के विरोध में उन्होंने यह उपाधि लौटा दी थी.


रवींद्रनाथ टैगोर 'नाईट हुड' यानि सर की उपाधि लौटा दी | Rabindranath Tagore had returned the title of 'Knight Hood' 


गुरुदेव ने आजादी से पूर्व आंदोलन में भी शिरकत की. इनके नेतृत्व में ही 16 अक्टूबर 1905 को बंग-भंग आंदोलन का आरम्भ हुआ था. इस आंदोलन के चलते देश में स्वदेशी आंदोलन को बल मिला. जब रोलेट एक्ट के चलते पंजाब स्थित जलियांवाला बाग में सैकड़ों निर्दोष लोगों की हत्या कर दी गई तो इस नरसंहार से क्षुब्ध होकर गुरुदेव ने अंग्रेजों द्वारा दी गई 'नाईट हुड' की उपाधि को लौटा दिया था. इस उपाधि के अंतर्गत व्यक्ति के नाम से पहले सर लगाया जाता था. गुरुदेव ने 7 अगस्त 1941 ई को अपने जीवन काल की अंतिम सांस ली. 


राजनीति में रवींद्रनाथ टैगोर का योगदान | Rabindranath Tagore's contribution to politics


रवींद्रनाथ टैगोर राजनीति में सक्रिय थे. वह भारतीय राष्ट्रवादियों के पूर्ण समर्थन में थे. इसके अलावा, वह ब्रिटिश शासन के विरोध में थे. उनके काम मैनास्ट में उनके राजनीतिक विचार शामिल हैं. उन्होंने कई देशभक्ति गीत भी लिखे. रवींद्रनाथ टैगोर ने भारतीय स्वतंत्रता के लिए प्रेरणा बढ़ाई. उन्होंने देशभक्ति के लिए कुछ काम लिखे. इस तरह के कार्यों के लिए जनता के बीच बहुत प्यार था. यहां तक कि महात्मा गांधी ने भी इन कार्यों के लिए अपना पक्ष रखा.



रबींद्रनाथ टैगोर 161 वीं जयंती: रबींद्रनाथ टैगोर के बारे में Top 25+ कम ज्ञात तथ्य | Top 25+ hidden facts about Rabindranath Tagore on his 161th Birth Anniversary


  1. रवींद्रनाथ टैगोर का जन्म 7 मई, 1861 को कोलकाता के जोरसंको हवेली में हुआ था. रवींद्रनाथ टैगोर जयंती बंगाली महीने के 25 वें दिन बोइशाख में पड़ती है, बंगाली कैलेंडर के अनुसार, टैगोर का जन्म वर्ष 1268 में हुआ था.
  2. रवींद्रनाथ टैगोर का उपनाम रबी था, वह 13 बच्चों में सबसे छोटे थे और मार्च 1875 में अपनी मां को खो दिया था. 
  3. 11 साल की उम्र में, वह अपने पिता के साथ भारत भर के दौरे पर गये थे. यात्रा के दौरान, उन्होंने शास्त्रीय संस्कृत के कवि कालीदासा सहित प्रसिद्ध लेखकों की रचनाएँ भी पढ़ीं. 
  4. भारत दौरे से लौटने पर, उन्होंने मैथिली शैली में एक लंबी कविता की रचना की.  
  5. 1878 में, वह अपने पिता की इच्छा को पूरा करने के लिए बैरिस्टर बनने के लिए इंग्लैंड गए थे. 
  6. टैगोर ने अपने कॉलेज के वर्षों में शेक्सपियर के कार्यों का अध्ययन करना शुरू किया और 1880 में जब वह बिना डिग्री के बंगाल लौट आए थे.   
  7. रवींद्रनाथ टैगोर की कृति 'गीतांजलि' नोबेल पुरस्कार से सम्मानित हो चुकी है. 'गीतांजलि' के लिए उन्हें 1913 में नोबेल पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया.  
  8. विशेष यह है कि 'गीतांजलि' में लिखी प्रत्येक कविता एक स्वर लिए हुए है जिसे आप अपनी धुन में गा भी सकते हैं. रवींद्रनाथ टैगोर के नाम से रबीन्द्र संगीत भी प्रसिद्ध है. 
  9. गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर 1913 में साहित्य के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित होने वाले पहले गैर-यूरोपीय बने. उन्हें उनकी प्रशंसित कविताओं, गीतांजलि के प्रकाशन के बाद इस प्रतिष्ठित सम्मान से सम्मानित किया गया. वह इस श्रेणी में सम्मान पाने वाले एकमात्र भारतीय हैं.
  10. रवींद्रनाथ टैगोर की रचनाओं से दो देशों की राष्ट्रगान लिए गए. ये ही नहीं एक देश और है जिसका राष्ट्रगान भी उन्हीं के रचना से प्रभावित है. वे एकमात्र कवि हैं जिनकी दो रचनाएँ दो देशों का राष्ट्रगान बनीं - भारत का राष्ट्र-गान 'जन गण मन' और बाँग्लादेश का राष्ट्रीय गान 'आमार सोनार बाँग्ला' उनकी ही रचनाएँ हैं.
  11. बहुमुखी प्रतिभा के धनी रविंद्रनाथ टैगोर कवि होने के साथ संगीतकार, चित्रकार और लेखक भी थे. 
  12. टैगोर कविता, गीत, कहानी, और नाटक कलम लिखते थे. टैगोर के लेखन में आम लोगों के जीवन, साहित्यिक आलोचना, दर्शन और सामाजिक मुद्दों के चित्रण शामिल हैं.
  13. रवींद्रनाथ टैगोर संगीत के रूप में वर्गीकृत 2,230 से अधिक गीतों की रचना की थी. उन्हें लघु कथाओं, और उपन्यासों के कई संस्करणों को लिखने का श्रेय दिया जाता है जिनमें गोरा, घारे-बेयर और योगयोग जैसे काम शामिल हैं.
  14. उनके अधिकांश लेखन बंगाली में थे, बाद में उन्हें पश्चिम में व्यापक दर्शकों के लिए सुलभ बनाने के लिए अंग्रेजी में अनुवाद किया गया.
  15. भारत के राष्ट्रगान निर्माता, रविंद्रनाथ टैगोर को गुरुदेव, कबीगुरु, और बिस्वाकाबी के नाम से भी जाना जाता है.
  16. वर्ष 2011 में, गुरुदेव की 150 वीं जयंती को चिह्नित करने और सम्मानित करने के लिए, भारत सरकार ने पांच रुपये के सिक्के जारी किए थे. 
  17. यह टैगोर थे जिन्होंने 1915 में मोहनदास करमचंद गांधी को 'महात्मा' की उपाधि दी थी. हालाँकि कहा जाता है कि टैगोर ने गांधी की प्रशंसा की थी, लेकिन वे कुछ मुद्दों पर उनके साथ मतभेद रखते थे. 
  18. रवींद्रनाथ टैगोर और अल्बर्ट आइंस्टीन ने 1930 और 1931 के बीच चार बार मुलाकात की और एक-दूसरे के योगदान के लिए एक-दूसरे के प्रति श्रद्धा व्यक्त की. दोनों महान पुरुषो की रुचि संगीत में थी. आइंस्टीन के साथ अपनी पहली मुलाकात के बाद, टैगोर ने लिखा है , "उसके बारे में कुछ भी कठोर नहीं था - कोई बौद्धिक रूप से कमजोर नहीं था. वह एक ऐसा व्यक्ति प्रतीत होता था जो मानवीय संबंधों को महत्व देता था और उसने मुझे वास्तविक रुचि और दिखाई दिखाई."
  19. चित्रकार विलियम रोथेनस्टीन टैगोर परिवार के मित्र थे. टैगोर ने रोथेंस्टीन को गीतांजलि सहित अपने स्वयं के गीतों के अनुवाद दिए, जब बाद में 1912 में लंदन की यात्रा की. रोथेनस्टीन ने टैगोर को एजरा पाउंड और डब्ल्यूबी येट्स जैसे प्रसिद्ध नामों से परिचित कराया.
  20. मार्च 2004 में, रबींद्रनाथ टैगोर को दिया गया नोबेल पुरस्कार शांति निकेतन के उत्तरायण परिसर में एक संग्रहालय से चोरी हो गया. बाद में टैगोर को उनकी जन्म शताब्दी पर एक नया पदक दिया गया.
  21. टैगोर का विवाह 9 दिसंबर 1893 को मृणालिनी देवी के साथ हुआ था. उनके चार बच्चे थे जिनमें से 2 का निधन बाल्यावस्था में ही हो गया था. 
  22. टैगोर को उनके बड़े भाई हेमेंद्रनाथ ने पढ़ाया था, क्योंकि वे औपचारिक शिक्षा के बहुत शौकीन नहीं थे. शिक्षा की इस पद्धति के प्रति उनकी अरुचि ऐसी थी कि वे जीवनकाल में केवल एक दिन के लिए कॉलेज में उपस्थित हुए थे. 
  23. कक्षा की शिक्षा के पारंपरिक तरीकों को चुनौती देने के लिए, टैगोर ने अपनी खुद की एक विश्वभारती नाम की विश्वविद्यालय की स्थापना की, जो की पश्चिम बंगाल के शांतिनिकेतन में स्तित है. जहाँ वे चाहते थे कि मानवता का अध्ययन "राष्ट्र और भूगोल की सीमाओं से परे" हो. विश्वभारती विश्वविद्यालय में कई कक्षाएं अभी भी खुले खेतों में पेड़ों के नीचे संचालित की जाती हैं.
  24. रवींद्रनाथ टैगोर ने 60 साल की उम्र में ड्राइंग और पेंटिंग का काम शुरू किया, जिसे उन्होंने तब जनता के सामने सफलतापूर्वक प्रदर्शित किया.
  25. लंदन में 2011 में उनकी 150 वीं जयंती पर प्रिंस चार्ल्स द्वारा रवींद्रनाथ टैगोर की कांस्य प्रतिमा का अनावरण किया गया जिन्होंने कहा था कि शिलालेख "सहिष्णुता के बीकन के रूप में चमकेंगा".
  26. रवींद्रनाथ टैगोर को 1915 में नाइटहुड से सम्मानित किया गया था, लेकिन उन्होंने 31 मई 1919 को अमृतसर में जलियांवाला बाग नरसंहार के विरोध के रूप में इसका त्याग कर दिया. लॉर्ड चेम्सफोर्ड को लिखे अपने पत्र में, टैगोर ने लिखा, "वह समय आ गया है जब सम्मान का बिल्ला अपमान के संदर्भ में हमारी शर्म को शर्मसार करता है, और मैं अपने हिस्से के लिए, सभी विशेष भेदों के बारे में, उन लोगों के पक्ष में खड़ा होना चाहता हूं मेरे देशवासियों के लिए, जो अपनी तथाकथित तुच्छता के लिए, मनुष्यों के लिए फिट नहीं होने के लिए अपमानित होने के लिए उत्तरदायी हैं."

 

Rabindranath Tagore Jayanti 2021 | गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती 2021

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"मैंने स्वप्न देखा कि जीवन आनंद है. मैं जागा और पाया कि जीवन सेवा है. मैंने सेवा की और पाया कि सेवा में ही आनंद है."

- रवींद्रनाथ टैगोर 


"यदि आप रोते हैं क्योंकि सूरज आपके जीवन से बाहर चला गया है, तो आपके आँसू आपको सितारों को देखने से रोकेंगे."

- रविंद्रनाथ टैगोर 


“कलाकार प्रकृति का प्रेमी है अत: वह उसका दास भी है और स्वामी भी.”

- रवींद्रनाथ टैगोर


“वे लोग जो अच्छाई करने में बहुत ज्यादा व्यस्त होते है, स्वयं अच्छा होने के लिए समय नहीं निकाल पाते.”

- रवींद्रनाथ टैगोर 


“आस्था वो पक्षी है जो भोर के अँधेरे में भी उजाले को महसूस करती है.”

- रवींद्रनाथ टैगोर


“जो कुछ हमारा है वो हम तक तभी पहुचता है जब हम उसे ग्रहण करने की क्षमता विकसित करते हैं.”

- रवींद्रनाथ टैगोर


“मित्रता की गहराई परिचय की लम्बाई पर निर्भर नहीं करती.”

- रवींद्रनाथ टैगोर


“मौत प्रकाश को ख़त्म करना नहीं है; ये सिर्फ भोर होने पर दीपक बुझाना है.”

- रवींद्रनाथ टैगोर 


“फूल की पंखुड़ियों को तोड़ कर आप उसकी सुंदरता को इकठ्ठा नहीं करते. ”

- रवींद्रनाथ टैगोर


“सिर्फ तर्क करने वाला दिमाग एक ऐसे चाक़ू की तरह है

जिसमे सिर्फ ब्लेड है. यह इसका प्रयोग करने वाले को घायल कर देता है.”

- रवींद्रनाथ टैगोर


“मंदिर की संततिसी से बाहर भागकर बच्चे धुल में बैठते हैं,

भगवान उन्हें खेलता देख पुजारी को भी भूल जाते हैं.” 

- रवींद्रनाथ टैगोर 


"कुछ पत्थर में फूल खिल जाते है, कुछ अनजाने भी अपने बन जाते है, 

इस कातिल दुनिया में कुछ लाश को कफ़न भी नसीब नहीं होते, तो कुछ लाश पर ताजमहल बन जाते है." ​

- रवींद्रनाथ टैगोर 


“सीढिया उन्हें मुबारक हो, जिसे छत तक जाना है,

मेरी मंजिल तो आसमान है, रास्ता मुझे खुद बनाना है.” 

- रवींद्रनाथ टैगोर


"प्रसन्न रहना बहुत सरल है, लेकिन सरल होना बहुत मुश्किल है." 

-रविंद्रनाथ टैगोर 


"कुए का पानी सब फसलो को एक समान मिलता है, लेकिन फिर भी करेला कड़वा बेर मीठा और ईमली खट्टी होती है; 

यह दोष पानी का नहीं है बीज का है, वैसे ही भगवान सबके लिए एक समान है लेकिन दोष कर्मो का है."

- रवींद्रनाथ टैगोर


"जो पेड़ लगाता है, यह जानते हुए कि वह उसकी छाया में कभी नहीं बैठेगा, कम से कम जीवन का अर्थ समझने लगा है." 

- रविंद्रनाथ टैगोर


"कला में, मनुष्य स्वयं को प्रकट करता है न कि अपनी वस्तुओं को."

- रवीन्द्रनाथ टैगोर


"जहाँ मन बिना भय के होता है और सिर ऊँचा होता है वहाँ ज्ञान मुक्त होता है." 

- रविंद्रनाथ टैगोर 


"बादल मेरे जीवन में तैरते हुए आते हैं, बारिश या अश्रु तूफान को ले जाने के लिए नहीं, बल्कि मेरे सूर्यास्त आकाश में रंग जोड़ने के लिए."

- रवीन्द्रनाथ टैगोर 


"बर्तन में रखा पानी हमेशा चमकता है और समुद्र का पानी हमेशा गहरे रंग का होता है. लघु सत्य के शब्द हमेशा स्पष्ठ होते हैं जिन्हे साफ़ शब्दों से बताया जा सकता है, महान सत्य सदैव मौन रहता है."

- रवीन्द्रनाथ टैगोर


"देशभक्ति हमारा अंतिम आध्यात्मिक आश्रय नहीं हो सकती; मेरी शरण मानवता है. मैं हीरे की कीमत के लिए ग्लास नहीं खरीदूंगा, और जब तक मैं जीवित हूं, मैं देशभक्ति को मानवता पर विजय प्राप्त करने की अनुमति नहीं दूंगा."

- रवीन्द्रनाथ टैगोर


"मित्रता की गहराई परिचय की लम्बाई पर निर्भर नहीं करती."

- रवीन्द्रनाथ टैगोर


"प्रत्येक शिशु यह संदेश लेकर आता है कि ईश्वर अभी मनुष्यों से निराश नहीं हुआ है."

- रवीन्द्रनाथ टैगोर


"प्रेम अधिकार का दावा नहीं करता, बल्कि स्वतंत्रता प्रदान करता है."

- रवीन्द्रनाथ टैगोर


"चंद्रमा अपना प्रकाश संपूर्ण आकाश में फैलाता है परंतु अपना कलंक अपने ही पास रखता है."

- रवीन्द्रनाथ टैगोर


"जब मैं खुद पर हँसता हूँ तो मेरे ऊपर से मेरा बोझ कम हो जाता है."

- रवीन्द्रनाथ टैगोर


"हम महानता के सबसे करीब तब आते हैं जब हम विनम्रता में महान होते हैं."

- रवीन्द्रनाथ टैगोर


"मैं एक आशावादी होने का अपना ही संसकरण बन गया हूँ.

यदि मैं एक दरवाजे से नहीं जा पाता तो दुसरे से जाऊंगा, या एक नया दरवाजा बनाऊंगा.

वर्तमान चाहे जितना भी अंधकारमय हो कुछ शानदार सामने आएगा."

- रवीन्द्रनाथ टैगोर 


"एक शिक्षक वास्तव में कभी नहीं सिखा सकता जब तक कि वह अभी भी खुद को नहीं सीख रहा है. एक दीपक दूसरे दीपक को कभी भी जला नहीं सकता है जब तक कि वह अपनी लौ जलाए नहीं. जो शिक्षक अपने विषय के अंत में आ गया है, जिसके पास अपने ज्ञान के साथ कोई जीवित यातायात नहीं है, लेकिन केवल अपने छात्रों को अपना पाठ दोहराता है, केवल अपने दिमाग को लोड कर सकता है, वह उन्हें कुछ नया नहीं सीखा सकता." 

- रविंद्रनाथ टैगोर 


गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की दुर्लभ तस्वीरें | Rare Pictures Of Gurudev Rabindranath Tagore

Rabindranath Tagore Jayanti 2021 | गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती 2021
रवींद्रनाथ टैगोर ने अल्बर्ट आइंस्टीन से जब वह बर्लिन गए,
तब उन्होंने कैपथ में अपनी कुटिया में मुलाकात की.
यह तस्वीर 24 अगस्त 1930 को वापस ली गई थी

Rabindranath Tagore Jayanti 2021 | गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती 2021
महात्मा गांधी ने रबींद्रनाथ टैगोर से सालाना मिलने के अपने वादे का सम्मान करने के लिए शांतिनिकेतन का दौरा किया. यह तस्वीर 20 फरवरी, 1940 की है

Rabindranath Tagore Jayanti 2021 | गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती 2021
10 अप्रैल 1934 को शांति निकेतन में उनकी पोती और पोते के साथ

Rabindranath Tagore Jayanti 2021 | गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती 2021
टैगोर हावड़ा स्टेशन के एक रेलवे डिब्बे में अपने बिस्तर पर आराम करते हुए.
यह तस्वीर 22 नवंबर, 1940 को प्रकाशित हुई थी

Rabindranath Tagore Jayanti 2021 | गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती 2021
यह तस्वीर 20 फरवरी, 1940 को शांतिनिकेतन में महात्मा गांधी और कस्तूरबा को
रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा दिए गए एक रिसेप्शन की है

Rabindranath Tagore Jayanti 2021 | गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती 2021
ऑल-पीपल के रिसेप्शन में टैगोर ने उनके सम्मान में 99,
गोवर-स्ट्रीट, लंदन में आयोजित किया.
यह तस्वीर 15 फरवरी 1931 की है

Rabindranath Tagore Jayanti 2021 | गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती 2021
जून 1916 में जापान में मदर एंड पॉल रिचर्ड के साथ

Rabindranath Tagore Jayanti 2021 | गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती 2021

Rabindranath Tagore Jayanti 2021 | गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती 2021
युवा रवींद्रनाथ टैगोर

Rabindranath Tagore Jayanti 2021 | गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती 2021
4 नवंबर, 1936 को बोलपुर में कवि के सिल्वन रिट्रीट में
जवाहरलाल नेहरू के साथ रवींद्रनाथ टैगोर

Rabindranath Tagore Jayanti 2021 | गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती 2021
7 अगस्त, 1940 को ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह के बाद
सिन्हा सदन, शांतिनिकेतन से निकले तीन दिग्गजों
सर मौरिस ग्वेअर, रवींद्रनाथ टैगोर और सर्वपल्ली राधाकृष्णन की एक दुर्लभ तस्वीर


Rabindranath Tagore Jayanti 2021 | गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती 2021
1921 में पश्चिम के अपने दौरे के दौरान रवींद्रनाथ टैगोर ने
एक समूह के साथ फोटो खिंचवाई

Rabindranath Tagore Jayanti 2021 | गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती 2021
ब्लाइंड अमेरिकन लेखक और श्रम अधिकार कार्यकर्ता हेलेन केलर ने
1930 में न्यूयॉर्क में एक बैठक में रवींद्रनाथ टैगोर को बधाई देते हुए 

Rabindranath Tagore Jayanti 2021 | गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती 2021
25 दिसंबर 1932 को उनके पुणे की आखिरी यात्रा के दौरान
एस.पी. भिडे द्वारा रवींद्रनाथ टैगोर की तस्वीर



Rabindranath Tagore Jayanti 2021 | गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती 2021
श्री अरबिंदो से मिलने के लिए रास्ते में जाते हुए टैगोर

Rabindranath Tagore Jayanti 2021 | गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती 2021
गुरुदेव रबीन्द्रनाथ जी टैगोर उन विरल साहित्यकारों में से एक हैं,
जिनके साहित्य और व्यक्तित्व में अद्भुत साम्य है.
गुरुवर की जयंती पर उन्हें नमन


उनके जैसा दोबारा फिर कोई ‘और’ ना हुआ,

बहुतों ने लिखा लेकिन कोई ‘टैगोर’ ना हुआ.


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